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आवरण कथा
 
कि तुम कब आओगे

 

नैनीताल


जिले में पिछले सात वर्षों में दर्ज गुमशुदगी के १३२५ मामलों में से २०३ मामले अभी भी लंबित हैं। इनमें ४२ नाबालिग बच्चों के हैं। ५६ मामले महिलाओं के हैं जो कि आज भी गायब हैं। ३० ऐसे मामले हैं जिनमें गायब लोगों के शव मिले हैं। पांच वर्ष के अंतराल में अभी भी पुलिस इन गुमशुदा लोगों और बच्चों को ढूंढ़ नहीं पाई है। हल्द्वानी कोतवाली क्षेत्र में दर्ज ६४९ मामलों में से ५३२ में ही बरामदगी हो पाई है। अभी भी लापता २० बच्चों और २३ महिलाओं की बरामदगी के लिए उनके परिजन छटपटा रहे हैं।


रामनगर कोतवाली क्षेत्र के हालात हल्द्वानी से भी बदतर हैं। यहां गायब होने के २६७ मामलों में ५७ अभी भी लंबित हैं। कोतवाली के आंकड़ों के अनुसार २४ मामले १८ वर्ष से ऊपर की आयु तक की महिलाओं की गुमशुदगी के हैं। १३ मामले नाबालिग बच्चों के हैं। जिनमें दो मामलों में बच्चों की मृत्यु लापता होने के बाद हुई है। पुलिस ने सूचना में कोई जानकारी नहीं दी है कि मृत्यु दुर्घटना के चलते हुई या अन्य कारणों से कोतवाली लालकुआं में कुल १७५ मामले दर्ज हुए। जिनमें ३७ लंबित हैं। इन लंबित मामलों में ९ शव बरामद किये गये जिनमें ३ नाबालिग बच्चों के हैं। कोतवाली में नाबालिग बच्चों के ६ मामले लंबित हैं। जिनका कोई भी सुराग नहीं लग पाया है।

 

भवाली थाने में भी कुल ३७ मामले दर्ज किये गये। ७ मामले लंबित हैं। ५ मामले महिलाओं के हैं। १ मामले में शव बरामद किया गया है। २ मामले राजस्व क्षेत्र के होने के कारण पटवारी को स्थानांतरित किये गए हैं। भवाली पुलिस ने लंबित मामलों में गायब हुए लोगों की उम्र की जानकारी नहीं दी है जिस कारण यह ज्ञात नहीं हो पाया है कि इनमें कितने नाबालिग हैं और कितने बालिग। लेकिन प्राप्त सूचना के आधार पर लंबित मामलों में कुंवारी लड़कियों के मामले अधिक हैं।

 

थाना कालाढूंगी में २००५ से लेकर अगस्त २००९ तक के मामलों के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पाए जिसके कारण थाना पुलिस ने केवल नवंबर २००९ तक के आंकड़े सूचना में दिये हैं। इन आंकड़ों से यह तो ज्ञात हो जाता है कि लगभग दो वर्ष के भीतर थाना क्षेत्र में १९ मामले दर्ज किए गए हैं जो कि अपने आप में एक गंभीर मामला है। पुलिस ने किसी भी मामले में गायब हुये व्यक्तियों की उम्र की जानकारी नहीं दी है जिससे नाबालिग और बालिगों की संख्या का पता नहीं चल पा रहा है।

 

