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न्यूज़-एक्सरे 
 
जनभावनाओं का शिलान्यास

गैरसैंण में विधानसभा भवन का शिलान्यास करते मुख्यमंत्री व अन्य मंत्रीगण सियासी अटकलों सरगोशियों और असहमतियों के बावजूद मुख्यमंत्री ने गैरसैंण में विधानसभा भवन की नींव १४ जनवरी मकर संक्रांति के दिन रखी। सूर्य की स्थिति के परिवर्तन के प्रतीक इस ऐतिहासिक दिन के बाद सूबे की तस्वीर किस तरह बदलेगी यह बाद की बात है, मगर सर्दी के मौसम में इस शिलान्यास ने फिलहाल सियासी माहौल को गर्मा दिया है

 

गैरसैंण को तो जनता भूल ही गयी थी। हमने गैरसैंण में विधानसभा भवन बनाने का निर्णय लेकर जनभावनाओं का खयाल रखा।' जोश और अति उत्साह में बोला गया यह वक्तव्य प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का है। उन्होंने यह वक्तव्य मकर संक्रांति के दिन १४ जनवरी को गैरसैंण में विधानसभा भवन के शिलान्यास के दौरान दिया। उनके इस बयान के बाद गैरसैंण और पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों में बहस शुरू हो गई। साथ ही कई लोगों ने इस पर नाराजगी भी जताई है। कुछ लोगों का मानना है  कि यह गंभीरतापूर्ण वक्तव्य नहीं है। कांग्रेस सरकार जनभावनाओं का कितना खयाल रखती है, इसका अंदाजा इस बात से लग जाता है कि शिलान्यास विधानभवन स्थल से करीब १२ किमी दूर मुख्य बाजार में किया गया। यानी माननीय अभी भी दूर-दराज और दुर्गम क्षेत्रों में जाने से बच रहे हैं। यही नहीं कोई भी उस चयनित स्थल को देखने तक नहीं गया।

            दरअसल गैरसैंण के भराड़ीसैंण को विधानसभा भवन बनाने के लिए चयनित किया गया है। गैरसैंण से इसकी दूरी करीब १२ किमी है। जिसमें करीब चार किमी कच्ची सड़क है। कच्ची सड़कों पर माननीयों की गाड़ियां न जाएं इसलिए शिलान्यास का कार्यक्रम राजकीय इंटर कॉलेज गैरसैंण में आयोजित किया गया। कई लोग इस पर सवाल कर रहे हैं कि कार्यक्रम भराड़ीसैंण में ही क्यों नहीं किया गया। यदि वहां कार्यक्रम होता तो पहाड़ी सड़कों से मंत्री महोदय रू-ब-रू होते। भराड़ीसैंण में न तो शिलान्यास कार्यक्रम हुआ और न ही कोई मंत्री उस स्थल पर गया, जहां विधानसभा भवन की नींव डालनी है। कार्यक्रम के बाद विधानसभा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल, डिप्टी स्पीकर डॉ अनुसूया प्रसाद मैखुरी और अल्मोड़ा के सांसद प्रदीप टम्टा भराड़ीसैंण जरूर गए। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा पौड़ी के सांसद सतपाल महाराज, राजस्व मंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्य, कूषि मंत्री हरक सिंह रावत, चिकित्सा, स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी, नियोजन मंत्री दिनेश अग्रवाल, पर्यटन मंत्री अमृता रावत, विद्यालयी शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी और श्रम मंत्री हरीश चन्द्र दुर्गापाल  शिलान्यास कार्यक्रम में तो गए लेकिन इनमें से कोई चयनित भवन स्थल पर नहीं पहुंचा। सरकार में नंबर दो मंत्री इंदिरा हृदयेश, मंत्री सुरेन्द्र राकेश, केन्द्र में कैबिनेट मंत्री हरीश रावत आदि इस अवसर पर गैरसैंण भी नहीं जा सके। कांग्रेस इस शिलान्यास कार्यक्रम को अपनी बहुत बड़ी सफलता मान रही है। इसके बावजूद कई मंत्रियों का कार्यक्रम में नहीं पहुंचना बताता है कि पार्टी के लिए यह मुद्दा कितना महत्वपूर्ण है। वैसे शिलान्यास कांग्रेस हाईकमान सोनिया गांधी के हाथों होना था। लेकिन वह भी कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकी। कांग्रेस पार्टी गैरसैंण को कितनी गंभीरता से ले रही है, इससे भी इसका पता चलता है।

