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vad 41 02-04-2017
 
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जनपदों से 
 
मौत के सौदागर

चमोली। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की आर्थिक मदद से पांच सौ से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने की जन-कल्याणकारी योजनाएं देश भर में चलायी जा रही हैं। इसे प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) नाम दिया गया है। पहाड़ी इलाकों और प्रदेश के लिए यह योजना बहुत ही लाभकारी रही है। लेकिन भ्रष्ट राजनेता, नौकरशाह और ठेकेदार की तिकड़ी पलीता लगाने में है। इसे देखना है तो उत्तराखण्ड के चमोली जनपद स्थित दशोली ब्लॉक के मठ-बेमरू सड़क पर चले आइए। सारा नजारा खुद दिखाई देगा। यहां विभाग और ठेकेदार जनता के धन को ठिकाने लगाने में लगे है।

इस तरह होना था सड़क का निर्माण

  • पहाड़ कटान-७३०८६१०.०० घन मीटर
  • कच्ची दीवार -२२७०.०७ घन मीटर
  • पक्की दीवार -२८०.७० घन मीटर
  • वायरक्रेट-२० नग
  • कच्ची नाली-५.८५० किमी.
  • पक्की नाली-०.५०० किमी.
  • पैराफिट-३०० नग
  • स्कबर-२४५.४० मीटर

 

                दशोली ब्लॉक में पीएमजीएसवाई के तहत तेंदुली से मठ-बेमरू तक वर्ष २०१० में सड़क निर्माण की मंजूरी दी गई। यह सड़क करीब डेढ़ करोड़ की लागत से अभी भी निर्माणाधीन है। इसकी लंबाई ६.३५ किलोमीटर है। निर्माण एजेंसी सभी नियम-कानूनों को ठेंगा दिखाकर घटिया निर्माण कर रहा है। इस निर्माणाधीन मोटर मार्ग पर जीप गाड़ी तो चल रही हैं मगर इन जीपों में सफर करना मौत को दावत देने से कम नहीं है। पहले निर्माण कंपनी ने ग्रामीणों के खेतों में खड़ी फसलों के ऊपर जेसीबी चलायी। जबकि खेतों में लहलहाते फसल को नष्ट करना गैर कानूनी है। इसके बावजूद काटी गयी जमीन का आज तक ग्रामीणों को भुगतान नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने इस सोच के साथ विरोध नहीं किया कि सड़क निर्माण से क्षेत्र  का चहुंमुखी विकास होगा और उन्हें यातायात सुविधा का लाभ मिलेगा। ठेकेदार ने सड़क निर्माण के नाम पर गांव के पैदल मार्ग भी क्षतिग्रस्त कर दिये। जिसको बनाने की जहमत आज तक ठेकेदार ने नहीं उठाई है। जिसका खामियाजा आज भी ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीण जान हथेली पर रखकर अपने खेत-खलिहानों, गोचर एवं द्घास के जंगलों में आते-जाते हैं। छोटे-छोटे बच्चे उसी टूटे पैदल मार्ग से स्कूल जाते हैं। ठेकेदार के साथ-साथ विभाग भी किसी अनहोनी के इंतजार में है।

                सड़क के किनारे पक्के पुश्तों का निर्माण करना था। जबकि ठेकेदार इसे बनाने के लिए स्थानीय मिट्टी का उपयोग किया है। इस सड़क में लगभग ३० से अधिक स्कबरों एवं एक पुलिया का निर्माण भी काटे गए सड़क की सफेद-लाल मिट्टी से की गई है। अधिकतर स्कबर में दरारें पड़ चुकी हैं, ठेकेदार ने अपनी कमियों को छिपाने के लिए दरार पड़े स्कबरों के ऊपर मिट्टी डाल कर बंद कर दिया है। ग्रामीणों ने कई बार निर्माण एजेंसी का विरोध भी किया। लेकिन विभाग एवं ठेकेदार की मिलीभगत के कारण जनता की आवाज कभी सुनी नहीं गयी। 

                पिछले दिनों जिलाधिकारी चमोली एसए मुरूगेशन ने भी निर्माण कार्य का मुआयना किया। जिलाधिकारी ने विभाग को घटिया निर्माण न करने की चेतावनी दी। ग्राम प्रधान बेमरू ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर घटिया निर्माण कार्य की जांच करने की मांग की है। पीपलकोटी से मठ तक जीप तो चल रही है लेकिन इन में सफर करना खतरे से खाली नहीं है। कभी भी जीप में सफर करने से कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

