fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 14 23-09-2017
 
rktk [kcj  
 
चिंतन शिविर
 
चुनाव से ज्यादा लालबत्ती की चिंता

देहरादून। उत्तराखण्ड में बहुगुणा सरकार अपने नौ महीने पूरे कर चुकी है, लेकिन अभी भी वह लालबत्ती की राजनीति के फेर से बाहर नहीं आ पा रही है। सरकार बने एक साल होने को आया लेकिन अभी भी विजय बहुगुणा सिर्फ विधायकों को मनाने और उन्हें लालबत्ती बाटने में ही अपना ज्यादा समय बिता रहे हैं। 

            हालत यह है कि एक ओर जहां समर्थन की बैसाखी पर टिकी बहुगुणा सरकार अपने विधायकों को संतुष्ट करने के लिए उन्हें लालबत्ती का लॉलीपाप थमा रही है तो वहीं संगठन से जुड़े पार्टी कार्यकर्ता भी अब लालबत्ती की चाहत में हंगामे पर उतारू हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ७० विधायकों वाली उत्तराखण्ड विधानसभा में लालबत्ती धारक विधायकों की संख्या ३८ तक जा पहुंची है। लालबत्ती पर चल रही इस तनातनी का असर १३ दिसंबर को देहरादून में कांग्रेस के चिंतन शिविर में भी देखने को मिला। पार्टी हाईकमान के निर्देश पर २०१४ लोकसभा चुनाव की रणनीति और संगठन विषय पर आयोजित किए गए इस चिंतन शिविर में ३० नवंबर को संपन्न हुई आधी-अधूरी पीसीसी बैठक में हुए हंगामे का साफ असर दिखाई दिया। गौरतलब है कि १८ माह बाद ३० नवंबर को संपन्न हुई पीसीसी बैठक में दायित्व के मुद्दे पर हुए हंगामे के चलते प्रदेश प्रभारी चौधरी वीरेन्द्र सिंह तो बैठक छोड़कर ही चले गए थे। 

            १३ दिसंबर को आयोजित चिंतन शिविर (लालबत्ती पर मंथन में पीसीसी बैठक में रह गई कार्यवाही ही आगे बढ़ती दिखाई पड़ी। जैसा कि पहले से ही कहा जा रहा था चिंतन शिविर का आगाज हंगामे के साथ हुआ। चिंतन शिविर में बहुगुणा सरकार पार्टी कर्मचारियों के निशाने पर रही। शिविर में पार्टी कार्यकर्ताओं ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार का गठन हुए नौ माह बीत चुके हैं। लेकिन कार्यकर्ता आज भी उपेक्षित हैं। साथ ही कार्यकर्ताओं ने चौधरी वीरेन्द्र सिंह के सामने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि राज्य में सरकार होने के बावजूद भी जनपदों में नियुक्ति अधिकारी कार्यकर्ताओं की नहीं सुन रहे हैं। जनपदों के प्रभारी मंत्री भी जिलों में आकर अधिकारियों के साथ बैठक कर वापस निकल जाते हैं। कार्यकर्ताओं की समस्याओं से प्रभारी मंत्री का कोई लेना-देना नहीं है। इस चिंतन शिविर में २०१४ की लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चिंतन तो कम हुुआ बल्कि सरकार को ही अपने कार्यकर्ताओं का विरोध अधिक झेलना पड़ा। इस प्रकार कांग्रेस का यह चिंतन शिविर हंगामों का शिविर बनकर रह गया। शिविर में संगठन से जुड़े पुराने कांग्रेसियों ने चाटुकारों और पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त कुछ नेताओं को तरजीह दिए जाने को लेकर भी काफी हंगामा किया। शिविर में राज्य कांग्रेस में व्याप्त गुटबाजी एकदम साफ दिखाई पड़ी। कांग्रेस के विभिन्न धड़ों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन कार्यकर्ताओं के आकाओं ने ही कांग्रेसियों को गुटबाजी में बांध दिया है। गौरतलब है कि इसी के चलते यशपाल आर्य और बहुगुणा से जुड़े पार्टी कार्यकर्ताओं और विरोधियों को तो इस शिविर में विधिवत निमंत्रण देकर बुलाया गया। लेकिन हरीश रावत खेमे से जुड़े पार्टी नेताओं और विधायकों को इस चिंतन शिविर की सूचना देना भी पार्टी ने जरूरी नहीं समझा।

            २०१४ लोकसभा चुनाव की तैयारियों के नाम पर विधानसभा सत्र के दौरान प्रदेश प्रभारी चौधरी वीरेन्द्र सिंह की जिद पर यह चिंतन शिविर आयोजित किया गया था। अन्तर्कलह से जूझ रही कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर इसका कोई असर होता नहीं दिखाई पड़ा। हंगामा होते देख शिविर स्थल पर मीडिया तक को नहीं जाने दिया गया। अब यह तो कांग्रेसी नेता ही बता सकते हैं कि बंद कमरों में बैठकर कैसा चिंतन और कैसा शिविर शिविर में उत्तर प्रदेश से शिरकत करने पहुंचे सांसद जगदंबिका पाल भी इस हंगामे से खासे नाराज नजर आए। जगदंबिका ने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट शब्दों में इस व्यवहार के लिए चेताया भी। लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी यह शिविर लोकसभा की तैयारियों की जगह लालबत्ती का कुरुक्षेत्र बनकर रह गया है। हालांकि शिविर के दौरान हेमेश खर्कवाल, मनोज तिवारी, बसपा विधायक हरिदास, राजेन्द्र भण्डारी, नारायण राम आर्य को लालबत्ती देने पर आम सहमति बनती भी नजर आई। लेकिन लालबत्ती धारक बनने के लिए पिछले नौ माह से परेशान नरेन्द्र नगर से विधायक सुबोध उनियाल और विकास नगर के विधायक नवप्रभात के हाथ इस बार फिर मायूसी ही लगी। लिस्ट में नाम के आगे लालबत्ती का लाल निशान होने के बावजूद भी ऐन वक्त पर दोनों विधायकों का नाम सूची से हटा दिया गया और हरीश खेमे को संतुष्ट करने के उद्देश्य से मनोज तिवारी, हेमेश खर्कवाल को संसदीय सचिव का पद और कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर लाल बत्ती का सुख दे दिया गया। 

            इस प्रकार कांग्रेस का यह चिंतन शिविर पार्टी नेताओं की आपसी खींचतान के चलते हंगामा शिविर बनकर रह गया। साफ है कि अगर अब भी लोकसभा चुनाव की तैयारियों की जगह विधायक और कार्यकर्ता लालबत्ती के चक्कर में व्यस्त रहेंगे तो संगठन में नीचे तक खराब संदेश जाएगा। देखने से तो यही लगता है कि कांग्रेस ने अभी तक टिहरी उपचुनाव से कोई सबक नहीं लिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष यशपाल आर्य का कहना है कि चिंतन शिविर में पार्टी कार्यकर्ताओं को ब्लॉक स्तर से लेकर जनपद तक सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर यह चिंतन शिविर काफी फायदेमंद होगा।

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 68%
uk & 14%
 
 
fiNyk vad

  • जीवन सिंह टनवाल

भारत और श्रीलंका के बीच खेली गई द्विपक्षीय सीरीज में भारतीय कप्तान विराट कोहली के जबरदस्त फार्म के चलते इस दौरे पर श्रीलंका का सूपड़ा

foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1825152
ckj