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जनपदों से 
 
डेंजर जोन या डेथ जोन

 

चमोली। चीन सीमा तक जाने वाले बदरीनाथ नेशनल हाईवे का जिम्मा सीमा सड़क संगठन (बीआरओ के पास है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग से चारधाम यात्रा के समय देश-विदेश के लोग गुजरते हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात सैनिकों को राशन आदि पहुंचाने में भी इसका इस्तेमाल होता है। इतने महत्वपूर्ण राजमार्ग की मरम्मत और चौड़ीकरण में लापरवाही बरती जा रही है। निर्माण में बजरी की जगह स्थानीय गदेरे की मिट्टी का प्रयोग किया जा रहा है। जो कभी भी खतरनाक साबित हो सकता है। इस नेशनल हाइवे पर यात्राकाल में देश के ही नहीं वरन् विदेश के भी लाखों तीर्थ यात्री सफर करते हैं। वहीं रोजाना स्थानीय क्षेत्र में स्थित सैनिक छावनी एवं सीमा पर तैनात सेना के लिए भी सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में यदि इस द्घटिया निर्माण से कोई दुर्घटना घटती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, इस पर बीआरओ मौन है। हालांकि अब अधिकारी जांच की बात कर रहे हैं। वर्तमान समय में सीमा सड़क संगठन पीपलकोटी बदरीनाथ नेशनल हाईवे के डेंजर जोन पर मार्ग सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण का कार्य कर रहा है। 


हेलंग डेंजर जोन सहित कई अन्य जोन पर पुश्ता और दीवार निर्माण में मिट्टी का इस्तेमाल हो रहा है। जबकि ये पक्के होने चाहिए। डेंजर जोन पर अभी तक पांच से अधिक दुर्द्घटनाएं हो चुकी हैं। बीआरओ आगामी यात्रा शुरू होने से पहले इस डेंजर जोन को हर हाल में ठीक करने में जुटा हुआ है। सड़क सुदृढ़ीकरण के लिए बाकायदा दो-दो मशीनें भी लगाई गई हैं। मगर दीवार निर्माण में बजरी के बजाय बीआरओ द्वारा स्थानीय गुलाबकोटी गदेरे की मिट्टी लेपी जा रही है।

 

गौरतलब है कि मई माह से लेकर नवंबर तक करीब छह माह के दौरान इस राजमार्ग से बदरीनाथ, फूलों की द्घाटी, हेमकुंड साहिब, द्घांद्घरिया, स्वर्गारोहिणी, औली गोरसों समेत अन्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को निहारने के लिए प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आवाजाही करते हैं। जिस प्रकार बीआरओ हाईवे सुदृढ़ीकरण में घटिया निर्माण कर रहा है, उससे तो यही कहा जा सकता है कि इस डेंजर जोन को सुधारने के बजाय यह इसे डेथ जोन बनाने में जुटा हुआ है। ऐसा नहीं कि बीआरओ के आला अधिकारियों को इसकी जानकारी न हो। आला अधिकारी आए दिन इस मार्ग से आवाजाही करते हैं। लेकिन किसी का ध्यान अभी तक इस द्घटिया निर्माण पर नहीं जा रहा है। हेलंग डेंजर जोन पर हो रहा निर्माण तो नमूना मात्र है। हेलंग डेंजर जोन के अलावा अन्य स्थानों पर भी बीआरओ सड़क को सुधार रहा है। मगर अधिकांश स्थानों पर बजरी की जगह मिट्टी का ही उपयोग किया जा रहा है। दो सालों में बिरही में बदरीनाथ नेशनल हाइवे का एक किलोमीटर का हिस्सा अभी तक नहीं सुधारा गया है। जान जोखिम में डालकर स्थानीय लोग बिरही में नेशनल हाइवे पर सफर कर रहे हैं। सीमा सड़क संगठन पीपलकोटी के ऑफिसर कमांडिग मेजर राहुल श्रीवास्तव कहते हैं कि मैं कुछ समय से बाहर था। हो सकता है इस दौरान हेलंग डेंजर जोन पर हो रहे निर्र्माण कार्य में कुछ लापरवाही हुई हो। हम देख कर ही मैं बता पाऊंगा। अगर ऐसा हो रहा है तो उचित कार्रवाई की जायगी।

