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खास खबर 
 
विकास का मतलब मंदिर

 

उत्तराखण्ड में पर्यटन स्थल बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। लेकिन राज्य के नेता पर्यटन विकास का पैसा वोट बैंक बनाने में इस्तेमाल करते रहे हैं। भाजपा सरकार में पर्यटन मंत्री रहते मदन कौशिक ने अपने क्षेत्र की अवैध कॉलोनियों में निर्मित उन मंदिरों पर करोड़ों रुपए खर्च करवा डाले जिनका पर्यटन की दृष्टि से कोई महत्व नहीं है

 

  हरिद्वार के विधायक मदन कौशिक और विवादों का चोली दामन का साथ रहा है। पिछले दिनों वे विधायक निधि के दुरुपयोग को लेकर चर्चा में रहे। विधायक निधि का पैसा विकास कार्यों के बजाए धार्मिक स्थलों में पुस्तकालय निर्माण पर खर्च करने के आरोपों का सामना वह लोकायुक्त में भी कर चुके हैं। इन दिनों वह विकास का पैसा अवैध कॉलोनियों में निर्मित धार्मिक स्थलों पर खर्च करने के आरोपों से घिरे हुए हैं।

  गौरतलब है कि मदन कौशिक जब भुवन चन्द्र खण्डूड़ी सरकार में पर्यटन मंत्री थे तब राज्य में पर्यटक स्थलों की दशा सुधारने तथा पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने की मंशा से उत्तराखण्ड के समस्त जनपदों के लिए नौ करोड़ सैंतालीस लाख बारह हजार रुपए का बजट वित्तीय वर्ष २०११-१२ में स्वीकूत किया गया। इसके लिए तत्कालीन प्रमुख सचिव (पर्यटन राकेश शर्मा के हस्ताक्षर से जारी इस बजट की स्वीकूति आदेश संख्या-९५९/अप(१)/ २०११-०२(०८)/२०११ दिनांक २९ अप्रैल २०११ में स्पष्ट लिखा गया कि यह धनराशि वित्तीय वर्ष २०११-१२ में जिला योजना के अन्तर्गत पर्यटक स्थलों के सौंदर्यीकरण, विकास तथा सुविधाओं के मद में जारी की जा रही है। इस स्वीकूति आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा गया कि यह नौ करोड़ सैंतालीस लाख की राशि जनपदों में स्थित पर्यटक स्थलों के सौंदर्यीकरण तथा विकास पर ही खर्च की जाएगी। लेकिन मंत्री की मर्जी के आगे सब योजनाएं फेल। विडंबना ही है कि एक तरफ उत्तराखण्ड विधानसभा में हरिद्वार के सरकारी चिकित्सालयों में सुविधाओं का टोटा होने पर हंगामा करते हैं और दूसरी तरफ पर्यटन मंत्री रहते पर्यटन के क्षेत्र में सुविधाओं तथा विकास के नाम पर आया पैसा मनमर्जी से खर्च करते हैं। क्षेत्रीय समस्याओं से उनका कोई लेना-देना नहीं है। खास बात यह कि पर्यटन विकास के नाम पर हरिद्वार को आवंटित डेढ़ करोड़ की राशि, विधायक निधि का दुरुपयोग में जांच का सामना कर रही। कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण इकाई को ही सौंपी गई। जहां से आरईएस ने उनके चहेते ठेकेदारों को बिना टेंडर आमंत्रित किए मनमर्जी से कार्य आवंटित कर दिए।

  हरिद्वार के पर्यटक स्थलों की सुविधाओं, सौंदर्यीकरण एवं विकास के लिए आवंटित धनराशि के खर्च की बात करें तो लोकसभा चुनाव लड़ने का सपना देख रहे मदन कौशिक ने उन जगहों पर यह पैसा खर्च कर डाला जो छोटे-मोटे कस्बे हैं और जिनका जिले में पर्यटन की दृष्टि से कहीं नाम नहीं है। उन्होंने बहादराबाद, झबरेड़ा, कुंजा बहादरपुर जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित मंदिरों का सौंदर्यीकरण करा डाला। और तो और कार्यदायी संस्था की ओर से इन मंदिरों के निर्माण तथा सौंदर्यीकरण के लिए कोई निविदा भी नहीं प्रकाशित कराई गई। भेल स्थित रविदास मंदिर के लिए २० लाख रुपये, झबरेड़ा में ऊंचे कुएं के पास स्थित शिव मंदिर के लिए १३.३१ लाख, ग्राम कुजां बहादरपुर में शिव मंदिर के लिए ६.४१ लाख, श्रीनाथ नगर ज्वालापुर स्थित मंदिर के लिए ५.३३ लाख, सड़क के बीचों-बीच संकरे क्षेत्र में स्थित शरीफ नगर मौ. तेलियान में काली मंदिर के के लिए ०.६३ लाख वाटर वकर्स में सांई मंदिर स्थित लिए ३.८१ लाख लोहा मंडी इंडस्ट्रीयल एरिया में शक्ति पीठ मंदिर के लिए २.३८ लाख रुपए सौंदर्यीकरण के नाम पर दिए गए। इसके अलावा पर्यटन विकास के नाम पर आवंटित धन से धर्म बंगाली बस्ती ब्रह्मपुरी हरिद्वार में बारात द्घर निर्माण के पर ३.२४ खर्च किए गए। इसी तरह ग्राम ढाना मजाहिदपुर में स्मृति स्थल, ग्राम भगवानपुर में खेड़ी पहाड़ी मंदिर, भलकपुर खंजरपुर में रविदास मंदिर ज्वालापुर के शारदा नगर मंदिर, राजीव नगर कॉलोनी में मंदिर, निर्मला छावनी हरिद्वार में शिव मंदिर और बसंत विहार कॉलोनी ज्वालापुर रेलवे स्टेशन के पास शिव मंदिर के सौंदर्यीकरण के नाम पर पर्यटन विकास के लिए आए लाखों रुपये खर्च कर दिए गए। जबकि इन धार्मिक स्थलों में ऐसा कोई भी स्थान नहीं है जहां कोई वार्षिक मेला संपन्न होता हो अथवा यहां पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता हो। इसके बावजूद पर्यटन क्षेत्रों के विकास के लिए आई इस धनराशि को ऐसे स्थानों पर खर्च किया गया। 

