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आवरण कथा
 
परियोजना विकास या विनाश की

 

परियोजनाओं के पक्ष में दलील यही दी जाती है कि इन्हें लोगों और क्षेत्र के विकास के लिए शुरू किया जाता है। लेकिन पिथौरागढ़ की एनएचपीसी धौलीगंगा परियोजना वहां के गांवों के उजड़ने की वजह बन रही है। टनल से हो रहे लीकेज ने स्थानीय लोगों के जीवन को खतरे में डाल दिया है

 

 

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने देश के बांधों को नए जमाने के मंदिर कहकर संबोधित किया था। आज हालत यह है कि इन्हीं बांधों ने देश की नदियों के किनारे बसे लोगों को या तो उजड़ने पर मजबूर कर दिया है या फिर किसी त्रासदी के द्वार पर पहुंचा दिया है। नदियों के प्रदेश के नाम से मशहूर उत्तराखण्ड तो हर दिन बनती इन विद्युत परियोजनाओं से पटा पड़ा है। पिथौरागढ़ के ऐलागाड में विद्युत क्षेत्र की कंपनी एनएचपीसी धौलीगंगा परियोजना चला रही है। चार साल पहले हुए टनल लीकेज की वजह से इसके पास स्थित दो गांव पहले ही उजड़ चुके हैं और अभी भी जारी इस लीकेज की चपेट में अब दस गांव और आने वाले हैं। 

ऐलागाड गांव पिथौरागढ़ जिले की सीमांत तहसील धारचूला से करीब १८ किलोमीटर दूर स्थित है। धारचूला से धौली गंगा नदी के किनारे- किनारे उबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरते हुए इस गांव तक पहुंचा जा सकता है। गांव के लोगों से सिर्फ एक ही बात सुनाई पड़ती है, वह है बांध से रिस रहा पानी जो कभी भी उनके ऊपर कहर बरसा सकता है। गांव का ही एक आदमी 'दि संडे पोस्ट' टीम को आग्रह से एक ओर ले जाकर दिखाता है, 'ऊपर पहाड़ की तरफ देखिए, यह जो पानी बह रहा है वह कोई झरना नहीं है बल्कि एनएचपीसी कंपनी के टनल से लीक हो रहा पानी है। चट्टान के दरकने से यह पानी कभी भी हम पर मौत बनकर टूट सकता है।' देखने पर साफ पता चलता है कि यह रिसाव इस गांव के ठीक ऊपर हो रहा है और अगर चट्टान थोड़ी सी भी और दरकी तो कोई भी हादसा घट सकता है। लोगों का यह डर बेबुनियाद नहीं है। चार साल पहले ऐलातोक और शाकुरी के ग्रामीण इस दंश को झेल चुके हैं। यहां केवल लोगों के मकान ध्वस्त नहीं हुए बल्कि उनकी सैंकड़ों नाली खेती भी बर्बाद हो गई थी। शेर सिंह नंदन सिंह एवं रविन्द्र की सामान से भरी दुकानें भी इस घटना में ध्वस्त हो गई थी। शुक्र यह रहा कि इसमें कोई जन हानि नहीं हुई। तब टनल के लीकेज होने से क्षेत्र में काफी हंगामा हुआ था। दो गांवों के लोगों ने तो अपने घर-बार छोड़कर दूर-दराज के गांवों में पनाह ली थी। प्रशासन ने लीकेज पर काबू करने की बात कही थी लेकिन यह अभी भी पहले की ही तरह जारी है। बढ़ती लीकेज को देखते हुए ऐलागाड़, शाकुरी ऐलातोक गांव के साथ ही शाकुरी गसीला, खैला गगुर्वा, जमकुखेत जुम्मा, राथी आदि गांवों के लोगों में भी डर का माहौल व्याप्त है। 

उस वक्त भी घटना के बाद महीनों तक शासन-प्रशासन और कंपनी प्रबंधन ने लोगों की खैर-खबर तक लेना मुनासिब नहीं समझा और लोगों को धरना- प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ा। आंदोलनकारियों का नेतृत्व करने वाले ग्राम शाकुरी निवासी चन्द्र सिंह कार्की के अनुसार टनल लीकेज होने से सैंकड़ों लोग उजड़ गए थे। लेकिन महज २४ परिवारों को प्रभावित दिखाया गया। दो दर्जन लोगों को ही उनके मकान ध्वस्त होने और खेत-खलिहान नष्ट होने की बात कहकर एनएचपीसी ने मुआवजा दिया। यह मुआवजा राशि ५४ लाख थी। तब कहा गया कि यह मुआवजा लोगों के मकान ध्वस्त होने की एवज में दिया जा रहा है। पीड़ित लोगों को शासन -प्रशासन और कंपनी प्रबंधन ने यह भी आश्वासन दिया कि उन्हें उनकी जमीन के बदले जमीन दी जाएगी और उनका विस्थापन कराया जाएगा। साथ ही लीकेज टनल को बंद करा दिया जाएगा। इस आश्वासन पर धरना स्थगित कर दिया गया था। कार्की बताते हैं कि बाद में कंपनी की तरफ से कुछ वैज्ञानिकों को बुलाकर यह कहा गया कि वे टनल लीकेज का सर्वे करने आए हैं। लेकिन दो-चार दिन की औपचारिकता के बाद वैज्ञानिकों का दल वापस लौट गया और आज तक भी टनल का लीकेज बंद नहीं कराया जा सका है।

