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आवरण कथा
 
कुंभ भूमि पर कॉलोनियां

 

  • गुंजन कुमार@अजय शर्मा

 

  gunjan@thesundaypost.in

 

कुंभ भूमि पर कॉलोनियां@भाग&२ 

 

हरिद्वार में सरकारी भूमि पर कब्जा करने में साधु&संतों के साथ ही राजनेता भी पीछे नहीं रहे। राष्ट्रीय पार्टियों के नेताओं ने खुद खड़े होकर जमीनें कब्जा करवाईं तो एक क्षेत्रीय पार्टी के नेता ने अपनी संस्था की आड़ में जमीन हड़प ली। कब्जाई गईं इन जमीनों पर अवैध कॉलोनियां बसती रहीं मगर प्रशासन लापरवाह और लाचार बना रहा। इसके चलते आज बड़ी समस्या यह है कि आखिर कुंभ के बेहतर संचालन के लिए जमीन कहां से लाएं

 

हररिद्वार में शहर के बीचों&बीच नगर पालिका ¼अब नगर निगम½ और बीएचईएल की करोड़ों&अरबों रुपए मूल्य की भूमि पर पक्की कॉलोनियां बस गई हैं। कब्जा करने वालों में बाहरी लोगों के साथ&साथ नगर निगम के कर्मचारी भी शामिल हैं। इस भूमि का उपयोग कुंभ&अर्द्धकुंभ में किया जाता है। अवैध कब्जे का यह खेल कई वर्षों से चल रहा है। मगर प्रशासन इसे रोक नहीं पा रहा है। संबंधित विभाग कार्रवाई के नाम पर एक&दूसरे को सिर्फ पत्र लिखकर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री मान बैठे हैं। यदि हरिद्वार में कब्जे का खेल इसी प्रकार चलता रहा तो सरकार के लिए यहां कुंभ कराना मुश्किल हो जाएगा। ऐसा हरिद्वार के स्थानीय लोग भी मानते हैं। हरिद्वार में पहले ही गंगा के किनारे दोनों ओर खाली भूमि नहीं है। ऐसे में आने वाले वर्षों में यहां कुंभ कैसे होगा] यह सरकार और धार्मिक संस्थाओं को मिलकर सोचना होगा। लेकिन खुद कुछ धार्मिक संस्थाएं ही सरकारी भूमि पर कब्जा करने में पीछे नहीं हैं।

 

हरिद्वार में अगले साल के शुरुआती दिनों में ही अर्द्धकुंभ लगना है। प्रशासनिक स्तर पर अब तक अर्द्धकुंभ की तैयारियां लगभग पूरी हो जानी चाहिए थी। मगर अभी भी सिर्फ बैठकों का दौर चल रहा है। कारण कि मेला प्रशासन के लिए सबसे बड़ा सिर दर्द शहर में खाली भूमि का न होना है। अलग राज्य बनने के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि शायद उत्तराखण्ड सरकार यहां उत्तर प्रदेश के समय से चले आ रहे अवैध कब्जों पर लगाम लगाए। लेकिन नए राज्य की सरकारें भी इस पर आंख मूंदकर बैठी रहीं] यहां तक कि कब्जेदारों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त बताया जाता है। जिसमें प्रत्येक दल के नेता शामिल हैं। एक स्थानीय नागरिक अपना नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताता है कि भाजपा एवं कांग्रेस वरिष्ठ नेता खुद खड़े होकर अपने लोगों से कब्जा करवाते हैं। यही नहीं एक क्षेत्रीय पार्टी के विधायक एवं मंत्री रहे नेता ने भी लाखों फुट भूमि पर कब्जा कर रखा है। मामले को उलझाने के लिए ये लोग कोर्ट का सहारा ले लेते हैं। कोर्ट में मामला चले जाने के बाद एक तो इस पर फैसला आने में समय लगता है दूसरा राजनीतिक संरक्षण के कारण सरकार कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखती। कई मामलों में सरकार केस हारती रही है। 

 

