fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 45 30-04-2017
 
rktk [kcj  
 
खास खबर 
 
धरातल नहीं कागज पर समीक्षा बैठक

विकास के नाम पर मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकें हवाई साबित हो रही हैं। हालत यह है कि आपदाग्रस्त उत्तरकाशी जिले की समीक्षा बैठक के लिए वे हरिद्वार में उड़न खटोले से उतरे और वहीं पर उत्तरकाशी से आए अधिकारियों की बैठक लेकर कागजी खानापूर्ति कर दी। हरिद्वार जिले के साथ सुदूर पर्वतीय जिले की बैठक बुलाए जाने पर वहां के विधायक नाराज हैं। हरिद्वार जिले की समीक्षा बैठक भी महज औपचारिक रही। आम लोग ही नहीं कांग्रेस कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री के रवैये से निराश हुएविकास के नाम पर मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकें हवाई साबित हो रही हैं। हालत यह है कि आपदाग्रस्त उत्तरकाशी जिले की समीक्षा बैठक के लिए वे हरिद्वार में उड़न खटोले से उतरे और वहीं पर उत्तरकाशी से आए अधिकारियों की बैठक लेकर कागजी खानापूर्ति कर दी। हरिद्वार जिले के साथ सुदूर पर्वतीय जिले की बैठक बुलाए जाने पर वहां के विआँाायक नाराज हैं। हरिद्वार जिले की समीक्षा बैठक भी महज औपचारिक रही। आम लोग ही नहीं कांग्रेस कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री के रवैये से निराश हुए

 

उत्तराखण्ड के मुखिया विजय बहुगुणा आजकल राज्य के विभिन्न जनपदों के विकास को लेकर समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। इन समीक्षा बैठकों में मुख्यमंत्री संबंधित जिलों के लिए विकास कार्यों की लंबी-चौड़ी द्घोषणाएं भी कर रहे हैं। समीक्षा बैठक कार्यक्रम के अंतर्गत १ दिसंबर को बहुगुणा हरिद्वार में थे। विकास में लगातार पिछड़ चुके हरिद्वार की स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिक खासे उत्साही भी थे। लेकिन बहुत जल्दी ही उनका यह उत्साह ठंडा भी पड़ गया। १ दिसंबर को मुख्यमंत्री समीक्षा बैठक के लिए हरिद्वार पहुंचे वह भी उड़न खटोले में सवार होकर। इसी दिन हरिद्वार के साथ-साथ आपदा से पीड़ित जनपद उत्तरकाशी की विकास समीक्षा बैठक भी तय की गई। उत्तरकाशी की समस्याओं से २५० किमी ़ दूर हरिद्वार में उठाने और वहीं के विकास कार्यों की समीक्षा हरिद्वार में करने से सीएम विजय बहुगुणा की समीक्षा बैठकों पर ही सवालिया निशान लग गए। इस दौरान हरिद्वार सहित उत्तरकाशी के प्रशासनिक अधिकारियों को हरिद्वार ही बुलाया गया था। समीक्षा बैठक में हरिद्वार के विधायक जरूर अपनी-अपनी समस्याएं सीएम के सामने उठाने में कामयाब रहे, लेकिन उत्तरकाशी जनपद के विधायक समीक्षा बैठक से महरूम रहे।

हरिद्वार में उत्तरकाशी के विकास की समीक्षा समझ से परे तो है ही अपितु हरिद्वार की समीक्षा बैठक भी मात्र कागजी खानापूर्ति ही कही जाएगी। क्योंकि विजय बहुगुणा उड़न खटोले में बैठकर गुरुकुल हैलीपैड पर उतरे और सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग से बैठक स्थल सीसीआर टावर पहुंच कर अधिकारियों से कागजी विकास की समीक्षा की। उन्होंने ऊंट के मुंह में जीरा की तर्ज पर हरिद्वार के लिए कुछ द्घोषणाएं कीं और उड़न खटोले में बैठकर सीधे देहरादून के लिए उड़ान भरी। मुख्यमंत्री महज औपचारिक समीक्षा बैठक को लेकर जनपद के अधिकारी भी बेफिक्र ही रहे। समीक्षा बैठक के दौरान सीएम ने हरिद्वार में मौजूद समस्याओं के अंबार को दूर करने के लिए एक भी शब्द नहीं बोला। उनका यह रवैया स्थानीय निवासियों को उदास कर गया। जैसे कि हरिद्वार के एकमात्र सरकारी अस्पताल में वर्षों से कोई फिजिशियन नहीं है और न ही कोई सर्जन है। बिजली जाने पर एक्स-रे तथा अल्ट्रासाउंड मशीने ठप पड़ जाती हैं। प्रत्येक वर्ष सैकड़ों मेले हरिद्वार में आयोजित होते हैं। इस दृष्टि से यह अस्पताल अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद स्टॉफ तथा चिकित्सा उपकरण की कमी के चलते अधिकतर मरीजों को यहां से रेफर किया जाता है। 

