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आवरण कथा
 
कहां तुम चले गए

 

 शेष भाग.....

सहसपुर थाना क्षेत्र में गुमशुदगी के कुल १४ मामले लंबित हैं। वर्ष २०१२ में लापता हुई चन्दौबानो और परितो का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। बालिग नीलम का भी कोई पता नहीं लगा है। यहां पुलिस ने एक लापता नाबालिग बच्चे का शव भी बरामद किया है।

 

मसूरी थाने में गुमशुदगी के कुल ५ मामले लंबित हैं जिनमें एक मामला २००९ में लापता बच्चे बादल और ३ महिलाओं के हैं। २००८ में गायब हुई मथुरा देवी, २००९ में लापता मंजू सिंह और २०१२ में लापता सुमन देवी का अभी तक मसूरी पुलिस कोई पता नहीं लगा पाई है। 

 

कालसी थाने में महिलाओं की गुमशुदगी के दो मामले लंबित हैं। इनमें २०१० में लापता सोनू थापा व २०११ में लापता प्रिया तोमर का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। चकराता थाने में भी दो मामले लंबित हैं जिनमें एक मामला बालिग लड़की दिया का है। रानी पोखरी थाने में भी एक मामला लंबित है जिसका कोई सुराग नहीं लग पाया है। जीआरपी थाना देहरादून में भी दो मामले लंबित हैं। जिनका आज तक कोई सुराग नहीं लग पाया है।

 

चमोलीः गढ़वाल मण्डल के सीमांत जनपद चमोली के सात थानों में विगत सात वर्षों में गुमशुदगी के ३२६ मामले दर्ज हुए हैं। इनमें २०१ मामले सुलझ गए जबकि शेष ८४ मामलों में अभी तक पुलिस की ओर से तलाश जारी है। कुछ मामलों में लापता व्यक्तियों के शवों की बरामदगी भी चमोली जिला पुलिस के आंकड़ों में दर्ज है और विगत सात वर्ष में लापता लोगों के १२ शवों की बरामदगी हुई है। 

 

थाना चमोली में वर्ष २००५ से लेकर अगस्त २०१२ तक गुमशुदगी के कुल ५७ मामले दर्ज किये गये हैं। जिनमें से ३७ में पुलिस को सफलता मिली है और शेष ११ अभी भी लंबित ही चल रहे हैं। पुलिस ने सूचना में गुमशुदा लोगों की उम्र की जानकारी नहीं दी है जिस कारण यह पता नहीं चल पाया है कि लापता व्यक्ति बालिग है या नाबालिग। ११ लंबित मामलों में ५ बालिकाओं और महिलाओं के लापता होने के हैं।

 

थाना गोपेश्वर में भी गुमशुदगी के ५५ मामले दर्ज हुए जिनमें १२ मामले अभी भी अनसुलझे हैं। ६ मामले बालिकाओं और महिलाओं के हैं।

 

थाना जोशीमठ में दर्ज मामलों में से ३३ में लापता लोगों को या तो पुलिस ने ढूंढ़ निकाला या वे अपने आप घर वापस आ चुके हैं। लेकिन ३१ मामले अभी भी लंबित ही चल रहे हैं। ७ मामले महिलाओं की गुमशुदगी के हैं। लापता लोगों की उम्र की जानकारी न होने से अंदाजा लगाना कठिन है कि वे बालिग थे या नाबालिग।

 

थाना कर्णप्रयाग में गुमशुदगी के सबसे अधिक ८९ मामले दर्ज किये गये हैं। लेकिन ७० मामलों में बरामदगी हो चुकी है और केवल ११ ही लंबित हैं। यहां भी २ मामले महिलाओं के लापता होने के हैं और ५ में शवों की बरामदगी की गई है। 

 

बदरीनाथ थाने में भी दर्ज ७ मामलों में से ४ में बरामदगी हो चुकी है और ३ लंबित हैं। थाना कर्णप्रयाग में महिलाओं से जुडे़ ऐसे हैं जिनका पता नहीं चल पाया है। इनमें वर्ष २०१० में लापता कुमारी पूजा और सुशीला देवी की कोई जानकारी पुलिस के पास नहीं है। 

 

थराली में दर्ज ३४ मामलों में केवल १४ की ही बरामदगी हो पाई है और १६ मामले अभी भी शेष हैं। लंबित मामलों में एक मामला महिला के लापता होने का है। २ मामलों में लापता व्यक्तियों के शवों को पुलिस ने बरामद किया है। 

 

