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न्यूज़-एक्सरे 
 
अपराध की नर्सरी

राहुल गांधी कांग्रेस को नई दिशा देने की बात करते हैं। वे पार्टी को भ्रष्ट दलाल और आपराधिक छवि के नेताओं से दूर करने की इच्छा रखते हैं। वहीं दूसरी तरफ उत्तराखण्ड में कांग्रेस की छात्र इकाई का प्रदेश अध्यक्ष कई संगीन मामलों में आरोपी व्यक्ति चुन लिया जाता है। जाहिर है राज्य कांग्रेस के बड़े नेता राहुल गांधी के निर्देशों को तरजीह देने के बजाए पुराने ढर्रे पर चल अपनी राजनीतिक गोटियों को फिट करने को ज्यादा महत्व दे रहे हैं

 

छात्र राजनीति वह पगडंडी होती है जो राष्ट्रीय राजनीति और सत्ता के राजपथ में जाकर मिलती है। कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई से निकले ऐसे कई नेता हैं जिन्होंने भारतीय राजनीति में अपना मुकाम हासिल किया। यह छात्र संगठन पार्टी की बुनियाद भी है और भविष्य भी। मगर हाल ही में जिस तरह से उत्तराखण्ड एनएसयूआई के अध्यक्ष का चुनाव किया गया वह भविष्य की राजनीति में भयावहता पैदा करता है। जब एक छात्र इकाई का प्रदेश अध्यक्ष ही आपराधिक पृष्ठभूमि का हो तो उसके कल की कल्पना की जा सकती है।

छात्र राजनीति को किसी भी पार्टी के लिए उसकी नर्सरी का दर्जा दिया जाता है। इस नर्सरी में लगे पौधे ही आगे चलकर राजनीति के क्षेत्र में विशालवृक्ष बनते हैं। कांग्रेस में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संद्घ (एनएसयूआई) को इसी दृष्टि से देखा जाता है। चाहे केंद्रीय मंत्री हरीश रावत हो या सांसद प्रदीप टम्टा, सभी ने राजनीति का ककहरा छात्र राजनीति से ही सीखा है। लेकिन अब उत्तराखण्ड कांग्रेस की इस नर्सरी में अपराध के फूल खिलने लगे हैं। गत दिनों एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष बने सुमित्र भुल्लर को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। भुल्लर पर आधा दर्जन मामले दर्ज हैं। इनमें लूटपाट, जान से मारने की कोशिश के अलावा ऐसे कई मामले हैं जो संगीन अपराधों के दायरे में आते हैं।

एनएसयूआई के उत्तराखण्ड में कुल ३२०० वोटर हैं। बीते २५ दिसंबर को हल्द्वानी में और २६ दिसंबर को देहरादून में चुनाव हुए। इनमें २७ दिसंबर को देहरादून कांग्रेस भवन में वोटों की गिनती की गई। उसके बाद चुनाव परिणाम द्घोषित किए गए। हल्द्वानी निवासी सुमित्र भुल्लर सर्वाधिक ७५४ वोट पाकर एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष बने। ६३५ वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे रुद्रपुर के पूर्व विधायक तिलकराज बेहड़ के पुत्र सौरभ बेहड़। उन्हें उपाध्यक्ष बनाया गया। 

एनएसयूआई के कई नेताओं ने इस चुनाव से पहले ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को पत्र लिखकर अवगत करा दिया था कि कुछ आपराधिक छवि के लोग प्रदेश अध्यक्ष बनने की ताक में हैं। चुनाव की गाइड लाइन के अनुसार ऐसे लोगों को प्रदेश अध्यक्ष जैसे प्रतिष्ठित पद पर चुनाव नहीं लड़ाया जा सकता। देहरादून के एनएसयूआई नेता रूपेश भट्ट ने इस बाबत न केवल पत्र लिखा बल्कि सुमित्र भुल्लर का नाम भी स्पष्ट कर दिया था। यह भी उल्लेखनीय है कि एनएसयूआई में प्रदेश संगठन का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी के खिलाफ राजनीतिक मामलों को छोड़कर अन्य आपराधिक मामले दर्ज नहीं होने चाहिए। खासकर ऐसे मामले जिनमें ३ साल से ऊपर की सजा का प्रावधान हो।