थाना मुक्तेश्वर में केवल ३ मामले दर्ज किये गये हैं। तीनों ही मामले बालिकाओं के हैं। तीनों के राजस्व क्षेत्र में होने के कारण पटवारी को स्थानांतरित किये गये हैं। इनमें दो अभी भी लंबित ही चल रहे हैं। काठगोदाम जीआरपी थाना क्षेत्र में कुल ९ मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें ३ अभी लंबित हैं। जिनमें दो महिलाओं के हैं। थाना काठगोदाम में ४२ मामले दर्ज किये गये हैं और ४१ मामलों में बरामदगी हो चुकी है। इसी प्रकार थाना मल्लीताल में भी ३८ मामलों में से ३७ में बरामदगी होने के बाद केवल एक मामला १५ वर्ष के नाबालिग बच्चे विजय सिंह का शेष है। एक बच्चे का शव नैनीझील से मिला। थाना बेतालघाट में ३ मामले दर्ज हुए। तीनों ही मामलों में बरामदगी हो चुकी है। इसी प्रकार थाना चोरगलिया में दर्ज सभी १२ मामलों में बरामदगी हो चुकी है। साथ ही तल्लीताल नैनीताल में भी दर्ज सभी ७० मामलों में गुमशुदा लोगों की बरामदगी हो चुकी है।

 

 

हरिद्वार में भी खतरनाक स्थिति


कुंभ नगरी के नाम से प्रसिद्ध हरिद्वार जनपद में गुमशुदगी के १९४१ मामले दर्ज हुए। जिनमें ४५६ व्यक्ति अभी भी गायब हैं। इनमें ५३ मामले नाबालिग बच्चों के हैं। दुःखद यह है कि ४ नाबालिग बच्चों के शव उनके गायब होने के बाद पुलिस ने बरामद किये। जिले के थाना/कोतवाली पुलिस क्षेत्रों में खानपुर, लक्सर, लक्सर जीआरपी, मंगलौर, बुग्गावाला, बहादराबाद, रुड़की, श्यामपुर, गंगनहर, कनखल, रानीपुर, शहर कोतवाली, झबरेड़ा, भगवानपुर और ज्वालापुर कोतवाली से ही सूचना के अधिकार के तहत सूचना मिल पाई है। हरिद्वार जीआरपी और पत्थरी थाना क्षेत्र से कोई भी सूचना नहीं दी गई है। कई थानों ने तो सूचना अधूरी भेजी है और उसमें गायब हुए लोगों की आयु तथा बरामद होने वालों की भी आयु का कोई जिक्र नहीं किया गया है। कई थानों ने गायब लोगों के गुम होने की तारीख और पता तक नहीं दिया है। इन सभी थानों/कोतवाली में खानपुर, मंगलौर, कोतवाल रुड़की, कोतवाली गंगनहर, कोतवाली कनखल, कोतवाली हरिद्वार शहर और थाना झबरेड़ा हैं। कुछ थानां ने केवल नाबालिग बच्चों के गायब होने और बरामदगी के ही आंकड़े सूचना के तहत दिये हैं। सूचना के अधूरे होने के चलते केवल १५ थाना/कोतवाली क्षेत्रों के थानावार आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद गंभीर दिखाई देती है।


कोतवाली लक्सर में गुमशुदगी के १२९ मामलों में १३ अभी लंबित हैं। इनमें एक मामला नाबालिग मोनिका का है। कोतवाली ज्वालापुर में कुल १६६ मामले नाबालिग बच्चों के गायब होने के दर्ज हुये हैं। जिनमें से ४ अभी भी लंबित हैं। कोतवाली मंगलौर में १६५ मामले दर्ज हुये हैं। जिनमें १५ लंबित हैं। महिलाओं के थाना बुग्गावाला में दर्ज ५ मामलों में से केवल एक ही मामला लंबित है। थाना बहादराबाद में दर्ज ४३ मामलों में से ४० की बरामदगी हो चुकी है।

 

कोतवाली गंगनहर ने भी अधूरी सूचना दी है जिससे कारण लापता लोगों के नाम और उम्र की जानकारी नहीं मिल पाई है। कोतवाली के आंकड़ों के अनुसार गुमशुदगी के कुल २५३ मामले दर्ज किये गये हैं जिनमें १९० में बरामदगी हो चुकी है और शेष ६३ अभी लंबित हैं। १४ मामले महिलाओं के गायब होने के हैं और पूरी संभावना है कि इनमें नाबालिग बालिकाओं की बड़ी संख्या होगी। इसी प्रकार थाना लक्सर जीआरपी में भी २ मामले लंबित हैं जिनमें एक मामला १६ वर्षीय बालिका शबनम का है। कोतवाली कनखल में १५५ मामले दर्ज हैं जिनमें ४३ लंबित हैं। इनमें से ८ नाबालिग बालिकाओं और बालकों के तथा ९ महिलाओं के हैं। थाना रानीपुर में १७१ मामलों में से ३२ पुलिस की पहुंच से बाहर हैं। इनमें १२ केवल नाबालिग बालिकाओं और बालकों के हैं।

