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vad 15 30-09-2017
 
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खेल-सिनेमा
 
महिला टीम को मायूसी

 

घरेलू माहौल मन मुताबिक पिच के बावजूद भारतीय महिला क्रिकेट टीम सुपर सिक्स में जगह बनाने में नाकामयाब रही। इतना जरूर है कि टीम ने पाकिस्तान को करारी मात दे कर सातवां स्थान हासिल करने में सफलता हासिल की। 


भारत में खेले जा रहे आईसीसी महिला वर्ल्ड कप क्रिकेट टूर्नामेंट में मेजबान भारत को श्रीलंका ने पहले ही १३८ रनों से बड़ी मात देकर टूर्नामेंट से बाहर कर  दिया। पिछले विश्वकप में तीसरे स्थान पर रहने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम खेल के लगभग हर क्षेत्र में श्रीलंका के सामने कमजोर नजर आई। भारत-श्रीलंका मैच का फैसला उसी वक्त हो गया था जब २१ ओवर तक पहुंचते-पहुंचते भारत अपने चार विकेट खो चुका था और उसकी झोली में महज ६६ ही रन थे। उसके बाद तो ऐसा लगा कि भारत मैच में सिर्फ सम्मान बचाने के लिए खेल रहा है। लेकिन फिर चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने छह विकेट से रौंदकर विश्व कप में सातवां स्थान हासिल कर लिया। इस जीत से भारतीय प्रशंसकों को थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन दुनिया की एक नंबर की बल्लेबाज रह चुकीं मिताली राज और दुनिया की सबसे तेज महिला गेंदबाज रह चुकीं झूलन गोस्वामी के रहते हुए भारत जिस तरह से सातवें स्थान पर जा पहुंचा है, वह आश्चर्यजनक है। 

 

सुपर सिक्स में ग्रुप ए से इंग्लैंड श्रीलंका और वेस्टइंडीज और ग्रुप बी से ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका की टीमें पहुंची हैं। इसके पहले इंग्लैंड ने वेस्टइंडीज को छह विकेट से हरा कर सुपर सिक्स में पहुंचने वाली पहली टीम बनी। अन्य मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने न्यूजीलैंड को सात विकेट से मात दी जबकि दक्षिण अफ्रीका ने पाकिस्तान को १२६ रनों से हरा दिया। 

 

आईसीसी महिला विश्वकप के पहले दौर में ही शर्मनाक हार झेलने वाली भारतीय टीम की कप्तान मिताली राज का कहना है कि उन्हें अपनी टीम की गेंदबाजों से इतने खराब प्रर्दशन की उम्मीद नहीं थी। मिताली ने श्रीलंका के हाथों मिली ३८ रन की करारी पराजय के बाद कहा, सभी गेंदबाज नाकाम साबित हुईं। हम यह तो समझ सकते हैं कि एक या दो गेंदबाज खराब प्रर्दशन करें लेकिन पूरे गेंदबाजी विभाग ने ही खराब प्रर्दशन किया। हमारी टीम के पास आक्रामक गेंदबाजी थी और मुझे नहीं लगता था कि श्रीलंकाई बल्लेबाज हमारे खिलाफ इतना बड़ा स्कोर बना सकती हैं। इंग्लैंड के खिलाफ भी भारतीय गेंदबाजों ने आखिरी सत्र में काफी रन लुटाए थे। श्रीलंका के खिलाफ भी यही हुआ। 

 

भारत में महिला विश्व कप का १०वां संस्करण खेला जा रहा है और इस बार इसमें आठ टीमों ने भाग लिया। पिछले नौ संस्करणों में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड का ही दबदबा रहा है। हालांकि एक बार महिला विश्व कप का खिताब न्यूजीलैंड ने भी जीता है। ऑस्ट्रेलिया ने सर्वाधिक पांच बार यह खिताब हासिल किया है जबकि इंग्लैंड तीन बार चौंपियन बना है। इन सबमें दीगर बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया को छोड़ इंग्लैंड और न्यूजीलैंड की महिला टीम अपने देश को क्रिकेट में विश्व चैंपियन बना चुकी हैं जबकि पुरुष टीमें अभी भी अपनी पहली सफलता से काफी दूर हैं।

 

तीसरी बार मेजबानी कर रहा भारत केवल एक बार फाइनल में पहुंचने में कामयाब रहा है। २००४-०५ में दक्षिण अफ्रीका में हुए महिला विश्व कप में भारतीय टीम फाइनल में पहुंची थी लेकिन ऑस्ट्रेलिया के हाथों मिली करारी हार से पहली बार विश्व चैंपियन बनने का उसका सपना टूटा था। पिछला चैंपियन इंग्लैंड छह बार तो ऑस्ट्रेलिया सात बार फाइनल में पहुंचने में सफल रहा था। इसके अलावा न्यूजीलैंड की महिला टीम चार बार फाइनल में पहुंचने में कामयाब रही है। जबकि एक बार भारत भी खिताबी जंग में शामिल हुआ था। कुल मिलाकर विश्वकप को लेकर सबकी कयासबाजी निराधार साबित हुई। महिला क्रिकेट टीम विश्व चैंपियन बनने से रही। उल्टे जो कीर्तिमान हासिल था उससे भी तीन पैदान नीचे उतर गई है। घरेलू माहौल अपने मन माफिक पिच के बावजूद जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम का यह हाल रहा तो विदेशी सरजमीं पर क्या होगा, यह तो भविष्य ही बताएगा।

 

जिस्म का जलवा

 