जगत वर्मा के अनुसार एनएचपीसी ने सैकड़ों लोगों को बेघर कर दिया है। जिन लोगों के मकान टूटे उनमें से कुछ को एक-डेढ़ लाख रुपए जो मुआवजे के रूप में मिले थे वह उनसे खर्च हो गए। एक पीड़ित गणेश सिंह बताते हैं कि उन्हें एनएचपीसी की तरफ से मकान टूटने और खेत- खलिहान बर्बाद होने की एवज में एक लाख ६८ हजार रुपए मिले थे। तब उन्होंने वह पैसा इस उम्मीद से बैंक में डाल दिया कि जब सरकार विस्थापन कराएगी और उनके लिए जमीन मुहैया कराएगी तो एक घर बनाएंगे। लेकिन वर्षों तक भी उन्हें न जमीन उपलब्ध कराई गई और न ही उनका विस्थापन किया गया। जो मुआवजा मिला था वह भी धीरे-धीरे जिंदगी की जद्दोजहद में खत्म हो गया। अब वे लोग बेघर हैं। गणेश के साथ ही भगवान सिह और कुशल सिंह सहित अभी भी दर्जनों लोग ऐसे हैं जो बेघर होकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं। 

नंदन सिंह के अनुसार जहां टनल लीकेज हो रहा है वहां से कभी भी पत्थर गिरने लग जाते हैं। ये पत्थर कई लोगों की जान ले चुके हैं और इनसे कई लोग गंभीर रूप से द्घायल भी हो चुके हैं। गत् वर्ष ही शाकुरी गांव के गगन सिंह कार्की की इसी जगह से चट्टान गिरने से मौत हो गई थी। ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन और कंपनी को इस बाबत आगाह किया। लोगों ने सुरक्षा दीवार लगाने की भी मांग की। लेकिन शासन- प्रशासन और कंपनी की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन ग्रामीणों को खुद ही अपनी सुरक्षा के लिए मैदान में उतरना पड़ा। शाकुरी, ऐरागाड सहित आस-पास के कई गांव वालों ने लीकेज टनल के नीचे खुद ही सुरक्षा दीवार बनाई है। उधर टनल लीकेज की वजह से ऐलागाड, शाकुरी, ऐलातोक, खौला, शाकुरी गसीला गगुर्वा और जमुकखेत के सैंकड़ों परिवार पलायन कर तराई के सितारगंज क्षेत्र में आ बसे हैं। सितारगंज जेल के पास में ये लोग टीनशेड डालकर किसी तरह जीवन-बसर कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर लोग वे हैं जो वर्ष २००८ में टनल की लीकेज का शिकार होकर अपना घर-बार गवां चुके हैं।

छात्र नेता राकेश तिवारी के अनुसार धौली गंगा पावर प्रोजेक्ट की स्थापना छह साल पहले हुई थी। १८० मेगावाट की इस परियोजना के लिए दरगुवा से शाकुरी और ऐलागाड तक करीब १० किलोमीटर लंबी टनल बनाई गई थी। इस टनल में धौलीगंगा नदी का पूरा पानी प्रवाहित किया जाता है। धौलीगंगा नदी का टनल में जाने वाला पानी एक लाख क्यूसेक से अधिक है। जिस तरह से ऐलागाड और शाकुरी गांव के पास टनल लीकेज हुए है अगर वह बंद नहीं किया गया तो कभी भी पानी का दबाव पहाड़ को तोड़कर आपदा का कारण बन सकता है। पानी का बहाव आस-पास के कई गांवों को तबाह कर सकता है। वहीं दूसरी तरफ धारचूला के कूष्णा गड़ब्याल टनल के लीकेज को क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बताते हैं। कृष्णा कहते हैं कि अगर लीकेज के कारण कोई दुर्द्घघटना होती है तो धारचूला शहर तक का नामोनिशान खत्म हो सकता है। इस परियोजना के लिए टनल बनाते समय मानकों का उल्लंघन किया गया जहां टनल बनाई गई वह बेहद ही संवेदनशील क्षेत्र है। बावजूद इसके कंपनी ने खर्चा कम करने के लिए यहां कोर मशीन की बजाय पहाड़ियों को सीधा बारुद से ब्लास्ट करके हटाया। इससे टनल के आस-पास के इलाकों में दरारें पड़ गई थी यही बाद में टनल लीकेज का कारण बनी।

 

बात अपनी-अपनी

यह परियोजना उत्तराखण्ड की है। आप वहां के अधिकारियों से बात कीजिए। मुझे इस मामले में कुछ नहीं कहना है।

जेके शर्मा डायरेक्टर प्रोजेक्ट मुख्यालय फरीदाबाद

जो लोग टनल लीकेज से प्रभावित हुए थे उन्हें चार साल पूर्व ही मुआवजा दिया जा चुका है। मामला शांत हो चुका है। मीडिया को तो गड़े मुर्दे उखाड़ने की आदत हो गई है। टनल लीकेज अभी भी हो रहा है तो उसे बंद कराने की कोशिश की जाएगी।

एसके जैन महाप्रबंधक एनएचपीसी

आज से चार साल पूर्व जब टनल लीकेज का मामला सामने आया था तब मैं यहां पर नहीं था। इस पावर प्रोजेक्ट में मैं कुछ दिनों पूर्व ही आया हूं। इसके बारे में मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है।

अनुराग भारद्वाज सीनियर मैनेजर एनएचपीसी 

 

 
         
 
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