 

हरिद्वार कोतवाली में कुल ३१४ मामले दर्ज किये गये। लंबित १५५ मामलों में १७ नाबालिग बालकों बालिकाओं और महिलाओं के हैं। थाना श्यामपुर में दर्ज ५४ मामलों में से १२ मामले लंबित हैं। इनमें २ नाबालिग बालकों और बालिकाओं से जुड़े हैं। थाना झबरेड़ा में भी १०६ मामलों दर्ज किये गये जिनमें से ३६ अभी भी लंबित हैं। इनमें ३ नाबालिग बच्चों के हैं। थाना भगवानपुर में भी दर्ज ४१ मामलों में से तीन में नाबालिग बच्चों के शव बरामद किये गये। ५ लंबित मामले भी नाबालिग बच्चों के हैं।

 

 

बात अपनी अपनी

मामला बहुत गंभीर है। हमने उत्तराखण्ड पुलिस को इस पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा है। पहले भी शासन से ऐसे मामलों में पुलिस डीजीपी स्तर तक आदेश जारी हो चुका है।

विनिता कुमार प्रमुख सचिव गृह उत्तरारखण्ड 

राज्य में महिला आयोग तो है लेकिन इसकी कोई पॉवर नहीं है। हम केवल कांउसिलिंग के लिए ही हैं। जो मामले हमारे पास आते हैं हम उन पर कार्यवाही करते हैं। 

सुशीला बलूनी अध्यक्ष राज्य महिला आयोग

हम पुलिस से महीनेवार अपडेट लेते हैं। जो भी मामला हमारे संज्ञान में आता है, तुरंत उस पर कार्यवाही करते हैं। पुलिस को इन मामलों में तुरंत कार्यवाही करने के आदेश देते हैं।

आशा रानी ध्यानी सचिव राज्य महिला आयोग 

लापता लोगों के मामलों में अधिकतर व्यक्ति अपने घरों से रोजगार या अन्य कारणों से चले जाते हैं और अपने आप ही वापस भी आ जाते हैं। अपहरण या हत्या के संदिग्ध मामलों को गंभीरता से लिया जाता है। ८० प्रतिशत मामलों में लापता लोगों की वापसी हो चुकी है या उन्हें बरामद किया गया है। अगर कोई व्यक्ति १ महीने से लापता है तो उसकी सूचना को मुकदमे में तब्दील कर दिया जायेगा। मैं सभी मामलों को एक बार फिर से देखूंगा। जो भी उचित होगा, किया जायेगा। 

दीपक ज्योति घिल्डियाल पुलिस उपमहानिरीक्षक नैनीताल

इसमें पुलिस की कोई लापरवाही नहीं है। गुमशुदगी के मामलों की फाइल तब तक बंद नहीं होती जब तक कि लापता व्यक्ति मिल नहीं जाता। अधिकतर मामलों में लापता व्यक्ति अपने घर वापस आ जाता है या उसके किसी दूसरे स्थान पर सुरक्षित होने की जानकारी उसके परिजनों को मिलती भी है तो वे लोग पुलिस को नहीं बताते। अब इन मामलों को पुलिस और भी गंभीरता से ले रही है। मैं पूरे डिविजन के थानों से ऐसे मामलों की जानकारी ले रहा हूं जिनमें लापता अपने घरों में वापस आ गये हैं। 

गणेश सिंह मर्तोलिया पुलिस उप महानिरीक्षक पिथौरागढ़ परिक्षेत्र 

 

 

 
         
 
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