fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 46 07-05-2017
 
rktk [kcj  
 
सामयिक
 
महिला विरोधी मुख्यमंत्री

पूर्व में न्यायाधीश रह चुके मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा प्रदेश में फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत महसूस नहीं करते। जबकि प्रदेश में महिला उत्पीड़न के कई मामले वर्षों से लंबित हैं और लड़कियों के अपहरण का सिलसिला जारी है

 

दिल्ली में दामिनी (जनता का दिया नाम के साथ हुए गैंग रेप से पूरा देश अभी भी उबल रहा है। महिलाओं की सुरक्षा सहित उनके अधिकार की बात देश भर में हो रही है। छोटे-छोटे कस्बों में इसको लेकर आंदोलन जारी हैं। बावजूद इसके उत्तराखण्ड में महिलाएं महफूज नहीं हैं। उनके साथ छेड़छाड़ अपहरण जैसी घटनाएं थमने के बजाए बढ़ ही रही हैं। लेकिन प्रदेश के मुखिया फास्ट टै्रक कोर्ट की जरूरत महसूस नहीं करते। वह भी तब जब सुप्रीम कोर्ट ने लिखित रूप में सभी हाईकोर्टों के चीफ जस्टिस को फास्ट टै्रक कोर्ट बनाने के निर्देश दिए हैं। एक पूर्व न्यायाधीश के मुख्यमंत्री बनने पर आम लोगों को कम से कम न्याय व्यवस्था दुरुस्त होने की उम्मीद थी। लेकिन जहां मुख्यमंत्री फास्ट टै्रक की जरूरत महसूस नहीं करते वहीं राज्य के कद्दावर मंत्री इसे उनका नितांत निजी फैसला मानते हैं।

                   राज्य में महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ रहे हैं। अभी हाल में ही पौड़ी जनपद के नालीखाल निवासी मोहम्मद फिरोज की सोलह वर्षीय बेटी सपूरा बीबी का अपहरण उसके घर से कर लिया गया। पिछले एक सप्ताह में देहरादून की महिला सेल में ५०० से अधिक फोन कॉल महिला उत्पीड़न के आए हैं। पहाड़ जैसे शांत क्षेत्रों में भी महिलाओं से संबंधित अपराधों के ग्राफ में दिन-प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। पुलिस और राजस्व पुलिस के लाख प्रयासों के बाद भी महिला उत्पीड़न पर विराम नहीं लग पा रहा है। यह सब देखते हुए फास्ट ट्रैक गठित न होने की बात आश्चर्यचकित करती है। पिछले सप्ताह अपने आवास पर पत्रकारों से रू-ब-रू हुए मुख्यमंत्री ने फास्ट टै्रक कोर्ट गठन के सवाल पर कहा-'महिला सुरक्षा के लिए सरकार ठोस इंतजाम कर रही है। प्रदेश में महिला उत्पीड़न से संबंधित महज ५४० मामले लंबित हैं। मुख्य न्यायाधीश ने फास्ट टै्रक कोर्ट की जरूरत को नकारते हुए लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री बहुगुणा बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायाधीश रह चुके हैं। ऐसे में इन दिनों महिलाओं पर हो रहे अपराधों के खिलाफ आक्रोशित जनता उनकी बात को पचा नहीं पा रही है। लोग उनकी बात से हैरान है।

                   पौड़ी के नालीखाल में रहने वाले गुर्जर परिवार की एक नाबालिग सपूरा बीबी का अपहरण ३ जनवरी को उसके घर से हुआ है। घटना के वक्त नाबालिग अपने मां के साथ थी। रात करीब २ बजे छह बदमाशों ने महिला और बच्चों के साथ मारपीट की और सपूरा बीबी को उठाकर ले गए। जब यह घटना हुई तो उस समय घर का मुखिया एवं सपूरा के पिता मो ़ फिरोज घर पर नहीं थे। ३ जनवरी से लेकर अब तक अपहृत लड़की का सुराग नहीं लग पाया है। अपनी लाडली की अपहरण की घटना के बाद से ही लड़की के माता-पिता का हाल बेहाल है। मां कई बार रोते-रोते बेहोश हो चुकी है। उन्हें इस बात की भी चिंता सताये जा रही है कि कहीं उनकी लड़की किसी की हवस का शिकार न हो गई हो।