  हरिद्वार ही नहीं बल्कि पर्यटन विकास के नाम पर आवंटित धन की रुड़की में भी बर्बादी हुई। यहां ब्रह्मपुरी (शंकरपुरी) स्थित रविदास मंदिर, मंगलौर के भगवानपुर-चंदनपुर स्थित नौगजा पीर, लण्ढौरा के गाधारोणा स्थित रविदास मंदिर, लक्सर के महाराजपुर खुर्द स्थित संत-रामजी महाराज के समाधि स्थल, इकबालपुर के झबरेड़ा में शिव मंदिर और लालढांग के नेहन्दपुर सुठारी में हसन सईद की मजार के सौंदर्यीकरण के नाम पर २००८ से २०१० के मध्य ही करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इसके अतिरिक्त ज्वालापुर के मौहल्ला कड़च्छ में छोटा रविदास मंदिर नगर पालिका हरिद्वार स्थित मंदिर, रामलीला भवन ज्वालापुर के पास सामुदायिक भवन, काशीपुरा बाल्मीकि बस्ती में सामुदायिक भवन के सौंदर्यीकरण और रामलीला मैदान मंदिर बाल्मीकि बस्ती में सामुदायिक भवन के निर्माण आदि कार्यों पर पिछले चार वर्षों में पर्यटन विकास के नाम पर आए करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इसमें सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि पर्यटन विकास के नाम पर आया यह पैसा प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों-हर की पौड़ी, भीमगोड़ा, मंसा देवी, चंडी देवी जैसे धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण अथवा सुविधाएं बढ़ाने के लिए खर्च नहीं किया गया। हरिद्वार के कलियर में स्थित प्रसद्धि बाबा साबिर साहब की दरगाह पर वर्ष भर करोड़ों यात्रियों का आना-जाना लगा रहता है। यहां की खबर भी नहीं ली गई। साफ है कि कौशिक ने पर्यटन मंत्री रहते जाने-माने पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के बजाय पूरा ध्यान अपने वोट बैंक को मजबूत करने में लगाया।

