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आवरण कथा
 
नेपाली क्रशरों से कष्ट में भारत

पिथौरागढ़ के सीमांत बलुवाकोट क्षेत्र की काली नदी के पार नेपाल में जारी सड़क निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किए जा रहे क्रशरों से उठते जानलेवा धूल-गुबार को हवा अपने संग उड़ा लाती है। इससे लोगों का सांस लेना दूभर हो रहा है। वे इस बारे में क्षेत्रीय विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं। लेकिन अभी तक कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई

नेपाल में जारी निर्माण कार्यों से भारत की सीमा से लगे कुछ गांवों का जीना दूभर हो गया है। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से करीब ८५ किलोमीटर दूर गांव बलुवाकोट और उसके आस-पास के इलाके के लोग नेपाल की ओर से जारी ध्वनि, वायु और जल प्रदूषण से बेहद परेशान हैं। 

               इन गांवों के लोग अपने ईष्ट देव से अक्सर प्रार्थना करते मिल जाएंगे कि 'हे देव पुरवा हवा न चला।' दरअसल नेपाल की तरफ से चलने वाली यह हवा अपने साथ धूल और धुएं का ऐसा गुबार लाती है जिसे सहन नहीं किया जा सकता। बलुवाकोट सहित आस-पास के दर्जनों गांवों के करीब दस हजार लोग नेपाल द्वारा सीमा पर जारी सड़क निर्माण के चलते परेशान हैं। बलुवाकोट गांव और नेपाल सीमा क्षेत्र में महज कुछ ही मीटर का फासला है। भारत और नेपाल के बीच बह रही काली नदी के किनारे पर नेपाल ने स्टोन क्रशर लगाया हुआ है। यह स्टोन क्रशर नेपाल में बन रहे नेशनल हाइवे के लिए पत्थर पीसने का काम करता है। काली नदी के दूसरे छोर पर स्थापित यह स्टोन क्रशर न केवल नदी के पानी को प्रदूषित कर रहा है बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा बन गया है। लोगों में सबसे ज्यादा इस बात को लेकर आक्रोश है कि इस मामले पर उत्तराखंड सरकार चुप्पी साधे हुए है। प्रभावित गांव के लोगों ने जिलाधिकारी से लेकर विधायक और मंत्रियों तक को इस परेशानी से अवगत करा दिया है। लेकिन कोई भी इस मामले पर अभी तक गंभीर नहीं दिख रहा। किसी भी अधिकारी ने अभी तक मौके का मुआयना करना भी मुनासिब नहीं समझा है। 

               गौरतलब है कि पड़ोसी देश नेपाल में काली नदी के किनारे राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य चल रहा है। करीब १६८ किलोमीटर लंबा यह राजमार्ग दाचुर्ला से लेकर बेतली तक बनना है। इसके लिए नेपाल दाचुर्ला जिला अन्तर्गत शकार गांव को मार्ग निर्माण सामग्री का केंद्र बनाया गया है। यह केंद्र काली नदी के किनारे बनाया गया है। जहां स्टोन क्रशर स्थापित किया गया है वह स्थान बलुवाकोट गांव के बिल्कुल सामने स्थित है। शकार गांव के निवासी भुवन शाही के अनुसार नेपाल में स्टोन क्रशर स्थापित करने की स्वीकूति देने के लिए न किसी मंत्रालय और न ही किसी विभाग की जरूरत पड़ती है। अगर किसी को स्टोन क्रशर लगाना है तो वह पर्यावरण विभाग से एनओसी नहीं लेता है बल्कि उसे सीधा ग्राम पंचायत में जाना पड़ता है। यहां के ग्राम प्रधान को स्टोन क्रशर स्थापित करने वाला व्यक्ति एक पत्र लिखता है। इसकी स्वीकूति सीधे ग्राम प्रधान नहीं देता बल्कि इसके लिए पहले ग्रामसभा के सभी सदस्यों की एक मीटिंग बुलाई जाती है। मीटिंग में कम से कम एक तिहाई सदस्यों की इसके लिए स्वीकूति होनी जरूरी है। इसके बाद ही स्टोन क्रशर लगाने की स्वीकूति दी जाती है। इस स्टोन क्रशर को भी इसी तरह स्वीकूति दी गई है। 

               भारत में इसके विपरीत स्टोन क्रशर की स्वीकूति के लिए एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना होता है। जिस तरह नेपाल में काली नदी के किनारे पर स्टोन क्रशर लगा हुआ है उत्तराखण्ड में तो ऐसा हो ही नहीं सकता। यहां नदी छोर से क्रशर कम से कम ५०० मीटर की दूरी पर ही लग सकता है। यही नहीं बल्कि अगर गूल भी बह रही है तो उससे कम से कम २५० मीटर की दूरी पर ही स्टोन क्रशर लगाया जा सकता है। आबादी क्षेत्र से इसकी ५०० मीटर की दूरी होना अनिवार्य है। अगर स्टोन क्रशर उस स्थान पर लगाना प्रस्तावित होता है जहां लोग निवास करते हैं तो इसे पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति नहीं मिल सकती है। 