लेकिन सुमित्र इन शर्तों पर कहीं भी खरे नहीं उतरते। आधा दर्जन मामलों में संलिप्त होने और उनके न्यायालय में लंबित होने के चलते उनका भारी विरोध हुआ। सौरभ बेहड़ ने भी इसका जमकर विरोध किया। सौरभ ने सुमित्र भुल्लर की क्राइम हिस्ट्री को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के पास भेज दिया। इसके चलते प्रदेश अध्यक्ष पद की द्घोषणा पर रोक लगा दी गई। चुनाव कराने वाली फेम (फाउंडेशन फोर एडवांस मैेनेजमेंट ऑफ इलेक्शन) कमेटी के पर्यवेक्षक एके मजूमदार ने २७ दिसंबर को ही चुनाव परिणाम पर रोक लगाकर एक जांच कमेटी बिठा दी। सूत्रों के अनुसार जांच कमेटी पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने दबाव बनाकर चुनाव परिणाम द्घोषित करा दिए। करीब एक सप्ताह की जांच कमेटी की बिना कोई रिपोर्ट दिए ही सुमित्र भुल्लर को एनएसयूआई का प्रदेश अध्यक्ष द्घोषित कर दिया गया।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि एनएसयूआई के प्रदेश संगठन का चुनाव लड़ने से पूर्व एक शपथ पत्र भी चुनाव कमेटी के समक्ष दिया जाता है जिसमें चुनाव लड़ने वाला प्रत्याशी अपने बायोडाटा के साथ ही यह भी लिखित में देता है कि उस पर कोई आपराधिक मामला नहीं है। अगर कोई मामला दर्ज है या न्यायालय में चल रहा है तो वह उसका पूरा ब्यौरा देता है। चुनाव लड़ने से पूर्व सुमित्र भुल्लर ने जो अपना शपथ पत्र चुनाव कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया उसमें उसने अपने ऊपर लगे कई संगीन मामलों को उल्लेख नहीं किया। इनमें घर में घुसकर जान से मारने की नीयत से हमला करने के साथ ही शराब की दुकान में द्घुसकर शराब लूटना और ५५ हजार रुपये की लूटपाट करना प्रमुख है। जबकि उसने महज दो मामलों का उल्लेख किया जिसमें एक रोड जाम का और दूसरे पुतला जलाने का थ्ाा। इसकी पुष्टि खुद चुनाव कमेटी के पर्यवेक्षक ए के मजूमदार ने की है। उन्होंने कहा कि जो हमारे सामने मामले आए वे इतने संगीन नहीं थे।

हल्द्वानी निवासी पुष्कर सिंह कोश्यारी ने बताया कि उस पर गत वर्ष सुमित्र भुल्लर ने हथियार से जानलेवा हमला करके उसको द्घायल किया था। इस मामले में तब उसकी नाक टूट गई थी। इसके बाद उसे हल्द्वानी के कृष्णा नर्सिंग होम में एडमिट कराया गया था। इसी के साथ एमबीपीजी के पूर्व छात्र नेता जगदीश बिष्ट ने भी भुल्लर पर कई आरोप लगाए। उनके अनुसार फरवरी २०१२ को उन्होंने उनका पीछा किया और उसके साथ मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देते हुए कई फायर किए। इस बाबत उन्होंने हल्द्वानी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। एक बार सुमित्र ने कॉलेज का वार्षिकोत्सव नहीं होने दिया। इसके बाद कॉलेज में तोड़फोड़ भी की। इसकी भी रिपोर्ट हल्द्वानी थाने में दर्ज की गई।

शराब व्यावसायी विजय जायसवाल के अनुसार वर्ष २००७ में सुमित्र भुल्लर ने उसके रेलेवे रोड स्थित ठेके पर कई लड़कों के साथ धावा बोलकर लूटपाट की थी। शराब की बोतलों की कई पेटियां उठाकर ले जाने के साथ ही ५५ हजार रुपये भी लूटे गए। ये रुपये शराब की बिक्री से आए थे। जायसवाल के अनुसार बाद में उनको केस क्लोज करने की धमकी भी दी गई। लेकिन उनका मामला अभी भी चल रहा हैं। हल्द्वानी स्थित एमबीपीजी कॉलेज के छात्र विरेन्द्र वोरा के अनुसार सुमित्र वर्तमान में किसी भी कॉलेज के छात्र नहीं हैं। वर्ष २००६ में उन्हें नकल करते हुए पकड़ा गया था। तब उन्हें कॉलेज से निलंबित कर दिया गया था। तब से उनका कहीं भी कोई एडमिशन नहीं हुआ। छात्र न होकर भी उन्हें छात्र संगठन का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का कोई औचित्य नहीं है। वहीं दूसरी तरफ नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ सदानंद दाते ने 'दि संडे पोस्ट' से कहा कि सुमित्र के खिलाफ हल्द्वानी थाने में कई मामले दर्ज है। २६ सितंबर २०१२ को उन पर कॉलेज में उपद्रव करने सरकारी मामले में बाधा डालने के साथ ही पुलिस पर पथराव करने का मामला दर्ज कराया गया है।