 

 

राजनीति ने खिसकाया बेस का आधार

 

पिथौरागढ़। विश्व बैंक और केंद्र के सहयोग से प्रदेश में कई स्वास्थ्य योजनाएं चल रही हैं। प्रत्येक साल विभिन्न योजनाओं के तहत कारोड़ों- अरबों रुपये उत्तराखण्ड सरकार को मिलता है ताकि प्रत्येक व्यक्ति को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। प्रदेश सरकार ऐसा दावा भी करती है पर असलियत कुछ और ही है। सरकार पिथौरागढ़ का बेस अस्पताल एक हो रहा है। जिस कारण जनपदवासी लंबे समय से अस्पताल के इंतजार में हैं। यहां बेस अस्पताल की मंजूरी प्रदेश की पहली निर्वाचित सरकार में ही मिल गई थी। तब कांग्रेस की सरकार थी। सरकार बदलते ही इस अस्पताल का स्थान बदल जाता है। परिणाम स्वरूप इसका भविष्य अधर में लटक जाता है।


पहली निर्वाचित सरकार ने इसे अलग से स्थापित करने के बजाय जिला मुख्यालय स्थित जिला चिकित्सालय एवं महिला चिकित्सालय का एकीकरण कर बेस चिकित्सालय का नाम दे दिया। इसका स्थानीय जनता एवं भाजपा प्रतिनिधियों ने विरोध किया। ये लोग इसे अलग से स्थापित करने की मांग कर रहे थे। तब से सिर्फ बयानबाजी ही हो रही है। वर्ष २००७ में भाजपा सरकार बनी तो अलग से बेस अस्पताल को स्वीकृति मिली। तत्कालीन विधायक एवं पेयजल मंत्री प्रकाश पंत ने मोस्टमानू (चंडाक में २२ दिसम्बर २०११ को इसका भूमिपूजन भी किया। ३५.६० करोड़ रुपये अनुमनित लागत तय की गई। कार्यदायी संस्था उत्तराखण्ड राज्य अवस्थापना निगम को इसकी जिम्मेदारी दी गई। मोस्टमानू 'चंडाक' क्षेत्र में ०.९६२ हेक्टेयर पर इसे बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके लिए दो करोड़ रुपए स्वीकृत भी हुए। 