गौरतलब है कि घटना के वक्त मो ़ फिरोज किसी विवाह समारोह में गए हुए थे। उस वक्त घर में सिर्फ महिलाएं और बच्चे थे। बदमाश इसी का फायदा उठाकर लड़की का अपहरण कर ले गए। जब सपूरा के पिता को घर आकर घटना का पता चला तो उसके होश उड़ गए। रिश्तेदार एवं बिरादरी के दूसरे लोगों के साथ जब मो ़ फिरोज अपनी लड़की के अपहरण की रिपोर्ट लिखवाने कोटद्वार थाने पहुंचा तो पुलिस ने मामला दर्ज करने से मना कर दिया। पुलिस ने उन्हें मामला राजस्व पुलिस के क्षेत्र का होने का बताकर लौटा दिया। हताश और परेशान मो ़ फिरोज अगले दिन अपने घर से ७५ किलोमीटर दूर नालीखाल स्थित राजस्व पुलिस चौकी पहुंचे। जहां उन्हें नामजद रिपोर्ट दर्ज कराने में सफलता मिली। लेकिन अभी तक खबर लिखे जाने तक राजस्व पुलिस के हरकत में न आने से अपहृत नाबालिग लड़की का पता नहीं चल पाया है। वहीं अपहरणकर्ता भी धीरे-धीरे प्रशासन की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने भले ही मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। लेकिन उनकी लापरवाही पूरे महिला समाज में आक्रोश का कारण बनती जा रही है।

महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और अपहरण पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार और पुलिस महकमा कितना संजीदा है। इस बात का पता नाबालिग लड़की सपूरा के अपहरण से पता चल जाता है। यदि घटना और रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस तत्काल हरकत में आती तो शायद आज अपराधी पुलिस की गिरफ्त में होते। पुलिस प्रशासन के इस रवैये के बावजूद मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम की बात करते हैं। यह घटना सरकार के इस ठोस इंतजाम की पोल खोलती है। इसी तरह मुख्यमंत्री के करीबी मंत्री इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। राज्य के शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी हमेशा महिलाओं को सम्मान देने और उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की बात करते रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि फास्ट टै्रक कोर्ट के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री का नितांत निजी फैसला है। इस पर मैं क्या कहूं। राज्य की जनता के लिए चिंतित रहने वाले मंत्री इतने अहम विषय को मुख्यमंत्री का निजी फैसला बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।


 

महत्वपूर्ण मामले

संजना हत्याकांड  नैनीताल जनपद के लालकुआं में हुए संजना हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। १० जुलाई २०१२ को कस्बे के बिन्दुखत्ता क्षेत्र स्थित तिवारी नगर में रहने वाली आठ वर्षीय संजना की बलात्कार कर हत्या कर दी गई थी। जनपद में पुलिस के खिलाफ भारी विरोध-प्रदर्शन हुआ। पुलिस अभी तक करीब चार दर्जन से ज्यादा लोगों का डीएनए टेस्ट करा चुकी है। छह महीने के बाद दोषी पुलिस गिरफ्त से बाहर है।

रचना हत्याकांड  आठ अगस्त २०१२ को जीजीआईसी दुगड़डा कोटद्वार में १२वीं की छात्रा रचना की हत्या की गई। इस हत्याकांड के बाद गांव के लोग काफी आक्रोशित हैं। पहले यह मामला राजस्व पुलिस के पास था। विरोध होने पर इसे उत्तराखण्ड पुलिस और अक्टूबर माह में सीबीसीआईडी को सौंप दिया गया। सीबीसीआईडी के पास भी तीन माह से मामला पड़ा हुआ है। लेकिन वह भी इस हत्याकांड के सुराग का पता नहीं लगा पाई है।

मीना गोला हत्याकांड  ऊधमसिंहनगर की छात्रा मीना गोला की हत्या ४ अक्टूबर २००९ को हुई। वह काशीपुर में रहकर स्नातक कर रही थी। मौत के बाद पुलिस ने मामला तक दर्ज नहीं किया। मीना की सहपाठी रजनी और ज्योति पुलिस थाने और अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काट कर थक गई। तब दोनों ने काशीपुर के एसडीएम कार्यालय के सामने धरना दिया। फिर भी इन दोनों लड़कियों की बात किसी ने नहीं सुनी। फिर ये दोनों देहरादून के गांधी पार्क में आमरण-अनशन पर बैठीं। दस दिन बाद १७ जुलाई को २०१० में तत्कालीन राज्यपाल मार्गेट अल्वा के निष्पक्ष जांच कराने के आश्वासन पर दोनों ने अनशन खत्म किया। लेकिन अभी तक इसकी जांच शुरू नहीं हो पाई है।