            भराड़ीसैंण कर्णप्रयाग-गैरसैंण मुख्यमार्ग से हटकर है। देवलीखाल से भराड़ीसैंण के लिए सड़क जाती है। यहां से भराड़ीसैंण करीब चार किमी है। जहां कच्ची सड़कों पर चलकर पहुंचा जा सकता है। वर्षों पूर्व देवलीखाल-भराड़ीसैंण सड़क की कटिंग हुई थी पर यह सड़क अभी तक नहीं बन पायी है। जबकि यहां प्रदेश का इकलौता विदेशी पशु प्रजनन केन्द्र स्थापित है। असल में इन कच्ची सड़कों की वजह से ही शिलान्यास कार्यक्रम भराड़ीसैंण में नहीं रखा गया।

            सीएम विजय बहुगुणा सरकारी हेलीकाप्टर से गैरसैंण के सलियाणा बैंड में बनाए गए हेलीपैड पर उतरे। उनके साथ गढ़वाल के सांसद सतपाल महाराज और सूबे की पर्यटन मंत्री अमृता रावत भी थी। गैरसैंण पहुंचने के बाद सबसे पहले मुख्यमंत्री ने रामलीला मैदान में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद मुख्यमंत्री आयोजन स्थल राजकीय इंटर कॉलेज पहुंचे। जहां इन्होंने भराड़ीसैंण में प्रस्तावित विधानसभा भवन का शिलान्यास किया। इसके अलावा अधिकारी, कर्मचारी, विधायक ट्रांजिट हॉस्टल, गौचर में खुलने वाले पशु चिकित्सा महाविद्यालय, भराड़ीसैंण में खुलने वाले उत्तराखण्ड औद्योगिकी व वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के औषधीय एवं संगधीय पादक परिसर तथा जखोली रुद्रप्रयाग में खुलने वाले पर्वतीय कृषि परिसर की आधारशिला भी रखी।

            राजकीय इंटर कॉलेज में बतौर मुख्य अतिथि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गैरसैंण में विधानभवन का निर्माण यहां के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देकर सरकार ने बेरोजगारों का मान बढ़ाया। यहीं पर इन्होंने जनता द्वारा गैरसैंण को भूल जाने का विवादास्पद बयान भी दिया। इस बयान से लोग खासे नाराज हैं। कई आंदोलनकारियों का कहना है कि गैरसैंण कोई कस्बा या स्थल नहीं है बल्कि यह अब उत्तराखण्ड की पहचान बन गई है। आंदोलनकारी शुरुआत से ही गैरसैंण को स्थाई राजधानी की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस-भाजपा गैरसैंण को भूल गए हैं। इनका यह भी कहना है कि यदि सरकार जनभावनाओं का खयाल रखती है तो गैरसैंण को स्थाई राजधानी द्घोषित करे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने की। इन्होने कहा कि गैरसैंण नैसर्गिक सुंदरता से भरपूर है। सरकार यहां के विकास के लिए ठोस कार्ययोजना बना रही है। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने मंच से ही सरकार की पोल खोली। सरकार द्वारा दिए जा रहे बेरोजगारी भत्ते का लाभ मिलने को लेकर उन्होंने जब जनता से हाथ खड़े करने को कहा तो किसी ने भी हाथ खड़ा नहीं किया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार उत्तराखण्ड का यही विकास कर रही है। उन्होंने कहा कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने को लेकर भाजपा सदन के बाहर और अंदर सरकार का समर्थन करेगी।

