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vad 37 05-03-2017
 
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प्रदेश 
 
कावेरी से यमुना तक

देश में दक्षिण से लेकर उत्तर तक जो जल विवाद चल रहे हैं उनका सद्भावपूर्ण हल निकलता है तो यह अच्छी बात है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत इसके लिए माहौल बनाने में सफल होते हैं तो सबसे बड़ा फायदा उनके अपने राज्य उत्तराखण्ड को मिलेगा


दक्षिण भारत में कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर १९वीं शताब्दी से शुरू हुआ विवाद आज तक सुलझ नहीं पाया है। ब्रिटिशकाल के दौरान यह विवाद तत्कालीन मद्रास प्रेसिडेंसी और मैसूर राज्य के बीच था। हालांकि १९२४ में इन दोनों के बीच एक समझौता हो गया था। लेकिन बाद में इसमें केरल और पांडिचेरी के शािमल होने से यह विवाद और गहराता गया। अगस्त १९७६ में केंद्र सरकार ने इसके समाधान के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई और इसमें शामिल तीन राज्यों कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और  एक संद्घ शासित प्रदेश पांडिचेरी के बीच एक समझौता हुआ। इस समझौते के बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ। तमिलनाडु के किसानों की याचिका की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को न्यायाधिकरण गठित करने के निर्देश दिए। २ जून १९९० को न्यायाधिकरण अस्तित्व में आया, लेकिन अब तक विवाद के समाधान की कोशिशें सफल नहीं हो सकी हैं।

            इस संबंध में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत के हाल के बयान से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार इस विवाद का हल आपसी बातचीत और सौहार्दपूर्ण तरीके से ही निकालना चाहती है। रावत के मुताबिक सरकार विवाद का दीर्द्घकालीन हल निकालने की कोशिश करेगी। कावेरी जल बंटवारे को लेकर अतीत में दक्षिणी राज्यों के काफी कटुताएं पैदा हुई हैं। नब्बे के दशक में वहां इस मसले पर भावनाओं को भड़काने से लेकर उग्र प्रदर्शन भी हुए। 'तमिलनाडु तमिलों का' जैसे क्षेत्रीय नारे सुनने को मिले। कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच खासकर यह विवाद काफी गहरा रहा है। निकट भविष्य में स्थिति बिगड़ सकती है इसलिए जल संसाधन मंत्री की सही समय पर की गई पहल निश्चित ही स्वागतयोग्य है। इससे न केवल दक्षिणी राज्यों बल्कि देश के दूसरे भागों में भी नदी जल बंटवारे के लिए चल रहे विवादों के समाधान का माहौल बनेगा। गौरतलब है कि यमुना जल बंटवारे को लेकर हरियाणा और दिल्ली के बीच अक्सर तानातनी होती रहती है। गर्मियों के मौसम में यदि हरियाणा ताजेवाला से दिल्ली स्थित हैदरपुर प्लांट के लिए पर्याप्त पानी नहीं छोड़ता है तो दिल्ली में जनता त्राहि-त्राहि करने लगेगी। 

            विवादों के निपटारे में सौहार्दपूर्ण माहौल के चलते जलसंसाधन मंत्री रावत जिस नवोदित उत्तराखण्ड प्रदेश से हैं वहां के लोगों को भी उम्मीदें जगेंगी कि अब उत्तर प्रदेश से उनकी परिसंपत्तियों का बंटवारा आसानी से हो सकेगा। राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत गंगा बेसिन और टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन (टीएचडीसी) में उत्तर प्रदेश का हिस्सा सुरक्षित रखा गया है। टीएचडीसी में ७६ प्रतिशत हिस्सेदारी केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय और २५ प्रतिशत उत्तर प्रदेश की है। इस मसले पर उत्तराखण्ड सरकार सुप्रीम कोर्ट गई है। उत्तराखण्ड सरकार मानती है कि बांध परियोजनाओं के निर्माण से उत्तराखण्ड राज्य की जलसंपदा, वन, कृषि, भूमि और जनता प्रभावित हुई है। लिहाजा परियोजना में राज्य के हक-हकूक को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके लिए वह टिहरी परियोजना के निर्माण में उत्तर प्रदेश सरकार का लगा करीब ८९० करोड़ रुपया वापस लौटाने के पक्ष में है।

            इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की अभी इंतजार करना पड़ेगा। फिलहाल उत्तराखण्ड की जनता को अपेक्षाएं हैं कि सर्वोच्च न्यायालय उनकी भावनाओं के अनुरूप दिशा निर्देश जारी कर सकता है। जहां तक उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे का प्रश्न है तो अकेले उत्तर प्रदेश वन निगम से उत्तराखण्ड को १४०० करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। हरिद्वार स्थित अलकनंदा होटल पर अपना अधिकार पाने के लिए उत्तराखण्ड राज्य सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी कर रहा है। हरिद्वार में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अंतर्गत राज्य की काफी संपत्तियां हैं। 