सिल्वर स्क्रीन पर केवल दो से तीन घंटे की कहानी में किरदार हमें अपनी ही दुनिया का हिस्सा बना लेते हैं। पर्दे पर दिखने वाले ग्लैमरस चेहरे खुद को किरदार के हिसाब से ढालने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। हेयर स्टाइल चलने और बोलने के ढंग से लेकर हर एक किरदार के हिसाब से यहां अभिनेता और अभिनेत्री अपनी काया बदलने को भी तैयार रहते हैं। बॉलीवुड में यह कायान्तरण अभिनेत्रियों के वजन कम-ज्यादा करने और अभिनेताओं के सिक्स पैक बनाने तक ही सीमित है। लेकिन हॉलीवुड इस मामले में बहुत आगे है। 


पहले बॉलीवुड की बात। हाल ही में फिल्म नशा से बॉलीवुड में कदम रखने की तैयारी कर रहीं पूनम पांडे के ६ किलो वजन बढने की खबर मीडिया में आई। इस बात से तो साफ है कि अपने जीरो फिगर से मॉडलिंग और ट्वीटर की दुनिया में छा जाने वाली पूनम नशा में जुदा-जुदा नजर आएंगी। वजन कम करके चर्चा में आने वाली सबसे पहली अभिनेत्री करीना कपूर हैं। फिल्म टशन के लिए उन्होंने इतना वजन कम किया कि जीरो फिगर का फैशन ही चल पड़ा। फिल्म 'टशन' में करीना की बदली काया ने लड़कियों की वजन कम करने की चाहत को जीरो फिगर का नाम दिया। 

 

कैटरीना कैफ ने शीला की जवानी पर थिरकने के लिए अपना वजन कम किया। इसके बाद 'मेरे ब्रदर की दुल्हन' के लिए उन्हें वजन बढ़ाना पड़ा। विद्या बालन ने तो एक ही फिल्म में किरदार में फिट होने के लिए वजन घटाया भी और बढ़ाया भी। विद्या अपने फिगर के लिए कभी भी चर्चा में नहीं रही। लेकिन 'डर्टी पिक्चर' के लिए उन्हें ८० के दशक की सेक्स बॉम सिल्क स्मिता की तरह दिखना था। जिसके लिए उन्होंने अपना वजन कम किया और फिल्म के दूसरे हॉफ में उम्रदराज सिल्क दिखने के लिए उन्होंने आठ किलो से भी अधिक वजन बढ़ाया।

 

गैंगस्टर और वो लम्हें वाली कंगना ने 'तनु वेड्स मनु' में चुलबुली पंजाबी लड़की दिखने के लिए अपना वजन बढ़ाया। सोनाक्षी सिन्हा की भरी-भरी काया से सभी वाकिफ हैं। बॉलीवुड में इंट्री से पहले वह काफी मोटी हुआ करती थीं। जिन्होंने दबंग के लिए अपना ३० किलो वजन कम किया। सोनाक्षी की तरह सोनम भी बॉलीवुड में आने से पहले ९० किलो की हुआ करती थी। 

 


सांवरिया के लिए इस कपूर कन्या ने भी ३० किलो वजन कम किया। सलमान खान की खोज जरीन खान ने अपनी पहली फिल्म वीर के लिए दस किलो वजन बढ़ाया। ऐसा कहा गया कि यह फिल्म जिस दौर की थीं उस समय महिलाएं छरहरी नहीं हुआ करती थी। प्रियंका चोपड़ा ने सात खून माफ के लिए भी वजन बढ़ाया। जबकि इससे पहले वह दोस्ताना में एकदम स्लिम दिखी थीं। अभिनेताओं ने भी खुद को किरदार के हिसाब से ढालने के लिए कड़ी मेहनत की। गजनी के आमिर इसका उदाहरण है। आमिर को किरदार के हिसाब से अपनी काया को ढालने के लिए ही शायद मिस्टर परफेक्निस्ट कहते हैं। अमिताब ने फिल्म पा के लिए भी ऐसी ही मेहनत की थी। यहां उन्होंने अभिषेक और विद्या बालन के बेटे का रोल किया था। 'पा' के रोल में फिट होने के लिए मेकअप के साथ-साथ अमिताभ ने अपना वजन भी कम किया, जिससे वह बच्चे जैसा दिख सकें। 

 

विदेशी सिनेमा में भी ऐसे कई उदाहरण है। इसमें सबसे बड़ा कायांतरण का उदाहरण क्रिस्टियन बेले का है। क्रिस्टियन ने फिल्म द मैकेनिस्ट के लिए १५ किलो से भी अधिक वजन द्घटाया और इसके बाद आई बैटमैन के लिए क्रिस्टियन ने इतना ही वजन वापस हासिल कर सुपरहीरो की काया धरी। ऐसे ही अभिनेता हैं टॉम हैंक्स जिन्होंने कास्टअवे के लिए २८ किलो से अधिक वजन घटाया। रियान गोसलिंग ने 'द लवली बोन्स' के लिए ३० किलो वजन बढ़ाया। मतलब साफ है कि पर्दे पर दिखने वाला जलवा और जादू सिर्फ कैमरे का ही कमाल नहीं होता। ये अभिनेताओं और अभिनेत्रियों की मेहनत है जो उन्हें किरदार में ढालती है।

 

 
         
 
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  • अपूर्व जोशी

कुल मिलाकर मुझे राहुल गांधी की स्वीकारोक्ति कि कांग्रेस में अहंकार] देश में वंशवाद और कांग्रेस पार्टी का आमजन से दूर होना] स्वागत योग्य वक्तव्य

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