            गैरसैंण राज्य गठन के बाद से सिर्फ राजनीतिक मुद्दा रहा है। सियासत में बैठे लोगों ने किसी न किसी बहाने इसे हाशिये पर डाल दिया। सभी राजनीतिक दलों के नेता अपने भाषणों में गैरसैंण को रोजाना राजधानी बनाते हैं। पर बारह साल में यह राजधानी नहीं बन पाया। कई आयोग बने। उनकी रिपोर्ट आयी। अब गैरसैंण सियासी दलों के लिए मजबूरी बन गया है। शिलान्यास के बाद सत्तारूढ़ कांगे्रस ने इस मुद्दे पर बढ़त बना ली है। कांग्रेस की इस बढ़त को कम करने के लिए विपक्षी दल भाजपा गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का राग अलापने लगी है। उक्रांद के एजेंडे में गैरसैंण शुरुआत से ही सबसे ऊपर रहा है। यहां यह भी सही है कि उक्रांद पिछली दो गठबंधन सरकारों में साझेदार रही है लेकिन उस दौरान इन्हें भी कभी यह मुद्दा याद नहीं आया। कांग्रेस के शिलान्यास की द्घोषणा के बाद से ही सभी दल फिर से गैरसैंण राग अलापने लगे है। शिलान्यास के दौरान उक्रांद के नेताओं ने गैरसैंण में यज्ञ का आयोजन किया। इसके पहले उक्रांद को कभी ने खुद सुध-बुध नहीं आई।

            शिलान्यास कार्यक्रम के मंच पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राजधानी को लेकर अपना- अपना पक्ष रखा। उससे सरकार के अंदर भी एक राय न होने की बात सामने आई। गैरसैंण में स्थायी-ग्रीष्मकालीन राजधानी का मुद्दा हो या फिर विधानसभा का एक सत्र चलाने का मामला हो, विपक्ष के साथ ही सत्तापक्ष में भी विरोधाभास नजर आया। कांग्रेसी विधायक और बीस सूत्रीय कार्यक्रम के उपाध्यक्ष राजेंद्र भंडारी व सांसद प्रदीप टम्टा ने जहां गैरसैंण को स्थाई राजधानी की मांग का बिगुल मंच से ही फूंका तो कैबिनेट के वरिष्ठ सदस्य हरक सिंह रावत ने दीक्षित आयोग के अनुसार राजधानी पर निर्णय की हुंकार भरी। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी के लिए सदन में और सदन के बाहर समर्थन का भरोसा दिलाया। गैरसैंण में विधानसभा भवन का शिलान्यास तो कर दिया गया लेकिन सरकार ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि इसका स्वरूप क्या होगा।

            वर्तमान समय में गैरसैण मुद्दा उछलने का भी राजनीतिक अर्थ है। सभी राजनीतिक दल २०१४ के लोकसभा चुनाव को देखते हुए गैरसैंण को अपने-अपने ढंग से उठा और उछाल रहे हैं। कोई विधानभवन का शिलान्यास कर रहा है तो कोई ग्रीष्मकालीन राजधानी तो कोई स्थायी राजधानी। गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग राज्य गठन के आंदोलन के दौर से ही उठती रही है। भाजपा की अंतरिम सरकार ने राजधानी चयन के लिए दीक्षित आयोग का गठन किया। २००२ में आई कांग्रेस की तिवारी सरकार ने आयोग का कार्यकाल बढ़ाया। भाजपा फिर सत्ता में आई, तो दीक्षित आयोग की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी। मगर रिपोर्ट पर चर्चा कराने या निर्णय नहीं ले सकी। 

उत्तराखंड रक्षा मोर्चा ने गैरसैंण में विधानसभा भवन के निर्माण की कवायद को कांग्रेस सरकार का राजनीतिक नाटक बताया है। मोर्चा के अध्यक्ष टीपीएस रावत ने कहा कि सरकार को सबसे पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की योजना है या फिर ग्रीष्मकालीन राजधानी। साथ ही, गैरसैंण में विधानभवन या अन्य ढांचागत सुविधाओं के विकास से पहले ठोस मास्टर प्लॉन तैयार किया जाना चाहिए। इन सबसे इतर देहरादून के रायपुर में एक नया विधानभवन बनाने की सरकारी तैयारी से भी आमजन असमंजस में हैं। यही नहीं राज्य सरकार के पोर्टल में देहरादून ट्रैफिक प्लॉन से संबंधित जानकारी में इसे प्रदेश् की स्थायी राजधानी लिखा गया है। इससे भी सरकार की दोहरी नीति उजागर होती है।

साथ में संतोष सिंह

 

 
         
 
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  • दिनेश पंत

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