 


 

ठेकेदार को घटिया निर्माण के संबंध में कई बार कहा गया पर उन्होंने कभी भी हमारी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। जिसके कारण आज तीन साल में ही अधिकतर दीवारें ढह चुकी हैं। सफर करना खतरे से खाली नहीं है। डीएम चमोली को निर्माण कार्य की जांच के लिए पत्र दिया है। ठेकेदार डीएम चमोली के निर्देशों को भी धता बता रहा है। 

कमला देवी, ग्राम प्रधान बेमरू

 

सड़क निर्माण एजेंसी की मनमानी के कारण ठेकेदार द्वारा हमारे मकान एवं पेयजल स्रोत के ऊपर से स्कबर का निर्माण कर दिया  गया है। निर्माण कार्य से हमारे मकान को खतरा बना हुआ है। सड़क के गंदे पानी से हमारा पेय जल स्रोत दूषित हो गया है।

प्रेम सिंह चौहान स्थानीय निवासी मठ

 

ठेकेदार फिर से पुलिया निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग करता है तो विभाग ठेकेदार के विरुद्ध जांच कर उचित कार्रवाही की जायेगी।

नरेन्द कुमार अधिशासी अभियंता पीएमजीएसवाई, पोखरी चमोली

 

विभाग की लापरवाही के चलते ठेकेदार स्थानीय मिट्टी का उपयोग सड़क निर्माण में कर रहा है। जिसके चलते अधिकतर स्कबरों में दरारें पड़ चुकी हैं जो मौत को दावत दे रही हैं। 

राकेश राणा समाजिक कार्यकर्ता मठ-झड़ेता

 

 


 

नशेबाज पटवारी की नाफ़रमानी

 

नशे में धुत्त रहने वाले एक पटवारी से ग्रामीणों को किसी तरह मुक्ति मिली तो दूसरा भी वैसा ही निकला। नए पटवारी एक वृद्ध की लाश गाड़ी की छत पर लावारिस छोड़कर अपने चपरासी के साथ शराब पीने चल दिए। ठंड से मरे बुजुर्ग के पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार करवाने से कहीं अधिक जरूरत उन्हें शराब की थी

 

सरकारी कार्यालय से गायब रहना या फिर ऑफिस में काम करने के बजाए चाय की दुकान पर गप्पबाजी करना उनकी फितरत में शामिल हो गया है। पर वह इतने संवेदनहीन होंगे इसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। पौड़ी जनपद के कल्जीखाल प्रखण्ड स्थित मनियारस्यूं में तैनात राजस्व उपनिरीक्षक और उनका स्टॉफ एक वृद्ध व्यक्ति के शव का अंतिम संस्कार कराने के बजाए उसे अपनी गाड़ी के छत पर रखकर घूमते रहे। इतना ही नहीं पौड़ी बाजार में शव को गाड़ी की छत पर छोड़ दोनों शराब पीने चले गए। शहरवासियों की शिकायत पर पौड़ी के तहसीलदार ने उक्त वृद्ध का शव कब्जे में कर आगे की कार्यवाही की। राजस्व उपनिरीक्षक और उनके स्टॉफ की खोजबीन करने पर दोनों शराब के नशे में धुत्त मिले। दोनों अपने पैरों पर खड़े होने की स्थिति में भी नहीं थे। इस घटना से शहरवासी हतप्रभ हैं।

          सूत्रों की मानें तो जनपद के बांद्घाट स्थित लोक निर्माण विभाग के जर्जर भवन में पिछले तीन साल से कुटली गांव पट्टी ढांगू निवासी ७० वर्षीय थमा राम रह रहे थे। उसका पूरा परिवार दिल्ली एवं अन्य जगहों पर रहता है। गांव में अकेले और घर न होने के कारण थमा राम पीडब्ल्यूडी के जर्जर भवन में सिर छुपाए थे। पहाड़ सहित पूरे उत्तर भारत में पड़ रही कड़ाके की ठंड में पिछले सप्ताह उनकी मौत हो गई। परिवार एवं कोई रिश्तेदार न होने के कारण लावारिश शव को प्रशासन कार्यवाही कर अंतिम संस्कार करता है। पर स्थानीय प्रशासन ने मानवता को तार-तार कर दिया। वृद्ध व्यक्ति की मौत की खबर स्थानीय लोगों ने पटवारी एवं उनके चपरासी को दी। पटवारी सुरेन्द्र प्रसाद चमोली एवं चपरासी योगम्बर नेगी घटना स्थल पर बांद्घाट आये और शव का पंचनामा कर बगैर सील किए पोस्टमार्टम करवाने जिला अस्पताल पौड़ी चल दिए। शव को लेकर जब वे पौड़ी पहुंचे तो शाम हो चुकी थी। 

