fnYyh uks,Mk nsgjknwu ls izdkf'kr
चौदह o"kksZa ls izdkf'kr jk"Vªh; lkIrkfgd lekpkj i=
vad 45 30-04-2017
 
rktk [kcj  
 
प्रदेश 
 
नैनीताल से चुनाव लड़ेंगी मेनका

लोकसभा चुनाव अभी लगभग १८ माह दूर हैं लेकिन चुनावी माहौल अभी से गरमाने लगा है। २० दिसंबर को गुजरात और हिमाचल के नतीजे आने के बाद राजनीतिक दलों के फोकस में २०१४ के आम चुनाव होंगे। उत्तराखण्ड में भी पांच लोकसभा सीटों के लिए अभी से संभावित उम्मीदवारों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के भीतर नूराकुश्ती शुरू हो चुकी है। राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के लचर प्रदर्शन और देश भर में एंटी कांग्रेस लहर के चलते राजनीतिक पण्डित कांग्रेस के पिछले लोकसभा चुनाव प्रदर्शन को असंभव मान रहे हैं। सभी पांच सीटों पर विजय का परचम लहराने वाली कांग्रेस के लिए इस बार एक भी सीट सुरक्षित नहीं बताई जा रही है। ऐसे में चर्चा है कि भाजपा नैनीताल सीट से गांधी परिवार की बहू मेनका गांधी को मैदान में उतार उन कांग्रेसी दिग्गजों के मनसूबों पर पानी फेरने का मन बना रही है, जो यहां से अपना भाग्य आजमाना चाहते हैं। इतना ही नहीं भाजपा के भीतर भी इसको लेकर भारी सस्पेंस है। पूर्व सांसद बलराज पासी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री बची सिंह रावत आदि वरिष्ठ भाजपा नेताओं की नींद इसके चलते उड़ी हुई है। दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री हरीश रावत के खेमे में भी इसको लेकर सुगबुगाहट है। बताया जा रहा है कि हरीश  इस बार हरिद्वार से अपनी जीत को लेकर बहुत आश्वस्त न होने के चलते नैनीताल से लड़ने की सोच रहे हैं।

                   भाजपा सूत्रों के अनुसार मेनका गांधी स्वयं भी अगला लोकसभा चुनाव नैनीताल लोकसभा सीट से लड़ना चाहती हैं। पूर्व में उनकी पुत्रवधु यामिनी रॉय को सितारगंज से उपचुनाव में प्रत्याशी बनाने की योजना इसी रणनीति का एक हिस्सा थी। यामिनी रॉय कोलकाता की हैं। वह फैशन डिजाइनर हैं। चूंकि वह बंगाली समुदाय से हैं, इसलिए सितारगंज के करीब ४५ प्रतिशत बंगाली मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए यामिनी को चुनाव में उतारने की तैयारी थी। सितारगंज सीट पर बंगाली मतदाताओं की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विधानसभा सीट नैनीताल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इस समुदाय के मतदाताओं को गांधी परिवार यामिनी रॉय के बलबूते अपने पक्ष में लाने के सपने भी पाले हुए है। हो सकता है कि आगामी लोकसभा चुनावों में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के विधानसभा क्षेत्र सितारगंज में भाजपा यामिनी रॉय को सक्रिय कर दे।

                   उत्तराखण्ड की नैनीताल और उत्तर प्रदेश की पीलीभीत सीट पड़ोस में ही है। मेनका गांधी पूर्व में पीलीभीत का ६ बार प्रतिनिधित्व कर चुकी है और वर्तमान में उनके पुत्र वरुण यहां से सांसद हैं। राज्य गठन से पूर्व नैनीताल सीट को नैनीताल-बहेड़ी सीट कहा जाता था और राज्य बनने के बाद बहेड़ी का कुछ हिस्सा पीलीभीत में जुड़ गया। भाजपा सूत्रों का कहना है कि इस कारण नैनीताल सीट मेनका के लिए मुफीद भी मानी जा रही है। 

                   मेनका के नैनीताल से चुनाव लड़ने की तैयारी की चर्चाओं ने राज्य भाजपा के कुछ बड़े नेताओं की नींद उड़ा दी है, ये वे नेता है जो २०१४ का चुनाव नैनीताल से लड़ने की जुगत में थे। इनमें सबसे पहला नाम बलराज पासी का आ रहा है। पासी पूर्व में इस लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनकी दावेदारी इसलिए भी मजबूत मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने पूर्व में यहां से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी को लोकसभा चुनाव हराया था। इसी के साथ भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री बची सिंह रावत 'बचदा' की भी यहां से चुनाव लड़ने की चर्चा थी। लेकिन सभी अटकलों को विराम लगाते हुए फिलहाल मेनका गांधी का नाम नैनीताल से पार्टी प्रत्याशी बनने की सूची में पहले नंबर पर है। वह इसलिए भी क्योंकि आंवला में उन्हें अपना सिंहासन डोलता नजर आ रहा है।

