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vad 2 02-07-2017
 
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खास खबर 
 
गले की हड्डी बनी विधायक निधि

 

भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हरिद्वार के विधायक मदन कौशिक अपनी निधि का जमकर दुरुपयोग करते आए हैं। हरिद्वार में उन्होंने जगह-जगह पुस्तकालय भवनों के निर्माण के नाम पर लाखों रुपए का फर्जीवाड़ा किया। लोकायुक्त ने इसकी जांच कर शासन को कार्रवाई करने की संस्तुति कर दी है

 

भाजपा के दबंग नेताओं में गिने जाने वाले पूर्व मंत्री मदन कौशिक अपना वोट बैंक मजबूत करने की नीयत से विधायक निधि का जमकर दुरुपयोग करते रहे हैं। उन्होंने इसके लिए एक नायाब तरीका खोजा है। निजी धर्मशालाओं तथा मंदिरों को बारात द्घर और सार्वजनिक पुस्तकालय दर्शा कर उनमें लाखों की विधायक निधि खर्च की गई है। कौशिक के इस फर्जीवाड़े को लेकर स्थानीय नगर पालिका के पूर्व सभासद दिनेश जोशी ने लोकायुक्त के यहां शिकायत दर्ज कराई है। जिस पर लोकायुक्त ने जांच की और ज्यादातर शिकायतों को सही पाया। साथ ही लोकायुक्त ने प्रशासन से कार्रवाई की भी संस्तुति की है।

           लोकायुक्त उत्तराखण्ड की ओर से की गई जांच में शिव लोक कॉलोनी वाटर वर्क्स स्थित बाल्मीकि मंदिर के पास विधायक निधि से निर्मित पुस्तकालय जिसकी लागत १ ़९९ लाख रुपये थी, जांच के दौरान मौके पर इस कक्ष में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित पाया गया। यह कक्ष नगर पालिका की भूमि पर बिना स्वीकूति के बनाया गया था। जांच के दौरान पुस्तकालय क्रियाशील नहीं पाया गया। इसके अतिरिक्त टंकी नं ़६ भल्ला कॉलेज के पास निर्मित दिखाए गए पुस्तकालय के स्थान पर ७ ़७० मी ़ ग ५-३७ मी ़ आंतरिक आकार का कक्ष निर्मित पाया गया जबकि साइट प्लान में इसका साइज ८ ़२० ग ६ मी ़ दर्ज था। जांच टीम को यहां भी पुस्तकालय के स्थान पर आंगनबाड़ी केंद्र संचालित मिला। यह कक्ष भी नगर पालिका भूमि पर बिना अनापत्ति लिए ही निर्मित कराया गया था।

           राजीव नगर राही होटल के पास निर्मित दिखाए गए पुस्तकालय भवन के संबंध में जांच टीम ने देखा कि यहां बाल्मीकि मंदिर में विधायक निधि से मंदिर की दीवार पर लेंटर डलवाया गया है और पलस्तर, पत्थर इत्यादि लगवाते हुए चौक का फर्श और शौचालय, स्नानगृह बनवाया गया है। इस प्रकार इस कार्य में स्थानीय निवासियों ने भी ३ कुन्तल सरिया-तीन हजार ईंट, रेत, बजरी अपने पास से लगाई और पूर्व में निर्मित बाल्मीकि मंदिर में रखी बाल्मीकि जी की मूर्ति नये भवन में स्थापित कर दी। जांच के डर से निर्माण एजेंसी ने इस मंदिर पर पुस्तकालय भवन का पत्थर लगाने का प्रयास किया। इस पर स्थानीय निवासियों ने इसका विरोध किया। तब निर्माण एजेंसी के अभियंताओं ने भवन मिटाकर पत्थर पर पुस्तकालय लिखा रहने दिया। इस कार्य की निर्माण लागत २००७-०८ में २ ़५२ लाख तथा द्वितीय किस्त २००८-०९ में ८८ हजार रुपये दिखाई गई। यहां भी कोई पुस्तकालय भवन मौके पर नहीं पाया गया। शिक्षा एवं शहरी विकास मंत्री की कुर्सी पर विराजमान रहे हरिद्वार के विधायक मदन कौशिक ने भ्रष्टाचार की सारी हदों को पार करते हुए पुस्तकालय भवन के नाम पर मंदिर निर्माण में जमकर विधायक निधि का दुरुपयोग किया। 