वर्ष २०१० में महाकुंभ की तैयारी में लगे जिला प्रशासन को आवश्यक खाली भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई। इस पर प्रशासन को नगर निगम की एवं अन्य खाली सरकारी भूमि की याद आई। उस वक्त उसका स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के समय अधिकतर सरकारी भूमि पर निर्माण को देखकर तत्कालीन जिलाधिकारी अचंभित रह गए। जिस समय जिलाधिकारी अपनी टीम के साथ अवैध निर्माण का स्थलीय निरीक्षण कर रहे थे तो तब उनके सामने भी निर्माण कार्य चल रहा था। इस पर तत्कालीन जिलाधिकारी आनंदबर्द्धन ने नगर पालिका परिषद के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने लिखा ^टिबड़ी क्षेत्र में रेलवे अंडर ब्रिज के समीप स्थित नगर पालिका की भूमि हरिद्वार में आयोजित कुंभ और अर्द्ध कुंभ मेले के लिए आरक्षित है। हरिद्वार विकास प्राधिकरण की वर्तमान में लागू महायोजना में इस भूमि का उपयोग मेले के लिए दर्शाया गया है। अतः इस भूमि को किसी और प्रयोजन के लिए कदापि उपयोग नहीं किया जा सकता है। १५ जनवरी २००८ को अन्य अधिकारियों जिनमें आप भी सम्मिलित थे] के साथ टिबड़ी क्षेत्र की उक्त भूमि का निरीक्षण किया गया था एवं पाया गया कि इस भूमि पर अनेक व्यक्तियों द्वारा जिनमें अधिकांश नगर पालिका के कर्मचारी हैं] ने अतिक्रमण कर पक्के निर्माण और झुग्गी&झोपड़ी बना ली हैं। निरीक्षण के दौरान भी निर्माण का कार्य किया जा रहा था। इस भूमि का उपयोग कुंभ और अर्द्धकुंभ की व्यवस्थाओं के दौरान स्वास्थ्य विभाग के कैंप] पुलिस चौकी] फायर ब्रिगेड एवं यातायात पुलिस लाइन के अस्थायी निर्माण के लिए किया जाता है। अतः आपको निर्देशित किया जाता है कि आप तत्काल प्रभाव से उक्त मेला भूमि से अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई सुनिश्चित करें और इसकी जानकारी भी दें।^

 

तत्कालीन जिलाधिकारी के इस पत्र के बावजूद नगर पालिका ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिस कारण अतिक्रमण का सिलसिला और तेज हो गया। यही नहीं तत्कालीन अपर जिलाधिकारी ¼वित्त एवं राजस्व½ सुरेंद्र नारायण पाण्डेय ने अपनी जांच रिपोर्ट में भी टिबड़ी के पास अतिक्रमण की पुष्टि की। पाण्डेय ने अपनी रिपोर्ट में टिबड़ी स्थित नगर पालिका की करीब ४० बी?kk जमीन पर कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों द्वारा अतिक्रमण के बारे में उल्लेख किया था। रिपोर्ट में इस भूमि पर तरुण हिमालय नामक एक संस्था द्वारा अवैध कब्जा कर मकान बनाने का जिक्र भी किया था। बताया जाता है कि तरुण हिमालय संस्था राज्य के पूर्व मंत्री एवं उक्रांद नेता दिवाकर भट्ट की है। अपर जिलाधिकारी ¼वित्त एवं राजस्व½ की रिपोर्ट के मुताबिक तरुण हिमालय ने रामलीला कराने के लिए ३]४४]४२० वर्ग फुट भूमि लीज पर मांगी थी। जिसे शासन ने देने से मना कर दिया था। इसके बावजूद संस्था ने उक्त भूमि पर कब्जा किए रखा। इस बात से स्पष्ट होता है कि हरिद्वार में सरकारी भूमि जो कुंभ और अर्द्धकुंभ के लिए आरक्षित है] पर राजनीतिक लोगों ने भी कब्जा कर रखा है। पाण्डेय ने अपनी रिपार्ट में इस भूमि को भविष्य की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण समझते हुए  कब्जा हटाना जरूरी बताया था।

 

पिछले महाकुंभ का मेलाधिकारी आनंद बर्द्धन को बनाया गया था। हरिद्वार के जिलाधिकारी रहते उन्होंने टिबड़ी क्षेत्र से नगर पालिका को अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। जब वे मेलाधिकारी बनाए गए तो तैयारियों के दौरान उन्हें कई अन्य जगहों पर मेला भूमि पर अतिक्रमण का पता चला। जिनमें एक भगत सिंह चौक से हरिद्वार की ओर जाने वाली सड़क के बायीं ओर की भूमि थी। यह भूमि भी नगर पालिका की ही है। इस जमीन पर भी पक्के मकान बनाकर और ईंट की ऊंची दीवारों से द्घेरकर भूमि पर कब्जा कर लिया गया था। मई २००९ में मेलाधिकारी आनंदबर्द्धन ने तत्कालीन जिलाधिकारी को उक्त भूमि से अतिक्रमण हटाने का आग्रह किया। जिलाधिकारी को लिखे पत्र में उन्होंने कहा] ^भगत सिंह चौक से हरिद्वार की ओर जाने वाले मार्ग के बायीं ओर स्थित नगर पालिका हरिद्वार के स्वामित्व वाली भूमि का उपयोग कुंभ मेले के दौरान स्वास्थ्य विभाग के कैम्पों एवं यातायात पुलिस लाईन के लिए किया जाता है। निरीक्षण के दौरान देखा गया कि इस भूमि पर अवैध रूप से झोंपड़ी] ईंट के मकान एवं ईंट की दीवार बनाकर कब्जा कर लिया गया है। पूर्व में भी इस अवैध निर्माण को जिला प्रशासन ने हटवाया था। उक्त भूमि  पर पुनः अतिक्रमण हो गया है।^ जिलाधिकारी रहते आनंदबर्द्धन ने ही इस भूमि से अवैध कब्जा हटवाया था। लेकिन कुछ माह बाद ही जब वह मेलाधिकारी बने तब यहां उन्हें फिर से अतिक्रमण मिल गया। इस तरह बार&बार अवैध कब्जा हटाए जाने के बाद भी उक्त भूमि पर पुनः अतिक्रमण होना कई सवाल खड़े करता है। आखिर बार&बार किसकी शह पर अतिक्रमण होता gS