कृषि पावर कारपोरेशन बहुउद्देश्यीय विकास निगम, गन्ना एवं चीनी, खाद्य, सहकारिता, वित्त, परिवहन, सिंचाई, ग्राम्य विकास जैसे तमाम विभागों में परिसंपत्तियों का बंटवारा होना है। उत्तराखण्ड सरकार आपसी बातचीत से सद्भावनापूर्ण माहौल में बंटवारा चाहती है, लेकिन जहां सहमति नहीं बनती वहां न्यायालय में जाने से भी नहीं चूकेगी। उम्मीद है कि नदी जल बंटवारे को लेकर कंद्रीय जलसंसाधन मंत्री हरीश रावत ने सद्भावपूर्ण माहौल में हल निकालने की जो पहल शुरू की है उसका लाभ उत्तराखण्ड को भी मिलेगा। दक्षिण में कावेरी से लेकर उत्तर में यमुना तक जो भी विवाद चल रहे हैं उनका निपटारा आपसी बातचीत और सद्भावनापूर्ण माहौल से हो जाए तो इससे अच्छी बात भला और क्या हो सकती है। अगर रावत के प्रयास से सद्भावनापूर्ण माहौल में समस्याओं का समाधान होने की परंपरा शुरू हो जाती है तो इससे उत्तराखण्डवासियों को फख्र होगा कि उनके राज्य की बौद्धिक संपदा का उपयोग राष्ट्रहित में हो रहा है। उल्लेखनीय है कि एक समय उत्तराखण्ड की बौद्धिक संपदा के प्रतीक पंडित गोविंद बल्लभ पंत केंद्र में पंडित नेहरू के सलाहकार माने जाते थे। अगर रावत स्वर्गीय पंत की परंपरा का अनुसरण करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं तो निश्चित ही इसका उनके राज्य के लोग तहेदिल से स्वागत करेंगे।

 

सिर्फ घोषणाओं का शिलान्यास

मुख्यमंत्री के जनपदीय दौरे में खूब द्घोषणाएं हो रही हैं। शिलापट पर शिलान्यास भी हो रहा है। लेकिन इन सबके बीच स्थानीय समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। मुख्यमंत्री इन समस्याओं को दूर करने का आश्वासन देने से भी बच रहे हैं

पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने पिथौरागढ़ दौरे पर करोड़ों रुपयों की विकास योजनाओं के लोकापर्ण के साथ, कई द्घोषणाएं भी की। इससे जनपद के कांगे्रसियों में उल्लास देखा गया तो जनपद के भाजपाइयों ने उन पर जनता की बड़ी मांगों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया। मुख्यमंत्री के इस एक दिवसीय दौरे के बाद कांगे्रस भाजपा में तू-तू मैं-मैं हो रही है। जनपद के कांगे्रसी जहां अपनी पीठ खुद थपथपा रहे हैं तो वहीं बीजेपी नेता कांगे्रस को कटद्घरे में खड़ा करने से नहीं चूक रहे है। 

            पिथौरागढ़ और गंगोलीहाट दौरे में मुख्यमंत्री ने कई योजनाओं का शिलान्यास और द्घोषणाएं कीं पर क्षेत्र की महत्वपूर्ण और बुनियादी आवश्यकताओं को नजरअंदाज कर दिया। इससे क्षेत्र के लोगों में मुख्यमंत्री के प्रति नाराजगी है और विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर बहुगुणा का पिथौरागढ़ दौरा फ्लॉप बता रहे हैं। पेयजल, स्वास्थ्य जैसी  कई योजनाएं वर्षों से बजट के अभाव में अधूरे हैं जिसे मुख्यमंत्री ने संज्ञान तक में नहीं लिया।

            २ ़७९ करोड़ की धनराशि अवमुक्त न होने के चलते गंगोलीहाट के लिए बनने वाली लिफ्ट पेयजल योजना लंबे समय से अधर में लटकी है। मुख्यमंत्री ने इस पर आश्वासन तक नहीं दिया। गंगोलीहाटवासियों को उम्मीद थी कि इस योजना के लिए पैसा अवमुक्त करने की द्घोषणा मुख्यमंत्री अवश्य करेंगे। वहीं जिला मुख्यालय स्थित गौरंगद्घाटी में बन रहे बेस अस्पताल के रुके निर्माण कार्य शुरू करने के संबंध में जिला पंचायत उपाध्यक्ष बीरेन्द्र बोरा के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। लेकिन उन्हें कोई खास आश्वासन न मिलने से क्षेत्रीय जनता मायूस है। विकास खंड गंगोलीहाट में गैस गोदाम, खाद्य गोदाम, ग्वासीकोट-बेलपट्टी पंपिंग योजना, अग्रोन आंवलाद्घाट सड़क, कुनल्ता-पोखरी मोटर मार्ग जैसी क्षेत्रीय जनता की महत्वपूर्ण मांगों पर कोई अमल नहीं हो पाया। बेरीनाग के लोग लंबे समय से नगर पंचायत का गठन करने के साथ ही भूमि का मालिकाना हक देने की मांग करते आए हैं। इस बार उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री इस मसले पर जनता को कोई आश्वासन देंगे, लेकिन उनकी यह मांग भी पूरी नहीं हो पाई। गंगोलीहाट महाविद्यालय को पीजी कालेज बनाने की मांग पूरी न हो पाने की नाराजगी जाहिर करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मुख्यमंत्री का पुतला- फूंक डाला। 