           इसी प्रकार गुद्घाल रोड, पाण्डे वाला ज्वालापुर में शिव पार्क के भीतर निर्मित पुस्तकालय भवन २००४ में निर्मित शिव मंदिर परिसर में पूर्व से निर्मित हॉल में दिखाया गया है। यहां भी अन्य स्थानों की भांति कोई पुस्तकालय भवन क्रियाशील नहीं है। इसी प्रकार राजीव नगर, आर्यनगर ज्वालापुर में पुस्तकालय भवन तो बना परंतु मौके पर यह कक्ष पुस्तकालय भवन के रूप में क्रियाशील नहीं पाया गया। लेकिन लाल मंदिर कॉलोनी स्थित सरकारी भूमि पर बिना एनओसी प्राप्त किए पांच लाख की लागत से बनाए जा रहे पुस्तकालय कक्ष के स्थान पर निर्मित बाउंड्री वाल को उच्च न्यायालय के आदेशों से धवस्त कर दिया गया। इसी के साथ आर्यनगर ज्वालापुर में शिव मंदिर के पास ५ लाख १८ हजार  की लागत से निर्मित पुस्तकालय भवन के स्थान पर शिव मंदिर के प्रथम तल पर एक कक्ष निर्मित पाया गया। यह कक्ष मंदिर के भीतर बना है। जबकि अभिलेखों में इस भवन को शिव मंदिर के पास दिखाया गया है। यहां कोई पुस्तकालय क्रियाशील नहीं पाया गया। ऐसा ही कुछ फर्जीवाड़ा दयानंद नगरी में विरेन्द्र गिरी के सामने मंदिर के पास निर्मित पुस्तकालय भवन निर्माण में भी सामने आया। यहां तो मंदिर परिसर में तीन ओर से दीवारें, मंदिर की छत तक लेंटर डालकर, भवन के अंदर शिवलिंग रख दिया गया। मतलब साफ है कि यहां भी मदन कौशिक की विधायक निधि ४ लाख की लागत से पुस्तकालय भवन के स्थान पर मंदिर निर्मित कराया गया।

           मंदिरों पर पुस्तकालय भवन निर्माण के नाम से लाखों रुपये की विधायक निधि खर्च कर मदन कौशिक अपने समर्थकों को खुश करने में लगे रहे। विधायक यहीं नहीं रुके। पूर्वी नाथ नगर ज्वालापुर में भी उन्होंने ५ ़५० लाख की लागत से २००९-१० में पूर्व से निर्मित मंदिर के लिए एक कक्ष कर निर्माण कराया। इस कक्ष की देखभाल का जिम्मा भी शीतलामाता जनकल्याण समिति के कोषाध्यक्ष भगत सिंह मोधा को सौंप दिया। जांच के दौरान जांच टीम को मोैके पर कोई पुस्तकालय मिला। इन सभी पुस्तकालय भवनों के निर्माण के संबंध में कुछ एक समान बातें सामने आई हैं। जैसे सभी पुस्तकालय थोड़ी-थोड़ी दूरी पर मंदिरों के प्रागंण में ही बने हुए थे। सभी हाल या कक्ष का निर्माण मदन कौशिक की संस्तुति पर विधायक निधि से कराया गया। हरिद्वारवासी विभिन्न प्रकार की समस्याओं से त्रस्त हैं। पेयजल, बिजली, सड़क आदि बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं होने के बावजूद विधायक अपनी निधि का दुरुपयोग कर अपने वोट बैंक को खुश करने में लगे रहे। इस तथ्य को लोकायुक्त उत्तराखण्ड द्वारा की गई जांच में भी दर्ज किया गया है। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि विधायक निधि के अंतर्गत स्वीकूत पुस्तकालय भवनों का अधिकांश निर्माण मंदिर परिसरों में कराया गया है। लोकायुक्त ने सरकारी धन सहित सरकारी भूमि पर बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के किए गए अवैध निर्माण को गंभीरता से लिया है। लोकायुक्त के अन्वेषण अधिकारी मान सिंह रावत ने निर्माण एजेंसी ग्रामीण अभियंत्रण सेवा हरिद्वार में तैनात अपर सहायक अभियंता अरविंद मोहन गर्ग के विरुद्ध धारा ४०९ आईपीसी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की संस्तुति की है। 