उसी दौरान इस पर करीब ६० लाख रुपये खर्च भी कर दिए गए। पिछले साल प्रदेश में सत्ता की बागडोर भाजपा से कांग्रेस के हाथ में आ गई। सरकार बदलते ही इस अस्पताल का कार्य बंद हो गया। कांग्रेस नेता ने जगह को उपयुक्त न बताते हुए प्रगति कार्य पर रोक लगवा दी। इन दिनों यह मुद्दा पिथौरागढ़ में राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है। राजनीतिक दलों के छोटे-बड़े सभी नेता इसको लेकर बयानबाजी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। सभी नेता अपने-अपने क्षेत्रों में खोले जाने की रस्साकशी कर रहे हैं। इस रस्साकशी के बीच एक ओर तो अस्पताल का भविष्य अधर में लटक गया, वहीं दूसरी ओर यदि इसका स्थान परिवर्तित होता है तो चंडाक में खर्च हुए ६० लाख रुपये भी बर्बाद हो जाएंगे। जो भाजपा मोस्टमानू (चंडाक) में ही बेस अस्पताल चाहती है और कांगे्रस दौला में अस्पताल बनाने की मांग पर अड़ी है। दौला में इसे खोलने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नया प्रस्ताव बनाकर शासन को दिया है। अब न तो मोस्टमानू (चंडाक में कार्य चल रहा है न ही दौला पर। नए प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। बेस को लेकर यह राजनीति पिछले १२ सालों से चल रही है। वर्तमान विधायक मयूख महर दौला में अस्पताल चाहते हैं तो पूर्व विधायक प्रकाश पंत मोस्टमानू में। दोनों बड़े नेता इस मामले पर सीधे तो मुखर नहीं हैं लेकिन पार्टी के छोटे बड़े नेताओं को बयानबाजी करने की जिम्मेदारी दे दी गई है। बेस अस्पताल के लिए लोग लामबंद हैं। गौरंगद्घाटी के १२० गांवों के लोगों ने संद्घर्ष समिति गठित कर अस्पताल को मोस्टमानू में बनाने की पहल शुरू कर दी है। वहीं भाजपा एवं कांगे्रस के युवा नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टी की ओर से इसकी कमान संभाली हुई है। भाजपा की ओर से जिला पंचायत उपाध्यक्ष बीरेन्द्र सिंह बोरा शुरू से ही इस मामले पर मुखर रहे हैं। वह कहते हैं, 'दूसरी जगह अस्पताल नहीं ले जाने दिया जाएगा। एक बार काम शुरू हो जाने के बाद उसे रोकना ठीक नहीं। उनका आरोप है कि कांगे्रस विधायक मयूख महर जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।' वहीं कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता खीमराज जोशी कहते हैं, 'हमारा मानना है कि अस्पताल वहां बनना चाहिए जहां अधिक से अधिक जनता इससे लाभान्वित हो। नगर के आस-पास के इलाकों में यह अस्पताल बनना चाहिए। दौला सहित कई स्थानों पर लोग जमीन देने को तैयार हैं।' दोनों पक्षों की और से इसके लिए जनमत संग्रह करने की चुनौती भी पेश की जा रही है। भाजपा प्रदेश महामंत्री सुरेश जोशी ने तो इस बेस अस्पताल के मुद्दे पर कोर्ट जाने की धमकी दे दी है। उनका आरोप था कि सरकार ने बिना कारण बताए पिथौरागढ़ में बहुप्रतीक्षित बेस अस्पताल के निर्माण पर रोक लगा दी। बेस अस्पताल को लेकर अब आम आदमी पार्टी 'आप' भी मुखर हो गई है। पार्टी के पदाधिकारियों द्वारा एक ज्ञापन राज्यपाल को भी प्रेषित किया गया है। पार्टी के जिलाध्यक्ष शमशेर सिंह महर कहते हैं, 'निर्माणधीन बेस अस्पताल के काम में तेजी आनी चाहिए ताकि समय पर यह काम पूरा हो सके।' माले ने कांगे्रस और भाजपा पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। माले नेताओं का कहना है कि पहले महिला व जिला अस्पताल को विलय कर बेस अस्पताल बनाने का निर्णय और अब चंडाक से दौला ले जाने का निर्णय दोनों ही जनता के साथ धोखेबाजी है। माले नेता कामरेड गोविंद सिंह कफटियाल कहते हैं, 'यह अस्पताल लोगों के लिए नहीं ठेकेदारों के लिए बनाया जा रहा है। ठेकेदार लॉबी अपने-अपने यहां अस्पताल बनाने के लिए नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है।' भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष किशन सिंह भंडारी कहते है, 'भाजपा चाहती है कि जल्द से जल्द अस्पताल बने। बेस के मुद्दे पर जनता को उलझाया जा रहा है, इसे उलझाना ठीक नहीं है।' कांगे्रस जिलाध्यक्ष महेन्द्र सिंह लुंठी कहते हैं, 'कौन बदल रहा है, कहां बदला गया है। यह भाजपा का कुप्रचार है। वह जानबूझकर इसमें देरी कर रही है। अस्पताल वहीं बनेगा।' सभी नेता बेस अस्पताल जल्द से जल्द बनाने का फिक्रमंद नजर आते है लेकिन यह सिर्फ बयानों में ही झलकता है। असलियत में सभी दल अपना वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। इसका खामियाजा अंतत आमजन को ही भुगतना पड़ रहा है। 


