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vad 37 05-03-2017
 
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स्मृति शेष
 
रवि का राग भैरवी

रविशंकर का संगीत इस बात का सबूत है कि कला संस्कृतियों को करीब लाती है। अपनी उंगलियों की जुंबिश से सितार में उन्होंने वह झंकार पैदा की जिसने पूरी दुनिया को झंकृत कर दिया। भारत रत्न से सम्मानित रविशंकर ने पश्चिमी संगीत के प्रति हिकारत का भाव रखने के बजाय उसके साथ जुगलबंदी की। उनको राग भैरवी बेहद प्रिय था, इस राग को बजाने के बाद गाना-बजाना बंद कर दिया जाता है। शायद उन्होंने अपनी जिंदगी की राग भैरवी तान छेड़ दी जिसके बाद वे हमेशा के लिए मौन हो गए...

 

एक हफ्ता भी नहीं गुजरा जब मशहूर सितारवादक रविशंकर की पत्नी सुकन्या ने कैलिफोर्निया (अमेरिका) से अमिताभ बच्चन के द्घर फोन कर सूचना दी कि रविशंकर अमिताभ से मिलना चाहते हैं। रविशंकर काफी दिनों से बीमार चल रहे थे और दो ही दिनों बाद उनकी सर्जरी होनी थी। अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर इस बात की चर्चा की और आश्चर्य जताया था कि पहली बार रविशंकर ने उनसे मिलने की तमन्ना जाहिर की है। लेकिन शायद इसे ही नियति कहते हैं कि अपने जीवन में हमेशा ऊंचााइयों पर रहने के आदि, भारत के सर्वोच्च पुरस्कार 'भारत रत्न' से सम्मानित तीन बार ग्रैमी पुरस्कार विजेता और दुनिया के महान संगीतकारों में अग्रणी रविशंकर को अंतिम इच्छा पूरा करने तक का मौका नहीं मिला।

पंडित रविशंकर का १२ दिसंबर को अमेरिका के सैन डियागो में निधन हो गया। रविशंकर ९२ साल के थे। उन्हें ६ दिसंबर को सांस लेने में तकलीफ होने पर ला जोला के स्क्रिप्स मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। रविशंकर भारत के संगीत राजदूत थे और शास्त्रीय संगीत की दुनिया में अग्रणी माने जाते थे। 

संगीत के ब्रांड एम्बेसडर और सितार को विश्वफलक पर ले जाने वाले रविशंकर ने प्रमाणित कर दिया कि कला किस तरह सस्कृतियों को करीब लाती है। साथ ही मनुष्यता के प्रति विश्वास को मजबूत करती है। उन्होंने खुद को संगीत के प्रति समर्पित कर दिया। सोलह-अठारह द्घंटे नियमित रियाज करने वाले इस महान संगीतकार ने पाश्चात्य संगीत के प्रति हिकारत की नजर रखने की बजाय उसे आत्मसात किया और एक नई चीज को ईजाद किया। संगीत समूह 'बीटल्स' को भारतीय शास्त्रीय संगीत से बावस्ता कराने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। वायलिन वादक येहुदी मेन्यूहिन पंडित रविशंकर के प्रशंसक थे। बकौल जॉर्ज हैरीसन- 'रविशंकर पहले ऐसे शख्स थे जिन्होंने मुझे प्रभावित करने की कोशिश नहीं की, बल्कि मैं उनसे प्रभावित हो गया।' इनका संगीत बहुआयामी रहा। पश्चिमी संगीतकारों के साथ जुगलबंदी की। सत्यजीत रे की फिल्मों और रिचर्ड एटनबरो की 'गांधी' में संगीत दिया। इस फिल्म में संगीत के लिए ऑस्कर नॉमिनेशन मिला। इकबाल के गीत 'सारे जहां से अच्छा' को नई धुन दी।