अस्पताल की बदहाली का आलम यह है कि रोगियों को दवाइयां नहीं मिलती। एक्स-रे फिल्म उपलब्ध नहीं रहती है। यही हाल मेला अस्पताल का भी है। २००४ के अर्द्ध-कुंभ में निर्मित यह अस्पताल स्टॉफ की कमी तथा बजट न होने के चलते आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। लेकिन जनता को गुमराह करने में लगे राज्य के सीएम को जनता की इन मूलभूत समस्याओं की शायद कोई फिक्र नहीं है। समीक्षा बैठक के दौरान हरिद्वार की चिकित्सा व्यवस्था का कहीं कोई जिक्र न होना हरिद्वार से सांसद और कैबिनेट मंत्री हरीश रावत (जो स्वयं समीक्षा बैठक में मौजूद थे) के हरिद्वार प्रेम पर भी सवालिया निशान लगाने के लिए काफी है। हरिद्वार को उत्तर प्रदेश के दौरान विद्युत कटौती से मुक्त रखा गया था। आज अगर कहीं सबसे अधिक विद्युत कटौती हो रही है तो वह स्थान हरिद्वार ही है। यहां के लोग प्रतिदिन ६ से ७ द्घंटे की कटौती झेल रहे हैं। औद्योगिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध हुई इस धर्मनगरी के फैक्ट्री मालिक बिजली कटौती को लेकर मुख्यमंत्री दरबार तक अपनी गुहार लगा चुके हैं। लगातार हो रही विद्युत कटौती का प्रभाव पीने के पानी की उपलब्धता पर भी पड़ रहा है। लेकिन समीक्षा बैठक के दौरान विद्युत कटौती पर मुख्यमंत्री कुछ नहीं बोले।

कांग्रेस की ही पूर्ववर्ती तिवारी सरकार के कार्यकाल में विकसित औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल में भी समस्याएं मुंह बाये खड़ी हैं। सिडकुल में सड़कों का बुरा हाल है। समूचा सिडकुल क्षेत्र अपराधियों की धमा-चौकड़ी से त्रस्त है। चोरी-डकैती लूट सहित अन्य सभी खतरनाक अपराधों का एक गढ़ सा बन कर बदनाम हो चुका सिडकुल क्षेत्र एक अदद थाने की मांग को लेकर पिछले कुछ समय से सरकार के कानों तक अपनी बात पहुंचाता रहा है। लेकिन दो-दो मुख्यमंत्रियों की द्घोषणाओं के बावजूद भी आज तक इस क्षेत्र में थाने की स्थापना नहीं हो सकी है। अपराधों की जकड़ में अकेले सिडकुल हो ऐसा ही नहीं महंत सुधीर गिरी हत्याकांड का खुलासा आज तक नहीं होना पुलिस की विफलता को साबित करने के लिए काफी है। पूरी समीक्षा बैठक के दौरान हरिद्वार में बढ़ते अपराधों पर मुख्यमंत्री ने कोई सवाल- जवाब अधिकारियों से किया हो इस प्रकार की कोई बात सामने नहीं आ पाई। कुंभ द्घोटाला और इसकी जांच के लिए आमरण-अनशन तक कर चुके कांग्रेस सेवादल के कार्यकर्ताओं को समीक्षा बैठक के दौरान उम्मीद थी कि सीएम उनकी मांग मानते हुए कुंभ द्घोटाले की सीबीआई जांच कराए जाने की द्घोषणा करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री की कुंभ द्घोटाले पर चुप्पी से कांग्रेस सेवादल के नेताओं को मायूसी ही हाथ लगी।

हरिद्वार की एक और बड़ी समस्या जिस पर लग रहा था कि मुख्यमंत्री दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कुछ कार्यवाही कर सकते हैं, वह है शहर का अनियोजित विकास। इसके चलते करोड़ों रुपये का सरकारी धन मनमर्जी से खर्च कर सरकार को हानि पहुंचाई जा रही है। उदाहरण के तौर पर इस समय समूचे मध्य हरिद्वार को खोदकर सीवर लाइन डालने का कार्य किया जा रहा है। सीवर डालने के लिए कुंभ बजट से बनी मुख्य सड़क तथा तमाम ब्रांच गलियों को पूरी तरह उखाड़ दिया गया है। जबकि यही कार्य कुंभ बजट से निर्मित होने वाली सड़क के बनने से पहले भी किया जा सकता था। अब सीवर के लिए कुंभ बजट से बनी सड़कों को खोदा जा रहा है तो तीन-चार माह पूर्व पानी की पाइप लाइन डालने के लिए भी इन सड़कों को खोदा गया था। जगह-जगह से खुदी सड़कों के कारण जहां लगातार दुर्द्घटनाएं हो रही हैं, वहीं शहरवासियों का चलना भी दूभर हो गया है। समीक्षा बैठक के लिए हैलीपेड से बैठक स्थल पहुंचे मुख्यमंत्री ने शहर के अंदरूनी हालात का जायजा लेना भी उचित नहीं समझा। तीर्थनगरी की सड़कें गंदगी से पटी पड़ी हैं। नगर निगम के किसी सफाई दस्ते का यहां कुछ अता-पता नहीं है। शिक्षा की बदहाल स्थिति को लेकर भी मुख्यमंत्री कोई टिप्पणी तक नहीं कर पाए। जिला योजना तथा राज्य योजना का बजट तक खर्च न करने का भी कोई सीधा असर समीक्षा बैठक के दौरान किसी जिम्मेदार अधिकारी पर पड़ता नहीं दिखा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कुछ ऐसी द्घोषणाएं जरूर की जिनको धरातल पर उतारना उतना आसान नहीं है जितना द्घोषणा करना। इसमें रुड़की नगर पालिका का दर्जा बढ़ाकर उसको नगर निगम करने की द्घोषणा की गई। जबकि इससे पूर्व २०१० में नगर निगम द्घोषित की जा चुकी हरिद्वार नगर पालिका आज भी बजट के साथ-साथ कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। 

हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि तीन वर्ष बीत जाने पर भी हरिद्वार नगर निगम को स्थायी मुख्यनगर अधिकारी तक नहीं मिल सका है। नगर निगम का स्थायी भवन भी नहीं बन सका है। इसके अतिरिक्त हरिद्वार को सौगात के रूप में गंगा के तटों पर सड़कें बनाने तथा प्लॉटिंग को बढ़ावा देने के चलते फलदार वृक्षों की छंटाई का कार्य वन विभाग से लेकर उद्यान विभाग को देने की द्घोषणा की गई। मुख्यमंत्री की इन द्घोषणाओं का विरोध भी तुरंत ही शुरू हुआ और मातृ सदन आश्रम के संस्थापक स्वामी शिवानंद ने गंगा के तटों पर सड़क बनाने, खनन खोलने और फलदार वृक्षों की छंटाई का कार्य वन विभाग से लेकर उद्यान विभाग को देने पर विरोध स्वरूप अनशन की चेतावनी भी दे दी है। कुल मिलाकर अगर कहा जाए कि उत्तरकाशी तथा हरिद्वार जनपद की समीक्षा बैठक मात्र औपचारिक बैठक ही बनकर रह गई तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। साथ ही उत्तरकाशी जैसे आपदाग्रस्त जनपद की हरिद्वार में समीक्षा बैठक का भी कोई औचित्य समझ नहीं आता है। बेहतर होता कि उत्तरकाशी की समीक्षा उत्तरकाशी की सरजमीं पर की जाती तो शायद मुख्यमंत्री उत्तरकाशी की समस्या से रू-ब-रू हो पाते। मुख्यमंत्री विजय बहुुगुणा को यह जरूर समझना होगा कि उड़न खटोले में बैठकर पहाड़ी जनपदों की समीक्षा बैठक मैदानी जनपदों में करने से विकास की सूरत बदलने वाली नहीं है और इस प्रकार न ही कोई परिवर्तन आने वाला है। इसी का परिणाम है कि हरिद्वार में आयोजित उत्तरकाशी की समीक्षा बैठक के दौरान वहां के विकास के लिए कोई द्घोषणा नहीं हो पाई।


बात अपनी अपनी

मुख्यमंत्री को उत्तरकाशी के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक उत्तरकाशी में ही करनी चाहिए थी। इस समीक्षा बैठक से मैं बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूं। अधिकारियों को समीक्षा बैठक के लिए उत्तरकाशी से हरिद्वार बुलाकर सरकारी धन की बर्बादी की गई। जिससे उत्तरकाशी को इस समीक्षा बैठक का कोई लाभ नहीं हुआ।

मालचंद विधायक पुरोला उत्तरकाशी

हरिद्वार में उत्तरकाशी के लिए आवंटित बजट के खर्च को लेकर बैठक हुई थी। विकास कार्यों की प्रगति देखने के लिए मुख्यमंत्री जी ने स्वयं उत्तरकाशी आने का वादा किया है। इसी आधार पर उत्तरकाशी की समीक्षा बैठक हरिद्वार में हुई।

विजय पाल सिंह सजवाण विधायक गंगोत्री उत्तरकाशी

विधायक निधि के कार्यों का भौतिक सत्यापन डीआरडीए द्वारा किया जाता है। इसमें अगर कोई गलती है तो डीआरडीए की है। वैसे भी यह मामला मेरे से पूर्व का है। लोकायुक्त द्वारा केवल अपर सहायक अभियंता की गलती बताना ठीक नहीं है। इसमें तत्कालीन एसडीओ तथा विधायक की भी उतनी ही गलती है। विश्वकर्मा धर्मशाला के निकट निर्मित बताए जा रहे सामुदायिक मिलन केन्द्र की जांच कराई जाएगी।

एमएस रौथाण अधिशासी अभियंता आरईएस हरिद्वार

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 63%
uk & 13%
 
 
fiNyk vad
  • दिकदर्शन रावत@सुमित जोशी

 

प्रदेश में हाईकोर्ट के आदेश पर कुछ दिन के लिए खनन बंद क्या हुआ कि स्टोन क्रशर मालिकों ने जमकर चांदी काटी। जरूरतमंदों को महंगे दामों पर

foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1602105
ckj