 

बात अपनी-अपनी

मुझे इस मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है। एनएसयूआई के चुनाव का संचालन करने वाली फेम कमेटी ने जो भी निर्णय लिया होगा वह सोच-समझकर लिया होगा।

यशपाल आर्य प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस कमेटी 

यह चुनाव युवाओं का था। इसमें निष्पक्षता बरतनी चाहिए थी न कि एक प्रदेश के कैबिनेट मंत्री के दबाव में काम करना चाहिए था। जिस तरह से कैबिनेट मंत्री ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्नचिह्न बनाकर दांव पर लगाया, वह पार्टी की राजनीतिक अस्मिता को धूमिल करता है पदाधिकारी बनाने से पूर्व अपराधिक मामलों की तह में जाना जरूरी था।

तिलकराज बेहड़ पूर्व विधायक रुद्रपुर 

उत्तराखण्ड प्रदेश का अध्यक्ष बनने वाले युवक के बारे में ऐसा मामला सामने आया था। जिसमें किसी प्रत्याशी ने उसकी आपराधिक छवि के कारण उसे पदमुक्त करने की मांग की थी। हमने इस मामले की जांच कराई। जिसमें क्लीन चिट मिलने पर ही सुमित्र भुल्लर को प्रदेश अध्यक्ष द्घोषित किया गया। 

रोहित चौधरी राष्ट्रीय अध्यक्ष एनएसयूआई

इस चुनाव में फेम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह पूरी जांच पड़ताल के बाद ही किसी को पदाधिकारी बनाती है। मैंने चुनाव में ऋषिकेश के एक नेता की उम्र का मामला उठाया था। उसमें भी फेम ने निष्पक्षता बरती। मुझे नहीं लगता कि फेम ने इस चुनाव में किसी के दबाव में काम किया है।

आनंद रावत प्रदेश अध्यक्ष युवा कांग्रेस 

सुमित्र भुल्लर पर भाजपा शासनकाल में मामले दर्ज कराए गए थे। ये मामले भाजपा नेताओं ने राजनीतिक द्वेष भाव के तहत कराए थे। सभी मामलों में एक शराब ठेके पर लूटपाट वाला मामला ही गंभीर है। इस मामले को शराब व्यावसायी ग्यारह तारीख को वापस ले लेगा।

सुमित हृदयेश चेयरमैन मंडी परिषद् हल्द्वानी

मेरे पीछे क्यों पड़े हो मैंने कह दिया है कि मैं निर्दोष हूं। तुम ब्लैक मेलर हो और खबर लिखने के बहाने मुझसे ब्लैकमेलिंग कर रहे हो।          

 सुमित्र भुल्लर प्रदेश अध्यक्ष एनएसयूआई 

(सुमित्र भुल्लर ने उक्त बात तब कही जब दि संडे पोस्ट ने उनसे जानना चाहा कि वह किस कॉलेज के छात्र हैं और उनका इनरोलमेंट नंबर क्या है इससे पहले सुमित्र ने खुद को एमबीपीजी कॉलेज का छात्र बताया था।

 

सुमित्र भुल्लर पर दर्ज मामले

१. केस सं. ७२२५/२००७ हल्द्वानी थाना धारा, ४५२, ५०४, ५०६

२. केस सं. ३४८१/२००८ हल्द्वानी थाना धारा, १४७, १४९, आईपीसी

३. केस सं. ४०८/२००८ हल्द्वानी थाना धारा, ३२३, ५०४,५०६, ४२७, १४७ 

४. केस सं. १९/२००८ नैनीताल थाना धारा, ३४१, ७, क्रिमनल लॉएक्ट

५. केस सं. ४०१/२०१२ हल्द्वानी थाना धारा, ३२४, आईपीसी और ३२५

६. केस सं. ११३/२०१२ हल्द्वानी थाना धारा, ३२३, ५०४,५०६ 

 

 
         
 
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