पोखरी थाने में से दर्ज १० मामलों में केवल २ अभी लंबित हैं। १ शव बरामद किया गया है। २ मामले महिलाओं के गायब होने के हैं। थाना पोखरी में भी उमा देवी और जसमति देवी की गुमशुदगी के मामले दर्ज हैं।

 

चमोली पुलिस द्वारा सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारी से यह ज्ञात नहीं हो पाया है कि लापता मामलों में नाबालिग बालक-बालिकाओं की क्या संख्या है। न तो पुलिस ने सूचना में किसी की आयु का उल्लेख किया है और न ही बरामदगी के मामलों में पूरी जानकारी दी है कि लापता व्यक्ति अपने घर किस प्रकार वापस आया। यहां तक कि बरामद किए गए शवों के बारे में भी कोई जानकारी या अंतिम रिपोर्ट अपने आंकड़ों में दर्ज नहीं की है। जिससे यह पता नहीं चल पाया है कि अमुक व्यक्ति कब किस तारीख को लापता हुआ और शव बरामद किस तारीख को हुआ। इसके अलावा मौत के कारणों को भी आंकड़ों में कहीं दर्ज नहीं किया गया। इसके चलते चमोली जिले में विगत २००५ से लेकर अगस्त २०१२ तक के मामलों को स्पष्ट करना संभव नहीं हो पाया है।

 

रुद्रप्रयागः गढ़वाल मण्डल के सबसे छोटे जिले रुद्रप्रयाग में लापता हुए लोगों के मामले शायद सबसे कम हैं। इस जिले के दो ही थाना क्षेत्र रुद्रप्रयाग और ऊखीमठ में वर्ष २००५ से लेकर अगस्त २०१२ तक गुमशुदगी के कुल ४७ मामले दर्ज किये गये हैं। इन सभी में ३३ मामलों में लापता लोगों का पता चल चुका है या वे अपने घरों को वापस आ चुके हैं। लेकिन इनमें अभी तक १४ ऐसे मामले भी हैं जो कि लंबित ही चल रहे हैं और उनकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।

 

उत्तरकाशीः सीमांत जनपद उत्तरकाशी के पांच थानों कोतवाली उत्तरकाशी, धरासू, बड़कोट, पुरोला और मनेरी में वर्ष २००५ से लेकर अगस्त २०१२ तक गुमशुदा के कुल १५७ मामले दर्ज हुये हैं। इन मामलों में १३७ की बरामदगी हो चुकी है और १३ मामलों में कोई जानकारी उत्तरकाशी पुलिस के हाथ नहीं लग पाई है।

 

कोतवाली उत्तरकाशी में विगत सात वर्षों में कुल ६९ मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से ६५ मामलों में बरामदगी हो चुकी है और दो मामलों में गुमशुदा की जानकारी पुलिस को ज्ञात हो चुकी है। २ मामले अभी भी ऐसे हैं जिनमें गुमशुदा की कोई जानकारी पुलिस के पास नहीं है। इनमें एक मामला १७ वर्षीय संतोष कुमार और दूसरा १८ वर्षीय सोनू का है जिनका पुलिस कोई सुराग नहीं लगा पाई है।

 

धरासू थाने में २५ मामले दर्ज किये गये। इनमें २० सुलझा लिए गए हैं। ३ मामलों को अन्य थानों में स्थानांतरित किया गया है और दो मामलों में गुमशुदा की जानकारी मिल चुकी है। केवल दो ही मामले ऐसे शेष हैं जिनकी कोई भी जानकारी नहीं मिल पाई है।

 

पुरोला थाने में कुल १२ मामले दर्ज हुए जिसमें ९ में बरामदगी हो चुकी है और २ मामलों में गुमशुदा की मृत्यु होने की जानकारी मिल चुकी है। केवल एक ही मामला अभी लंबित चल रहा है। मनेरी थाने में ३७ मामले दर्ज किये गये। इनमें २९ मामलों में बरामदगी हो चुकी है। ८ मामलों में कोई सुराग नहीं लग पाया है।

 

टिहरीः जिले के चम्बा, नरेन्द्र नगर, मुनि की रेती, देवप्रयाग, कीर्तिनगर और घनशाली थाना क्षेत्रों के विभिन्न इलाकों में वर्ष २००५ से लेकर अगस्त २०१२ तक गुमशुदगी के ३९९ मामले दर्ज किये गये हैं जिनमें नाबालिग बालकों के ७७ और नाबालिग बालिकाओं के ३५ मामले दर्ज हुए। इनमें से ७० और ३२ बालिकाओं को खोजा जा सका है। ऐसे ही महिलाओं के १४९ मामले पंजीकूत हैं। इनमें अभी तक ११५ की ही बरामदगी की जा सकी है। शेष २८ महिलाओं का कोई अता-पता नहीं है। पुरुषों के १४८ दर्ज मामलों में भी पुलिस को १२१ मामलों में ही सफलता हाथ लगी है।