               पिथौरागढ़ जिले के बलुवाकोट गांव सहित नकतड, शेखरी, रसतोली, मुल्लाकुचिया, रोकोट धार, छारचम आदि ऐसे गांव हैं जो नेपाल के स्टोन क्रशर से पीड़ित हैं। बलुवाकोट के ग्राम प्रधान हरिराम के अनुसार उन्होंने स्टोन क्रशर से फैल रहे ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण की बाबत पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी सहित क्षेत्रीय विधायक और प्रदेश के पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र लिखकर अवगत कराया है। इस बाबत कांग्रेस के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और कई कैबिनेट मंत्रियों को पत्र लिखकर लोगों को हो रही परेशानी के बारे में बता दिया गया है। लेकिन किसी ने भी सुनवाई नहीं की। बसपा नेता और छारचम निवासी कालू राम भारती के अनुसार इस मुद्दे को लेकर वे नेपाल तक गए हैं। नेपाल के दाचुर्ला में जिलाधिकारी को इस बाबत एक शिकायती पत्र भी सौंपा गया है। उन्होंने आश्वस्त तो किया था कि प्रदूष्ाण रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएंगे। लेकिन इस बात को कहे कई माह बीत गए और आज भी स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है। 

 


 

नैनिहालों का जीवन खतरे में

नेपाल स्थित स्टोन क्रशर से बलुवाकोट गांव के दो विद्यालयों में पढ़ रहे सैकड़ों नौनिहालों का जीवन खतरे में है। इनमें से एक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का प्राथमिक विद्यालय जबकि दूसरा सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय है। दोनों विद्यालयों में २०० से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्राथमिक विद्यालय में ५२ बच्चे है जबकि सरस्वती शिशु मंदिर में १५० बच्चे पढ़ते हैं। यह दोनों ही विद्यालय स्टोन क्रशर के सामने हैं। सरस्वती शिशु मंदिर तो काली नदी के किनारे पर ही है। यहां से महज १५ से २० मीटर की दूरी पर ही नदी के दूसरे किनारे पर स्टोन क्रशर से फैलाए जाने वाले प्रदूषण से नौनिहालों का स्कूल में पढ़ना मुहाल हो रहा है। सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य पुरुषोत्तम जोशी के अनुसार कभी-कभी तो स्टोन क्रशर से इतनी धूल आने लगती है कि हमें बच्चों के स्वास्थ्य की चिंता हो जाती है। इसके चलते हमें कई बार विद्यालय की असमय ही छुट्टी करनी पड़ती है। पुरुषोत्तम जोशी क्रशर की मनमानी से परेशान है और कई बार क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को इस बाबत अवगत करा चुके हैं।

               वहीं दूसरी तरफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य केशव राम भी अपने विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। वे कहते हैं कि हमने इस बाबत शिक्षा विभाग को कई बार अवगत करा दिया है। हमने विभाग को पत्र लिखकर मांग की है कि बच्चों के स्वास्थ्य के मद्देनजर विद्यालय का स्थानांतरण कर दिया जाय। जिससे वे स्टोन क्रशर के दुष्प्रभाव से बच सके। लेकिन शिक्षा विभाग ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया है। बच्चों पर क्रशर के प्रदूषण से न केवल अध्यापक बल्कि अभिभावक भी परेशान हैं। 

गोविंदी देवी के अनुसार उन्होंने अपनी नाती को पहले इस स्कूल में दाखिला दिलाया था। लेकिन वहां जाने पर देखा तो बच्चे स्टोन क्रशर की धरधराती आवाज से परेशान थे। यहां तक कि क्रशर की आवाज इतनी तेज हो जाती है कि बच्चों का कभी-कभी अध्यापकों की आवाज तक नहीं सुनाई देती है। इसके चलते बच्चों को दूसरे स्कूल में स्थानांतरित करना पड़ा।

 


 

बात अपनी-अपनी

इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। इस बाबत हम धारचूला एसडीएम से बात करेंगे।

एमएस बिष्ट जिलाधिकारी पिथौरागढ़   

इस बारे में हम पहले लोकल लोगों से बात करेंगे। अगर उन्हें नेपाल के स्टोन क्रशर से कोई परेशानी हो रही है, तो नेपाल सरकार से बात की जायेगी।

डॉ. राद्घव लंगर मुख्य विकास अधिकारी

मुझसे बलुवाकोट के कई लोगों ने इस बाबत शिकायत की है। जिससे मैंने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से अवगत करा दिया है। क्योंकि यह दूसरे देश का मामला है। इस बारे में क्या किया जा सकता है। इसका अध्ययन करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

हरीश धामी विधायक धारचूला

यह अंतरराष्ट्रीय मसला है। इस मामले में पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी और नेपाल के दाचूर्ला जिले के अधिकारियों को एक साथ बैठकर समाधान निकालना चाहिए। मेरा गांव भी इस स्टोन क्रशर के प्रदूषण से प्रभावित हो रहा है।

काशी सिंह ऐरी शीर्ष नेता उक्रांद (पी

 

 
         
 
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