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vad 37 05-03-2017
 
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स्कैंडल
 
टॉक ऑफ द टाउन बॉबी

 

  • आसिफ सुलेमान खान

 

 

राजनीति में महिला प्रेम प्रसंग हों या फिर ?kj से बाहर निकल कर बनाए जाने वाले अनैतिक संबंध इनका इतिहास काफी पुराना रहा है। इन मामलों में अक्सर दोनों तरफ से कुछ आशाएं और अपेक्षाएं होती हैं। कई बार ऐसे संबंध राजनेता और महिला के गले का फांस तक बन जाती हैं। लेकिन यह भी सच्चाई है कि इनमें से ज्यादातर राजनीतिक गलियारों के रसूखदार पुरुष अपनी पहुंच और प्रशासनिक तिकड़मों के बल पर इन मामलों से बाहर निकलने में कामयाब हो जाते हैं। इस तरह के मामले तब सुर्खियों में आते हैं जब कभी ऐसे संबंधों में रही महिला का जीवन नर्क से भी बदतर बन जाता है या उसकी जिंदगी का ही रहस्यमयी तरीके से दुखद अंत हो जाता है। 

 

ऐसा ही एक मामला बिहार की राजधानी पटना में तीन दशक पहले सामने आया था। जिसने उस समय पटनावासियों को हतप्रभ कर दिया था और बिहार की राजनीति को हिला कर रख दिया था। ^बॉबी सेक्स स्कैंडल^ के नाम से चर्चित इस मामले में भी एक महिला के जीवन का निर्मम और विवादस्पद अंत ही हुआ था। यह प्रकरण अस्सी के दशक की सबसे विवादित ?kVuk थी। जो महिला इस ?kVuk के केंद्र में थी उसका पुरा नाम श्वेतनिशा त्रिवेदी उर्फ बॉबी था। ^बॉबी^ बिहार सरकार की एक मामूली सी कर्मचारी थी। वह बिहार की राजधानी पटना में स्थित सचिवालय में नौकरी करती थी। सचिवालय में उसका काम एक टेलीफोन ऑपरेटर का था। यह एक बहुत मामूली नौकरी थी। हालांकि बताया जाता है कि उसकी नौकरी विशेष रूप से पद सृजित कर लगवाई गई। लेकिन इसके बावजूद बॉबी पटना शहर में इतनी मशहूर थी कि इसका अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि वह बिहार के राजनीतिक गलियारों में ^टॉक ऑफ द टाउन^ हुआ करती थी।

 

बॉबी का निजी जीवन काफी बेहतर नहीं था। उसकी पहली शादी विफल रही थी जिसके बाद उसने दूसरी शादी की थी। हालांकि बॉबी  काफी सुदंर और आकर्षक महिला थी। सचिवालय में अपनी खूबसूरती और बिंदास व्यक्तित्व को लेकर चर्चित थी। जिसका नतीजा यह हुआ कि उसकी चर्चा सचिवालय की चहारदीवारी से बाहर निकल कर सत्ता के गलियारों तक पहुंच गई थी। बॉबी काफी महत्वाकांक्षी महिला थी। सुंदरता] खुले स्वाभाव और उसकी महत्वाकांक्षा के कारण उसकी राज्य के कई बड़े नेताओं और अधिकारियों से अच्छी जान&पहचान हो गई थी। उनके साथ उठना बैठना और ?kweuk फिरना भी उसने शुरू कर दिया था। इनमें से कुछ के साथ उसके काफी द्घनिष्ठ संबंध बन गए थे। उसमें से कई नेताओं के साथ उसके अनैतिक संबंधों के भी काफी चर्चे होते थे। इन्हीं सब चर्चाओं के बीच १९८३ में बॉबी की अचानक से रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। उसकी लाश को आनन&फानन में ही दफना दिया गया था। पटना में खलबली मच गई। काफी जोर&शोर से इस ?kVuk की चर्चा पटना के गली&चौराहों पर हो रही थी। ?kVuk के बारह दिन बाद पटना के तत्कालीन एसपी किशोर कुणाल ने कब्र खोदकर बॉबी की लाश निकलवाई और उसका पोस्टमार्टम कराया। अभी पटना पुलिस की जांच चल ही रही थी कि बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र ने इस केस की जांच सीबीआई को सौंप दी। पर कभी भी यह साफ नहीं हो सका कि असल में बॉबी की मौत के पीछे किन लोगों का हाथ था। इस प्रकरण में सबसे मुख्य रूप से बिहार के दिवंगत नेता और तत्कालीन बिहार विधानसभा अध्यक्ष राधा नंदन झा के बेटे के साथ ही तत्कालीन जगन्नाथ मिश्र सरकार के कई मंत्रियों का भी नाम आ रहा था। यही नहीं इस मामले में बिहार के कई युवा कांग्रेसी नेताओं का नाम दोषी के तौर पर दबी जुबान में लिया जा रहा था। दरअसल इसके पीछे की सच्चाई और भी हैरान करने वाली है। कहा यह भी जाता है कि बॉबी से उस समय के कई नेताओं और उनके रिश्तेदारों का अवैध संबंध था। इस प्रकरण का एक पहलू यह भी है कि बॉबी का कई नेताओं ने यौन शोषण किया था। कुछ पुराने समाचार पत्रों की रिपोर्टों की मानें तो बॉबी एक खूबसूरत और बिंदास स्वाभाव की महिला थी। इसी कारण वह बड़े नेताओं तक पहुंच सकने में कामयाब हुई थी। लेकिन उसकी ऊंची पहुंच और ?keaM ने उसे खत्म कर दिया। बेहद महत्वाकांक्षी होने के कारण बॉबी ने बहुत अधिक ही इच्छाएं पाल रखी थीं। वह अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए राजनीतिक लोगों को ब्लैकमेल करने का शॉर्टकट रास्ता अपनाया करती थी जिसका नतीजा आगे चलकर यह हुआ कि उसने कई नेताओं से बैर पाल लिया जो उसकी हत्या का मुख्य कारण बना।

 

यह केस इतना संवेदनशील था कि अगर इस हत्याकांड के पीछे के चेहरों का पता चल  जाता तो यह संभव था कि वह कई रसूखदारों को ले डूबता। पटना के तत्कालीन एसपी किशोर कुणाल आज भी मानते हैं कि उन्होंने और पुलिस ने इस मामले को फुलप्रूफ बनाया था] लेकिन सीबीआई ने उसे ताकिर्क अंत तक नहीं पहुंचाया। इसका नतीजा यह हुआ कि इस मामले से आज तक पर्दा नहीं हट पाया। उनका यह भी मानना है कि श्वेत निशा त्रिवेदी उर्फ बॉबी की हत्या के बाद जांच में कोई कमी पुलिस की तरफ से नहीं की गई थी। माना जाता है कि कांग्रेस नेताओं के दबाव के चलते सीबीआई ने यह मामला दबा दिया था।

 

हमारा समाज पुरुष की गलती को तो नजरअंदाज कर सकता है] लेकिन महिलाओं की नहीं। बॉबी सेक्स स्कैंडल के बाद अब भी  अक्सर ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं] चाहे वह यूपी का मधुमिता शुक्ला हत्याकांड हो] राजस्थान का भंवरी देवी] हरियाणा का चंद्रमोहन फिजा प्रकरण हो या गीतिका शर्मा की आत्महत्या हो। इस तरह के कई उदाहरण भरे पड़े हैं। इन सभी मामलों में केवल नुकसान महिलाओं का ही हुआ है।

 
         
 
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  • दिनेश पंत

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