            अपने एक दिवसीय दौरे पर सीएम बहुगुणा ने पिथौरागढ़ महाविद्यालय में एमए गृह विज्ञान एवं विधि संकाय स्थापित करने और जनपद के डीडीहाट में पेयजल की समस्या के समाधन हेतु चर्मागाड़ से योजना तैयार करने का आश्वासन भी डीडीहाटवासियों को दिया। टनकपुर-जौलजीवी मोटरमार्ग का निर्माण कार्य शीद्घ्र पूरा करने के लिए विशेष टीम का गठन कर सर्वेक्षण करने की बात भी कही गई। सीमांत प्रौद्योगिकी संस्थान के छात्रों का शिक्षण शुल्क दस हजार रुपए कम करने की द्घोषणा भी सीएम ने की। बेरीनाग में पॉलीटेक्निक कालेज का निर्माण करने के साथ ही गंगोलीहाट एवं डीडीहाट को पिछड़ा क्षेत्र विकास निधि से विकास के लिए ९० लाख रुपया सालाना देने का वचन भी मुख्यमंत्री ने दिया।  

            गंगोलीहाट में मुख्यमंत्री द्वारा गणाई गंगोली को तहसील का दर्जा देने, पांखू में आईटीआई, राजकीय इंटर कालेज गंगोलीहाट, आईटीआई गंगोलीहाट, राजकीय इंटर कालेज पांखू दशाई थल और पॉलीटेक्निक भवन गणाई गंगोली में भवन निर्माण के लिए धन स्वीकृत की द्घोषणा की गई। इस तरह मुख्यमंत्री ने विकासखंड गंगोलीहाट में विकास योजनाओं के लिए ७ करोड़ ४८ लाख ४८ हजार रुपए की योजनाओं का लोकार्पण किया। जिसमें राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चिटगल के अतिरिक्त कक्ष के लिए ६६.७०लाख, राजकीय उच्चतर माध्यामिक विद्यालय भूली गांव में ६५.४० लाख, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नायल के लिए ६८.१५ लाख, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टिम्टा के लिए ६६.१५ लाख, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पव्वाधर के लिए ६८.९० लाख, बनकोट-बसखोली मोटर मार्ग के लिए ५४.८० लाख, बासीखेत-पोखरी, भिनगड़ी मोटर मार्ग के लिए २७९.०० लाख और राजकीय इंटर कालेज सेराद्घाट के भवन के पुनर्निर्माण के लिए ७८.९८ लाख की द्घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने यहां नगर पंचायत कार्यालय का लोकार्पण भी किया। 

 भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भाजपा शासन काल में स्वीकृत योजनाओं का शिलान्यास व द्घोषणाएं कर झूठी वाह-वाही बटोर रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि डीडीहाट व गर्खा पेयजल योजनाएं भाजपा शासन काल में स्वीकृत हुई थीं, जिसकी द्घोषणाएं कांगे्रसी मुख्यमंत्री कर रहे हैं। वहीं कांगे्रस जिलाध्यक्ष महेन्द्र सिंह लुंठी कहते हैं, 'मुख्यमंत्री ने अल्प समय में ही कई विकास योजनाओं को अंतिम रूप दिया है। अपने कार्यकाल में तीन बार मुख्यमंत्री जनपद में पहुंच चुके हैं। लंबे समय से जिस हवाई पट्टी का विस्तारीकरण नहीं हो पाया था उसका विस्तारीकरण कर शिलान्यास भी किया गया है। जनपद में करोड़ों रुपयों की लागत से पेयजल योजना स्वीकूत की है। आने वाले समय में कई और योजनाओं का शिलान्यास भी मुख्यमंत्री द्वारा किया जाना है।' स्थानीय निवासी दिनेश राणा कहते हैं, नेता कोरी बयानबाजी तक सीमित हैं। इनकी विकास पर दिलचस्पी कम, अपने हितों के पोषण पर अधिक नजर है। जनता हमेशा से मूर्ख बनती रही है, आगे भी बनती रहेगी।

 
         
 
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  • गुंजन कुमार

इस बार का विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच केंद्रित रहा। मोदी ने जहां चार रैलियां की वहीं रावत

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