प्रीति शर्मा हत्याकांड  प्रीति शर्मा हल्द्वानी के जेटकिंग इस्टीट््‌यूट की काउंसलर थी। २४ वर्षीय प्रीति की १९ नवंबर २००८ को हत्या कर दी गई। उसका शव मोतीनगर में गन्ने के खेत में मिला। जो अर्द्धनग्न हालत में था। पुलिस ने कुछ दिनों बाद ४ युवकों को गिरफ्तार किया। लेकिन स्थानीय लोग उन्हें आरोपी मानने को तैयार नहीं हैं। इन लोगों ने अपना विरोध जारी रखा। जनदबाव के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री खण्डूड़ी ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी लेकिन केन्द्र ने इसे नामंजूर कर दिया। परिजन अभी भी न्याय के प्रतीक्षा में है।


 

बात अपनी-अपनी

मुख्यमंत्री जी ने यदि ऐसा कहा है तो यह महिला हित में नहीं है। हम लोग मांग करेंगे कि प्रदेश में महिलाओं के लिए फास्ट टै्रक कोर्ट बने। सभी जनपदों में ऐसे कोर्ट की जरूरत है। हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और देहरादून में तो रोजाना महिलाओं उत्पीड़न की शिकार हो रही हैं। पहाड़ी जनपदों में भी महिलाओं से संबंधित मामले ज्यादा दर्ज हो रहे हैं। महिलाओं को न्याय मिलने में देरी नहीं होनी चाहिए।

सुशीला बलूनी अध्यक्ष उत्तराखण्ड महिला आयोग

कांग्रेस पार्टी की महिला प्रकोष्ठ प्रदेश में फास्ट टै्रक कोर्ट की मांग कर चुकी है। २८ दिसंबर को हमने प्रकोष्ठ की तरफ से मुख्यमंत्री को इसके लिए एक ज्ञापन भी सौंपा था। ऐसा नहीं है कि प्रदेश में महिला के साथ अपराध कम होते हैं। यहां की महिलाएं और भी ज्यादा असुरक्षित है। सुनसान और जंगली रास्तों में स्कूली छात्राओं का बलात्कार का उसकी हत्या कर देते हैं। हम लोग मुख्यमंत्री से मिलकर इसे बनाने को कहेंगे।

सरोजनी चनपुरा अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ उत्तराखण्ड कांग्रेस

यह सही है कि मैदानी इलाकों एवं देश के अन्य हिस्सों की तुलना में पर्वतीय जनपदों में महिलाओं से संबंधित मामले कम हैं। फिर भी यदि किसी को कम से कम समय में न्याय मिले तो अच्छा ही होगा। इसलिए भी यहां फास्ट ट्रैक कोर्ट जरूरी है। क्योंकि किसी को न्याय मिलने में देरी होती है तो वह भी अन्याय है। नैनीताल हाईकोर्ट की बेंच हरिद्वार में भी होनी चाहिए।

धीरेन्द्र प्रताप प्रवक्ता उत्तराखण्ड कांग्रेस

यदि प्रदेश में महिलाओं से संबंधित मामले कम हैं तो यह अच्छी बात है। लेकिन फास्ट ट्रैक कोर्ट में महिलाओं के अलावा अन्य गंभीर मामलों की भी सुनवाई की जा सकती है। हरिद्वार ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जनपदों में कई गंभीर मामले रोजाना होते हैं। जिन्हें इस कोर्ट में हस्तांतरित कर न्याय प्रक्रिया में तेजी लायी जा सकती है। 

अजय भट्ट नेता प्रतिपक्ष

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 63%
uk & 13%
 
 
fiNyk vad

  • दि संडे पोस्ट संवाददाता


त्यूनी ¼देहरादून½। पहाड़ पर सड़क दुर्द्घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही। दुर्द्घटना के बाद राहत

foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1610313
ckj