 

तराई में खेला जाएगा जाती कार्ड

नैनीताल लोकसभा सीट का अधिकतर हिस्सा तराई का है। यहां के करीब २५ से ३० प्रतिशत मतदाता विस्थापित लोग हैं। इनमें अधिकतर सिख हैं। क्योंकि मेनका गांधी खुद सिख जाति से संबंध रखती है, इसलिए भाजपा यहां जाति कार्ड को खेलने के लिए भी गांधी परिवार की बहू को चुनाव मैदान में उतारने का मन बना रही है। भाजपा मेनका गांधी को नैनीताल लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाकर एक तीर से दो निशाने साध सकती है। मेनका गांधी की पुत्रवधु यामिनी रॉय जहां बंगाली बाहुल्य सितारगंज में जातिवाद के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करेंगी वहीं खुद मेनका बाजपुर, गदरपुर, रुद्रपुर, काशीपुर के सिख मतदाताओं के बीच जातिवाद को बढ़ावा देकर अपनी जीत का रास्ता सुनिश्चित करेंगी।


ग्राम प्रहरी की गुहार

 

  • न्यूनतम वेतन ६००० प्रतिमाह किया जाए
  • सामजिक सुरक्षा ईपीएफ और जीवन बीमा का लाभ दिया जाए
  • राजस्व विभाग में रिक्त पदों पर ग्राम प्रहरियों की नियुक्ति की जाए
  • मानदेय का भुगतान हर माह किया जाए

 

गांवों की चौकीदारी (सुरक्षा के साथ- साथ सरकार के सूचना तंत्र में अहम भूमिका निभाने वाले ग्राम प्रहरी अपनी अनदेखी से अब आंदोलित हो गए हैं। न्यूनतम मजदूरी भी इन्हें सरकार से नहीं मिल रही। जबकि ये चौबीस द्घंटे तैनात रहते हैं। आपदा या चुनाव के दौरान इन्हें हर वक्त मुस्तैद रहना पड़ता है। फिर भी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे इस राज्य के ग्राम प्रहरी की समस्याओं को दूर करने की कोई कोशिश नहीं हो रही। सीमांत गांवों में सरकार को गुप्त सूचनाएं देने में इनका महत्वपूर्ण योगदान है।

उत्तराखण्ड सरकार ने वर्ष २००४ में  शासनादेश जारी कर राजस्व पुलिस को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रत्येक ग्राम सभा में एक ग्राम प्रहरी की नियुक्ति का निर्णय लिया था। इसके बाद प्रदेश भर में हजारों ग्राम प्रहरी नियुक्त हुए थे। गावों की सुरक्षा समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां इन पर सौंपी गई हैं और मानदेय आज भी इन्हें मात्र पांच सौ रुपये प्रतिमाह दिया जा रहा है, जिसमें दो जून की रोटी तक चलाना मुश्किल है। सरकार प्रत्येक साल न्यूनतम वेतनमान तय करती है। इसका उल्लंद्घन करने वाली निजी कंपनियों पर श्रम कानून के तहत कार्रवाई की जाती है। वही सरकार स्वयं यहां श्रम कानून का उल्लंद्घन कर रही है।

उत्तराखण्ड में लगभग ५५०० ग्राम प्रहरी हैं। टिहरी में ५३२, रुद्रप्रयाग में १६४ ग्राम प्रहरी हैं। रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ तहसील में ५४, जखौली में ५१ तथा रुद्रप्रयाग में ५९ ग्राम प्रहरी अपनी सेवा दे रहे हैं। भूलेख कार्यालय के अनुसार अकेले पौड़ी जिले में ७८६ ग्राम प्रहरी हैं। जिसमें पौड़ी में २१०, कोटद्वार में ६०, यमकेश्वर में ५२, धूमाकोट में ३२, थलीसैण में १४६, सतपुली में ६७, चौबट्टाखाल में ८१, लैंसडाउन में १३४, श्रीनगर में ४ ग्राम प्रहरी हैं।   