          पोस्टमार्टम शाम को नहीं किया जाता है। इस पर उन्होंने शव को जिला अस्पताल में बनी मार्चुरी में रखने का अनुरोध किया, लेकिन शव सीलबंद एवं कागजी कार्यवाही न होने से अस्पताल ने शव लेने से इंकार कर दिया। इस पर वे शव को टैक्सी में रखकर ही बाजार की ओर निकले और एक होटल में शराब पीने बैठ गये और शव टैक्सी की छत पर ही रहा। 

          किसी ने इस मामले की शिकायत तहसीलदार पौड़ी वेदपाल सिंह से की। इस पर तहसीलदार ने उनकी तुरंत तलाश करवाई तो दोनों नशे की हालत में मिले। इस पर शव को कब्जे में लेकर दोनों को नशे की हालत में तहसील लाया गया। जहां दोनों को संभालना भारी पड़ रहा था। दोनों का मेडिकल करा कर मामला दर्ज कराया गया और वृद्ध का शव दूसरे पटवारी को दे दिया गया। जिसने शव का अगले दिन पोस्टमार्टम करवाया। घटना की जानकारी तहसीलदार ने एसडीएम को दी। एसडीएम ज्योति खैरवाल ने इन दोनों के निलंबन की संस्तुति जिलाधिकारी से की है। फिलहाल जिलाधिकारी ९ जनवरी तक अवकाश पर हैं। उनके अवकाश से लौटने पर दोनों पर कार्यवाही की बात की जा रही है। 

          ज्ञात हो कुछ दिन पहले तैनात पटवारी की शिकायत भी स्थानीय लोगों ने की थी। पूर्व पटवारी लालचंद कभी भी चौकी पर नहीं बैठता था। जिस कारण आम लोगों को कई दिनों तक पटवारी कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता है। लालचंद भी हमेशा नशे में धुत्त रहता था। इसकी लिखित शिकायत भी बांद्घाट के ग्रामीणों ने एसडीएम से की थी। जिन्हें वहां से हटाकर तहसील से सम्बद्ध कर दिया गया और पटवारी सुरेन्द्र प्रसाद चमोली को यहां का चार्ज दे दिया गया था। पटवारी सुरेन्द्र प्रसाद पूर्ववर्ती पटवारी से दो कदम आगे निकले। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश है। वे शासन से इन पर कड़ी कार्यवाही की मांग कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यों में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी पर नाममात्र की कार्यवाही की जाती है। दोषी कर्मचारी का सिर्फ ट्रांसफर कर खानापूर्ति की जाती है।

 


 

बात अपनी-अपनी

मैंने नियुक्ति अधिकारी (जिलाधिकारी को दोनों के निलम्बन की संस्तुति भेज दी है। मेडिकल जांच में दोनों के शराब पीने की बात सामने आई है। जिलाधिकारी के अवकाश से आने पर उचित कार्यवाही होगी।

ज्योति खैरवाल संयुक्त मजिस्टे्रट पौड़ी

मृतक थमा राम पिछले तीन साल से पीडब्ल्यूडी के खंडहर भवन में रह रहे थे। हमने कई बार पत्र लिखकर इन्हें वृद्धा आश्रम में शिफ्ट करने का अनुरोध प्रशासन से किया था। फिर भी शासन ने कोई कार्यवाही नहीं की।

सुरेश कुमार ग्रामीण बांद्घाट

स्थानीय प्रशासन पूर्णतः संवेदनहीन हो गया है। पूर्व पटवारी कभी चौकी में नहीं मिलता था। जब कभी दिखता भी था तो नशे में धुत्त।

जगमोहन डांगी ग्रामीण कल्जीखाल

 

 
         
 
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