 

टिहरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत वर्ष २००५ से लेकर अगस्त २०१० तक गुमशुदगी के कुल ८३ मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से ६९ मामलों में बरामदगी हो चुकी है और शेष १४ अभी भी लंबित हैं। इनमें ३ मामले नाबालिग बालकों और बालिकाओं के हैं तो ८ मामले बालिग लड़कियों और महिलाओं के हैं। जिनको अभी तक खोजा नहीं जा सका है।

 

नरेन्द्र नगर थाने में कुल १४ मामले दर्ज किये गये जिसमें १२ मामलों में बरामदगी हो चुकी है और केवल २ मामले ही लंबित हैं। इनमें २००६ में लापता भवानी दत्त और १ अगस्त २०१२ में लापता विनिता का अभी तक कोई पता नहीं लग पाया है।

 

चम्बा थाने में कुल ६९ मामले दर्ज किये गये जिनमें से ६० लापता लोगों की वापसी हो चुकी है। शेष ९ मामलों में से ६ अभी भी लापता ही चल रहे हैं। जिनमें २ नाबालिग जगमोहन और अमित रमोला का अभी तक कोई सुराग चम्बा पुलिस नहीं लगा पाई है। इसी तरह एक बालिग बच्चे का शव पुलिस ने बरामद किया है। ३ महिलाओं के मामले भी अभी तक लंबित ही हैं। इनमें एक बालिका बबली का मामला भी शामिल है।

 

देवप्रयाग थाने में भी गुमशुदगी के ४४ मामलों में से २८ को सुलझा लिया गया है। साथ ही १ मामले में नदी में बहने और २ मामलों में लापता महिलाओं के नेपाल और हिमाचल में रहने की जानकारी पुलिस को मिल चुकी है। ६ मामलों में लापता लोगों के शव पुलिस ने बरामद किये हैं। शेष १३ मामलों में देवप्रयाग पुलिस कोई भी सुराग नहीं लगा पाई है।

 

कीर्तिनगर थाने में गुमशुदगी के २८ मामलों में से १९ में बरामदगी हो चुकी है। लंबित ५ मामलों में से २ बच्चों के हैं। इनमें २०१२ में लापता हुए अभय सिंह और मनीष का कोई पता नहीं चला है। साथ ही २ मामलों में शव बरामद किए गए हैं। जिनमें एक शव नाबालिग बच्चे का है। 

 

घनसाली थाना क्षेत्र में भी २० मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें १५ में बरामदगी हो चुकी है और ३ मामले लंबित हैं, जिनमें २ मामले बालिकाओं के हैं। इनमें २०११ में लापता हुई रीता और २०१२ में गायब हुई रीना का पुलिस कोई सुराग नहीं लगा पाई है। इसके अलावा दो मामलों में शव बरामद किये गये हैं।

 

मुनि की रेती थाने में विगत गुमशुदगी के सबसे अधिक १५१ मामले दर्ज किये गये हैं। जिनमें १६ अभी भी लंबित पड़े हुए हैं। सबसे अधिक ७ महिलाओं के और ३ मामले नाबालिग बच्चों के हैं। 

 

पौड़ीः जिले के ११ थाना क्षेत्रों पौड़ी, कोटद्वार, लैंसडाउन, लक्ष्मण झूला, श्रीनगर, महिला थाना श्रीनगर, सतपुली, धुमाकोट और रिखणीखाल में वर्ष २००५ से लेकर अगस्त २०१२ तक गुमशुदगी के कुल ३४४ मामले दर्ज किये गये। इनमें २३० मामले बालिग महिला, पुरुष और ११४ नाबालिग बालिकाओं, बालकों के हैं। इनमें से ३१३ मामलों में बरामदगी हो चुकी है। नाबालिग बच्चों के मामलों में १०२ गुमशुदा बच्चों की बरामदगी हो चुकी है या उनका पता लग चुका है। वे अपने अपने घरों या परिवारजनों के पास सकुशल पहुंच गये हैं। एक मामले में एक बच्ची का शव बरामद किया गया।

 