 

 

बदरीनाथ में हिमस्खलन

 

जोशीमठ (चमोली। हिमालयी क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण ९ फरवरी को बदरीनाथ में हिमस्खलन हुआ है। हिमस्खलन से देवराबाबा का आश्रम पूरी तरह तहस-नहस हो गया। यहां जप कर रहे भास्करानंद पुरी लापता बताए जा रहे हैं। बदरीनाथ मंदिर से करीब २०० मीटर दूर मातामूर्ति रोड पर स्थिति तीन मंजिला देवरा बाबा आश्रम का दो मंजिल उड़कर अलकनंदा में समा गया है। शीतकाल में यहां तपस्या कर रहे साधु-महात्माओं पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बदरीनाथ अभी देश के अन्य हिस्सों से कटा हुआ है। जिस कारण वहां किसी भी तरह की मदद नहीं दी जा सकती। बदरीनाथ में तैनात सैनिक ही कार्य कर रहे हैं।


प्रशासन को अभी तक एक हैलिकॉप्टर उपलब्ध नहीं हो सका है। जिससे शासन-प्रशासन की ओर से राहत कार्य शुरू नहीं किया जा सका है। शीतकाल के दौरान बदरीनाथ में तैनात पुलिस, आईटीबीपी सेना आदि आपस में मिलकर राहत कार्य में जुटे हैं। सुरक्षित बताया है। बदरीनाथ के कपाट शीतकाल में बंद होने पर पूरा इलाका खाली करवा दिया जाता है। शीतकाल में यहां रहने के लिए शासन से अनुमति लेनी पड़ती है। इसके लिए उपयुक्त कारण भी बताना पड़ता है। २२ साधु सहित कुल २६ लोगों को वहां रहने की अनुमति जोशीमठ एसडीएम कार्यालय की जानकारी के मुताबिक इस वर्ष मिली थी। मिली जानकारी के अनुसार एक दर्जन से अधिक साधु-संत संसाधनों की कमी के कारण अपनी तप बीच में ही छोड़कर नीचे आ गए थे। भाष्करानंद पुरी, स्वामी अमृतानन्द गिरी, चन्द्रशेखर, दिगबंर गंगा भारती, शिव प्रसाद, विजयराम चैतन्य, ब्रह्मचारी भागवत दास, शुकराम त्यागी, पी शकर नम्बूरारी, प्रकाश नन्द, धर्मराज मौनी बाबा, स्वामी रंजित साधु, विश्वनाथ रामचन्द्र, राधवेन्द्र स्वामी, मदन मोहन, चन्द्रवश्वर भारती दत्त चैतन्य, दीनदयाल दास, शीतदास, महिर्षी साधना, दीनदयाल दास एवं बदरीप्रसाद को इस वर्ष शीतकाल में यहां रहने की अनुमति प्रशासन से मिली थी। लोगों को यहां रहने की अनुमति अपने रिस्क पर दी जाती है। शीतकाल में यहां प्रत्येक साल भारी बर्फबारी होती है। इससे सड़क मार्ग कई महीनों तक बंद रहता है। मौसम एवं भारी बर्फबारी के कारण यहां से किसी भी तरह की मदद नही दी जा सकती है। सेना के जवानों स्वयं ही राहत एवं रेस्क्यू का जिम्मा संभाले हुए हैं। 

 

 
         
 
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मनोज रस्तोगी % जिस तरह से आपके अंदर राजनीतिक प्रतिभा] साहित्यिक प्रतिभा और बोलने की प्रतिभा है उससे आपके प्रशंसक सभी बने हुए हैं। भाजपा और कांग्रेस में भी आपके प्रशंसक हैं।

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