रविशंकर का जन्म ७ अप्रैल १९२० को वाराणसी में हुआ था। उनका परिवार पूर्वी बंगाल के जैस्सोर जिले के नरैल का रहने वाला था। रविशंकर ने नृत्य के जरिए कला जगत में प्रवेश किया था। शुरुआत में उन्होंने अपने बड़े भाई उदयशंकर की तरह नृत्यकला की ऊंचाइयां छूना चाहते थे। युवावस्था में अपने भाई के नृत्य समूह के साथ यूरोप और भारत का दौरा भी किया। अठारह साल की उम्र में रविशंकर ने नृत्य छोड़कर सितार सीखना शुरू कर दिया। रविशंकर उस्ताद अलाउद्दीन खां से सितार की दीक्षा लेने मैहर पहुंचे और खुद को उनकी सेवा में समर्पित कर दिया। रविशंकर ने १९३८ से १९४४ तक सितार का अध्ययन किया और फिर स्वतंत्र तौर पर काम करने लगे। रविशंकर मुंबई आ गए और उन्होंने इप्टा (इंडियन  पीपुल्स थियेटर असोसिएशन) ज्वाइन कर लिया। १९४६ में इन्होंने मशहूर गीत 'सारे जहां से अच्छा' को भी रीकंपोज किया जो काफी मशहूर हुआ। इस दौरान उन्होंने सत्यजीत रे की फिल्मों में भी संगीत दिया। १९४९ से १९५६ तक उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में बतौर संगीत निर्देशक काम किया।  १९५४ में रविशंकर ने सोवियत यूनियन जाकर भी भारतीय संगीत को गौरव दिलाया। इसके बाद तो जैसे सिलसिला चल निकला और अगले ही साल १९५५ में फोर्ड फाउंडेशन ने न्यूयार्क में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें भारतीय संगीत का प्रदर्शन रविशंकर ने किया। १९५६ में रविशंकर की 'तीन राग' नाम की पहली एलबम रिलीज हुई जिसे काफी सराहना मिली। एक ऐसा समय आया जब सितार और रविशंकर एक-दूसरे के पर्याय बन गए। १९६० के बाद उन्होंने यूरोप के दौरे शुरू किये और मशहूर वायलिन वादक येहूदी मेन्यूहिन और बीटल्स बैंड के जॉर्ज हैरीसन जैसे लोगों के साथ काम करके अपनी खास पहचान बनाई। अपने जीवन में वे लंबे समय तक तबला उस्ताद अल्ला रक्खा खां, किशन महाराज और सरोद वादक उस्ताद अली अकबर खान के साथ जुड़े रहे। उन्हें १४ मानद डॉक्ट्रेट, पद्म विभूषण, मैग्सेसे तीन ग्रेमी अवॉर्ड और १९८२ में गांधी फिल्म में मौलिक संगीत देने के लिए जार्ज फेन्टन के साथ नामांकन भी मिला था। १९७० में उन्हें कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्‌स में भारतीय संगीत पढ़ाने के लिए बुलाया गया। रविशंकर को उनके संगीत सफर के लिए १९९९ में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया। वर्ष १९८६ से १९९२ तक वे राज्यसभा सदस्य भी रहे। 

पंडित रविशंकर संगीत के शिखर पर पहुंचे लेकिन पारिवारिक तौर पर टुकड़ों में ही बंटे रहे। पंडित रविशंकर ने दो शादियां की। उनकी पहली शादी उनके गुरु अलाउद्दीन खां की बेटी अन्नपूर्णा से हुई। बाद में अन्नपूर्णा से उनका तलाक हो गया। उनकी दूसरी शादी सुकन्या से हुई जिनसे उनकी एक संतान है। इसके अलावा उनका संबंध एक अमेरिकी महिला सू जोन्स से भी रहा, जिनसे उनकी एक बेटी नोरा जोन्स है। उन्होंने सू से शादी नहीं की जिसके चलते उन पर कई तरह के सवाल भी उठाये गए। इस दौरान पंडित रविशंकर का विवादों से भी नाता रहा। उन्हें १९९९ में मिले भारत रत्न पर पंडित जसराज ने सवाल उठाया। जसराज ने आरोप लगाया था कि रविशंकर ने भारत रत्न के लिए प्रभावशाली सांसदों से लॉबिंग की थी। इसके अलावा जसराज का कहना था कि रविशंकर ने कई बार भारत विरोधी बयान भी दिए हैं। रविशंकर को भारत रत्न मिलने से उनके प्रतिद्वंद्वी उस्ताद विलायत खां भी नाराज थे। उन्होंने १९६४ में पद्मश्री और १९६८ में पद्म भूषण सम्मान ठुकरा दिया था। विलायत खां साहब ने आरोप लगाया था कि अवॉर्ड देने वाली समिति उनके संगीत के योगदान को जज करने के लिए सक्षम नहीं है। कहा जाता है कि उस्ताद विलायत खां पंडित रविशंकर से कम सम्मान नहीं लेना चाहते थे। फिलहाल पंडितजी की दोनों बेटियां अनुष्का शंकर और नोरा जोन्स, संगीत की उनकी विरासत को आज भी आगे बढ़ा रही हैं। इसके अलावा उनकी पहली पत्नी अन्नपूर्णा और बेटा शुभेन्द्र शंकर भी देश के प्रमुख संगीतकारों में गिने जाते हैं।

 
         
 
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  • आकाश नागर

उत्तराखण्ड में हर साल कृषि उपकरणों के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाते रहे हैं। लेकिन अब किसानों में लकड़ी की जगह लोहे का हल लोकप्रिय हो रहा

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