पौड़ी थाने में नाबालिग बच्चों के लापता होने के २१ मामले दर्ज किये गये जिसमें २० मामलों में बरामदगी हो चुकी है। केवल एक मामला ही शेष है जो कि वर्ष २००५ में लापता बच्ची जसमाली का है। पुलिस आज तक उसका पता लगाने में नाकाम रही है। 

 

कोटद्वार थाने में सबसे अधिक बच्चों के गायब होने के मामले दर्ज हुए हैं। यहां विगत सात वर्षों में ५५ मामले बच्चों के गायब होने के दर्ज हुए। इनमें से ५० मामलों में बरामदगी कर ली गई है और ७ अभी तक लंबित हैं। 

 

श्रीनगर थाने में नाबालिग बच्चों के गुम होने के १३ मामले दर्ज किये गये जिनमें से ११ में बरामदगी कर ली गई है। वर्ष २०१० में गायब कमलेश और २०११ में लापता हुई इरम का कोई सुराग नहीं लग पाया है। श्रीनगर थाना क्षेत्र में ही एक नाबालिग बच्ची का शव बरामद किया गया। यह मामला १६ वर्षीय सरिता भण्डारी का है जो कि २९ नवम्बर २००५ को लापता हुई और उसका शव उसी दिन पुलिस ने बरामद किया। 

 

लक्षमण झूला थाने में दर्ज ९ मामलों में से केवल दो ही मामले अभी लंबित हैं। पुलिस रिकार्ड के अनुसार २००८ में गांव टिकोली जिला सोनीपत हरियाणा निवासी राजकुमार के १४ साल के पुत्र सोनू और ग्राम भादयो जिला करनाल हरियाणा के चिम्मन की पुत्री खुशी का भी कोई सुराग नहीं लग पाया है।

 

 


 

 

बात अपनी-अपनी

 

लापता होने के मामलों को कभी उतना गम्भीरता से नहीं लिया गया। लेकिन अब मेरे द्वारा इस पर ठोस काम किया जा रहा है। पहले गुमशुदगी के मामलों का मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता था लेकिन अब जल्दी ही सर्कुलर जारी हो जायेगा। हर गुमशुदगी के मामले दर्ज किये जायेंगे। मैं इन सभी मामलों का पूरी जानकारी ले रहा हूं। इसमें हम एनजीओ की भी मदद लेंगे। नेशनल क्राइम कंट्रोल ब्यूरो को भी सभी मामलें भेजे जायेंगे।

 

सत्यव्रत बंसल पुलिस महानिदेशक 

 

गुमशुदा बच्चों की प्रतिमाह अलग से रिपोर्ट बनाई जाती है और उम्र के आधार पर विवरण लिये जाते हैं। जनपद स्तर पर अपराध गोष्टी में एसएसपी के द्वारा केस टू केस मिसिंग केस की समीक्षा प्राप्त की जा चुकी है। माइनर बच्चों में बालक और बालिकाओं की गुमशुदगी के विषय में अपराध की संख्या को देखते हुए अपहरण के केस रजिस्टर्ड किये जा रहे हैं। जिससे पुलिस इन केसों को प्राथमिकता के आधार पर लें।  

 

संजय गुंज्याल पुलिस उप महानिरीक्षक 

 

देहरादून परिक्षेत्र मैं इस वक्त गैरसैंण में हूं और इन मामलों का मेरे पास कोई स्टेटस नहीं है, तो मैं कोई कमेंट नहीं कर पाउंगा।

 

जीएन गोस्वामी पुलिस उप महानिरीक्षक पौड़ी परिक्षेत्र

 

जब से मैंने चार्ज संभाला है नाबालिग बच्चों और महिलाओं के मामले को संज्ञान में लिया है। पुराने मामलों को मैंने निकलवाया है और उनके लिए सभी थानों को स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि ऐसे मामलों में गुमशुदगी की जानकारी देने वाले का पूरा पता, टेलीफोन नंबर जरूर लिया जाये और उनसे संपर्क कर के पता किया जाये कि लापता व्यक्ति या बच्चा वापस आया है या नहीं। 

 

केवल खुराना वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून

 

उत्तराखण्ड में बच्चों के लापता होने के मामले दूसरे राज्यों के मुकाबले बहुत कम हैं। लेकिन नैनीताल, देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिलों में बच्चों के लापता होने के मामले पूरे राज्य की तुलना में सबसे अधिक हैं। बाल संरक्षण आयोग पुलिस और शासन को केवल निर्देश ही दे सकता है।

 

अजय सेतिया अध्यक्ष बाल संरक्षण आयोग

 

 

 
         
 
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