 

ये सभी अतिक्रमण वर्षों पहले से हुए हैं। महाकुंभ २०१० का आयोजन इन्हीं अतिक्रमण के बीच ही संपन्न हुआ। तब अतिक्रमण की वजह से महाकुंभ में हुई अव्यवस्थाओं पर ^दि संडे पोस्ट^ ने कई खबरें प्रकाशित की थीं। महाकुंभ में देश&दुनिया के लाखों&करोड़ों श्रद्धालु आए थे। यातायात पुलिस की व्यवस्था सही नहीं होने के कारण कुंभ के अंतिम दिन भगदड़ मची। इसमें कई लोगों की मौतें हुईं। श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था भी सही नहीं थी। डॉक्टरों एवं पुलिस को यहां तैनात तो कर दिया गया] लेकिन उनके ठहरने और अन्य इंतजाम सरकार नहीं कर पाई। जिस कारण एक&एक कमरे में दो दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मी रहने को विवश थे। यह सब इस कारण हुआ क्योंकि इनके लिए उपलब्ध भूमि पर लोगों ने अवैध कब्जे कर लिये हैं। अगले साल अर्द्धकुंभ की तैयारियां भी उसी प्रकार चल रही है। मेला प्रशासन के पास इंतजाम के लिए खाली जमीन नहीं है। कुंभ के लिए आरक्षित सरकारी भूमि पर से वर्षों बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है। पिछले महीने आरटीआई के एक जवाब में मेला प्रशासन ने माना है कि नगर निगम और बीएचईएल की कई हैक्टेयर भूमि पर अभी भी कब्जा बरकरार है। उदासीनता की हद यह कि मार्च २०१३ के बाद मेलाधिकारी ने अतिक्रमण के संबंध में नगर निगम एवं अन्य संबंधित विभागों को कोई निर्देश तक नहीं दिए हैं।

 

बात अपनी&अपनी

यह जमीन हमारे कब्जे में १९७० से है। तब से हम यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम करते आ रहे हैं। हर साल यहां होने वाली रामलीला का mn~?kkVu जिलाधिकारी करते हैं। १९८८ और १९९२ में सर्वसम्मति से नगर पालिका ने प्रस्ताव पास किया था। जिसमें कहा गया कि जमीन संस्था को ५ रुपया फुट के हिसाब से दे दी जाए। इसमें दो मुकदमे खारिज हो चुके हैं। फिलहाल मामला कोर्ट में विचारा/khन है। सन्‌ १९७० से २०१० तक नगर पालिका को पता ही नहीं चला कि यह जमीन उनकी नहीं बीएचईएल ¼भेल½ की है।

दिवाकर भट्ट] पूर्व मंत्री उत्तराखण्ड

 मेला प्रशासन हम से जो भी मदद मांगेगा हम देंगे। अतिक्रमण हटाने के लिए हरसंभव सहायता की जायेगी। मेला अधिकारी से इस बारे में हमारी बात भी हुई। 

एचसी सेमवाल] जिलाधिकारी हरिद्वार

हम मई&जून में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाएंगे। यह अभियान कुंभ मेला क्षेत्र की अवैध रूप से कब्जाई गई जमीनों पर चलाया जाएगा। फिलहाल हमने ऋषिकेश में भी ऐसे ही अतिक्रमणों को ध्वस्त किया है। वीएचईएल ¼भेल½ में काफी जमीनों पर अतिक्रमण की बातें सामने आ रही हैं।

गणेश मर्तोलिया] मेला अधिकारी अर्द्धकुंभ

अर्द्धकुंभ मेला स्थल पर अतिक्रमण के मामले में हमने प्रशासन से कई बैठकें की हैं। प्रशासन ने कहा है कि वह जल्दी ही मेला स्थल को अतिक्रमण मुक्त करेंगे।

मनोज गर्ग] मेयर हरिद्वार

लगता है कि सरकार कुंभ मेले के प्रति गंभीर नहीं है। प्रदेश में हर सरकार के कार्यकाल में मेला भूमि पर अतिक्रमण हुआ है। किसी ने इसे रोकने का प्रयास नहीं किया। हरिद्वार में पहले ही भूमि कम है। जो है] उस पर कब्जा हो गया है। यह राजनीतिक संरक्षण के बिना संभव नहीं है।

स्वामी शिवानंद महाराज] संस्थापक मातृ सदन

यदि प्रशासन मेला भूमि से अतिक्रमण नहीं हटाता है तो हम न्यायालय जाएंगे। प्रशासन और सरकार को कुंभ के लिए गंभीर होना पड़ेगा।

जेपी बडोनी] सामाजिक कार्यकर्ता 


 
         
 
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