  कायदे से जिला योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति उपयोजनान्तर्गत आवंटित धन को इन क्षेत्रों में स्थित पर्यटक स्थलों के सौंदर्यीकरण तथा विकास पर खर्च किया जाना था लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। अनुसूचित जाति क्षेत्रों में स्थित पर्यटन स्थलों के विकास तथा सौंदर्यीकरण के नाम पर आया पैसा नियम विरुद्ध मनमर्जी से खर्च किया गया। दि संडे पोस्ट के पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार अल्मोड़ा जनपद के हवालबाग विकास खण्ड के ग्राम पठारी देवी मंदिर में एक लाख, ग्राम पंचायत बसर के पनियाली तोक स्थित कलविष्ट मंदिर एक लाख ग्राम चैकतल्ला खोला बड़गलभट्ट में बामू देवता मंदिर में एक लाख, ग्राम पंचायत बामनीगाड़ में ऐड़ी मंदिर में एक लाख, ग्राम भरेला में हरज्यू मंदिर सौंदर्यीकरण पर तीन लाख रुपए खर्च किए गए। इसी तरह विकास खंड स्याल्दे में कोठा मंदिर में तीन लाख खर्च किए गए। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मात्र मंदिरों का सौंदर्यीकरण करने से ही क्षेत्र का पर्यटन विकास होता है? क्या इसके लिए बुनियादी जरूरतों की आवश्यकता नहीं होती है? राज्य योजना की अनुसूचित जाति उपयोजनान्तर्गत जारी धनराशि में भी उत्तरकाशी जनपद में भारी मनमर्जी की गई। उत्तरकाशी अनुसूचित जाति क्षेत्रों के पर्यटन विकास के लिए आवंटित धनराशि ६७.४० लाख रुपए को भी नौ मंदिरों में खर्च पर्यटन विभाग ने इस जाति के बहुतायत वाले क्षेत्रों में फर्जी विकास की इबारत लिख डाली। देहरादून भी पर्यटन विकास की मनमर्जी से अछूता नहीं रहा। यह कालसी क्षेत्र की ग्राम पंचायत सकरौल के अंतर्गत में स्थित प्राचीन काली माता मंदिर के सौंदर्यीकरण पर मात्र २.८७ लाख की धनराशि व्यय की गई। राज्य योजना के अंतर्गत जनपद चमोली में अनुसूचित जाति उपयोजनांतर्गत विकास के लिए आवंटित ३७.७३ लाख रुपये की धनराशि से सिमली में मृत्युंजय मंदिर औली में देवी मंदिर पोखरी के एरास में भैरव मंदिर का सौंदर्यीकरण कराया गया। इसके अतिरिक्त बागेश्वर जनपद में जिला योजना की अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत स्वीकूत धनराशि ७.३० लाख से पर्यटन विकास के स्थान पर यहां भी चार धार्मिक स्थलों का ही सौंदर्यीकरण कराया गया। बागेश्वर में ही राज्य योजना से प्राप्त धनराशि १९.२१ लाख से गोलू मंदिर ओखली सिरोद एवं सुवा देवी मंदिर जत्थाकोट का सौंदर्यीकरण कराया गया। पिथौरागढ़ में जरूर इस धनराशि का सदुपयोग करते हुए विकास की दृष्टि से राज्य योजना की अनुसूचति जाति योजना के अंतर्गत प्राप्त धनराशि ८९.१३ लाख रुपये से ग्राम लटेश्वर-सिलिंगिया में थलकेदार-लटेश्वर-सिंलिगिया १४ किलोमीटर पर्यटक परिपथ का निर्माण पिथौरागढ़ के मूनाकोट विकास खण्ड में कराया गया। हरिद्वार में भी राज्य योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति क्षेत्रों की विकास उपयोजना के अंतर्गत पर्यटन योजनाओं को बढ़ावा दिए जाने के नाम पर आवंटित ८०.३८ लाख रुपये से मात्र मंदिरों का ही सौंदर्यीकरण कराया गया। कुछ ऐसा ही हाल ऊधमसिंह नगर को आवंटित राज्य योजना के अंतर्गत प्राप्त १८ लाख रुपये का भी रहा। यहां भी पर्यटन विकास के लिए आई धनराशि को विकास खण्ड खटीमा में स्थित वनखण्डी आश्रम तथा बौर जलाशय सौंदर्यीकरण पर खर्च किया गया।

  उत्तराखण्ड के टिहरी जनपद में भी पिथौरागढ़ की भांति जिला योजना के अंतर्गत आवंटित धनराशि से विकास खण्ड जाखणीधार के लम्बगांव-द्घनसाली मार्ग पर चौधाण ग्राम में १० लाख की लागत से सुलभ शौचालय का निर्माण तथा विकास खण्ड प्रतापनगर के तिलवाड़ ग्राम में मंदिर सौंदर्यीकरण के साथ-साथ मार्ग सुधार का कार्य भी कराया गया। आज भले ही मदन कौशिक विपक्ष में बैठकर सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी का रोना रो रहे हों अथवा किसानों के हित की बात कर रहे हों। परंतु मदन कौशिक का अपना पर्यटन मंत्री कार्यकाल विवादों से भरा है। इस अवधि में राज्य योजना तथा जिला योजना तथा पर्यटन स्थलों के विकास के नाम पर आवंटित धन का दुरुपयोग सारी कहानी बयान करने के लिए काफी है। सूचना अधिकार के अंतर्गत प्राप्त जानकारी पर्यटन विभाग द्वारा शासनादेशों के विपरीत जाकर धनराशि को अपने विभागीय मंत्री की सहमति से पर्यटन विकास के बजाय धार्मिक स्थलों के निर्माण तथा सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण कर बनाए गए मंदिरों के सौंदर्यीकरण का खुलासा करती है। जबकि यह धनराशि राज्य में स्थित पर्यटक स्थलों के सौंदर्यीकरण एवं उनकी सुविधाएं बढ़ाने को लेकर आवंटित की गई थी। इससे पूर्व मदन कौशिक पर विधायक निधि के दुरुपयोग का मामला लोकायुक्त में जा पहुंचा था। अब पर्यटन विभाग की धनराशि को नियम विरुद्ध खर्च करने के मामले में मदन कौशिक फिर आरोपों के द्घेरे में हैं। 

  आरटीआई कार्यकर्ता अनिल वर्मा का कहना है कि विकास के लिए आवंटित धनराशि को मदन कौशिक ने नियम विरुद्ध धार्मिक स्थलों पर खर्च किया है जबकि अगर हरिद्वार में ही समस्याओं की बात की जाए तो पर्यटक स्थलों पर पीने का पानी शौचालय निर्माण तक नहीं हुए हैं। इस मामले को लेकर कोर्ट में जाकर अपील दायर की जाएगी।

 

 
         
 
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  • गुंजन कुमार

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