कर्तव्यों और दायित्वों की लंबी फेहरिस्त को पहाड़ों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में पूरा करने के लिए शायद कभी-कभी दिन भर के २४ द्घंटे भी कम पड़ जायें। कामों की इस सूची से यह भी स्पष्ट है कि ग्राम प्रहरी गावों में चौकीदार मात्र नहीं बल्कि वे सरकार में सूचना तंत्र की तरह काम कर रहे हैं। काम कराने के लिए अपेक्षाएं तो ज्यादा हैं, लेकिन एवज में जो हाथ आता है, वह है महीने में मात्र ५०० रुपये। इतने कम मानदेय में चौकी से दूर काम कर रहे ग्राम प्रहरियों का चौकी तक का आना-जाना भी पूरा नहीं हो पाता। जो कि इन्हें अपनी जेब से ही वहन करना पड़ता है। मात्र ५०० रुपये प्रतिमाह मिलने वाला मानदेय भी इन्हे समय से नहीं मिल पाता। ५-६ महीनों में इन्हें एक बार मानदेय दिया जाता है।                   

ग्राम प्रहरियों से अपनी ग्राम सभा में होने वाले किसी भी प्रकार के अपराध, आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की गतिविधियों पर निगाह रखना, संदिग्ध व्यक्ति के गांव आगमन पर निगाह रखना, संदिग्ध या अप्राकृतिक मृत्यु जैसी वारदातों आदि की सूचना पटवारी या पुलिस चौकी तक पहुंचाने समेत कई कार्य लिए जा रहे हैं। चुनावों में भी प्रशासन इनकी ड्यूटी लगाना नहीं भूलता। वर्ष २००४ के लोकसभा चुनाव, २००७ के विधानसभा चुनाव, २००८ के विधानसभा चुनाव, २०१२ के विधानसभा चुनाव, के दौरान इनके द्वारा ड्यूटी की गई। लेकिन इनमें से एक भी चुनावी ड्यूटी का भुगतान ग्राम प्रहरियों को नहीं किया गया। 

ग्राम प्रहरियों द्वारा मानदेय बढ़ाने संबंधी मांग शासन स्तर पर कई बार उठाये जाने व पिछले काफी लम्बे समय से कई बार आंदोलनरत रहने के बाद भी इनकी समस्याओं की सुनवायी नहीं हो पायी है। आर्थिक तंगी का दौर झेल रहे इन प्रहरियों का सब्र अब जवाब देने लगा है। और पुनः उन्होंने आन्दोलन की राह पकड़ ली है। २३ नवम्बर को उत्तराखण्ड ग्राम प्रहरी यूनियन द्वारा जिला मुख्यालय पौड़ी में धरना प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में पौड़ी, कोट, कल्जीखाल, थलीसैण में कार्यरत ग्राम प्रहरियों ने हिस्सा लिया। जिसमें अपनी मांगों को लेकर डीएम पौड़ी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया। धरने में शामिल ग्राम प्रहरियों का कहना है कि यदि शीद्घ्र मांगों का निराकरण नहीं हुआ तो पूरे राज्य में व्यापक आन्दोलन छेड़ा जायेगा।

 

बात अपनी अपनी

सरकार ग्राम प्रहरियों के साथ बेहद अन्याय कर रही है। उन्होने कहा कि मंहगाई के दौर में ग्राम प्रहरियों को मात्र ५०० रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है जो कि श्रम कानूनों का उल्लंद्घन है। 

देवानन्द नौटियाल जिला महासचिव सीटू  

 ग्राम प्रहरियों का मानदेय यदि उनके काम के अनुसार देखा जाय तो वह बहुत कम है। जो कि प्रतिमाह ६ हजार किया जाना चाहिए उन्होने कहा कि पौड़ी जिले के अर्न्तगत  ग्राम प्रहरियों को दिये जाने वाले मानदेय में से २६ हजार रुपये गबन की बात भी सामने आयी थी। जिसमें रिकवरी की बात कही गयी थी लेकिन इस संबंध में अभी तक कोई कार्यवाही नही हुयी है। 

मनमोहन सिंह जिलाध्यक्ष ग्राम प्रहरी 

 

 
         
 
ges tkus | vkids lq>ko | lEidZ djsa | foKkiu
 
fn laMs iksLV fo'ks"k
 
 
fiNyk vad pquss
o"kZ  
 
 
 
vkidk er

क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत के सचिव के स्टिंग आॅपरेशन की खबर से कांग्रेस की छवि प्रभावित हुई है?

gkW uk
 
 
vc rd er ifj.kke
gkW & 63%
uk & 13%
 
 
fiNyk vad

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर इन दिनों जबरदस्त कयासबाजी का दौर चल रहा है। चर्चा जोरों पर है कि 

la?k लालकृष्ण आडवाणी अथवा डॉ मुरली

foLrkkj ls
 
 
vkidh jkf'k
foLrkkj ls
 
 
U;wtysVj
Enter your Email Address
 
 
osclkbV ns[kh xbZ
1602128
ckj