           पुस्तकालय भवनों के नाम पर सरकारी भूमि पर बने मंदिरों का निर्माण अपनी विकास निधि से करने वाले हरिद्वार के विधायक ने इसके अतिरिक्त निजी विद्यालय में कक्ष निर्माण के नाम पर उत्तराखण्ड पब्लिक स्कूल मौ ़ धीरवाली ज्वालापुर के प्रधानाचार्य को अपने विकास निधि से १ ़०० लाख रुपया जारी कराया। सरकारी धन को मनमर्जी लुटाते हुए तमाम कायदे-कानूनों की वह धज्जियां उड़ाते रहें। डॉ ़सरला आचार्य मनीषी जन कल्याण संस्थान हरिद्वार की प्रधानाचार्य के नाम भी १ ़०० लाख विधायक निधि से जारी किया गया। यह रुपए कक्ष निर्माण के लिए जारी कराए गए।

           विधायक निधि के बल पर अपना वोट बैंक बनाने में लगे हरिद्वार के विधायक ने तमाम तरह के हथकंडे अपनाए। सरकारी धन को मनमर्जी खर्च किया। इसके तहत वर्ष २००७-०८ में ही ज्वालापुर के धोबी समाज के लिए बारात द्घर के निर्माण के नाम पर ८ ़०० लाख रुपये जारी किए गए। वहीं विधायक निधि दुरुपयोग के एक अन्य मामले में विश्वकर्मा पंचायती धर्मशाला के निकट श्यामनगर में सामुदायिक मिलन केन्द्र का निर्माण दिखाकर ७ ़०० लाख रुपये जारी कर दिए गए और मौके पर कोई सामुदायिक मिलन केन्द्र नहीं बना हुआ है। जहां एक ओर जनता सुविधाओं को तरसती है। वहीं विधायक अपने खास समर्थकों को खुश रखते हुए विधायक निधि को लुटाते रहे हैं। इन्होंने ज्ञान भारती जनकल्याण आश्रम के प्रबंधक को फर्नीचर खरीदने के लिए १ ़५० लाख विधायक निधि से जारी कराए। समर्थ सेवा समिति कनखल को स्कूल वाहन खरीदने के नाम पर ५ ़८० लाख रुपए जारी किए। मदन कौशिक के अब तक के कार्यकाल के दौरान एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिन्दु सामने आया है। वह यह कि विधायक निधि के अंतर्गत होने वाले तमाम निर्माण कार्य कार्यदायी संस्था आरईएस हरिद्वार से ही कराए गए। आरईएस में तैनात अधिकारियों ने मदन की मंशा के अनुरूप सरकारी धन को जहां उन्होंने चाहा वहां प्रयोग किया। लोकायुक्त उत्तराखण्ड की ओर से मुख्य सचिव उत्तराखण्ड को कार्रवाई को संस्तुति कर ३ माह में अवगत कराने को कहा गया है।

 

मदन कौशिक ने विधायक निधि का जमकर दुरुपयोग किया है। मेरी शिकायत पर हुई जांच में लोकायुक्त उत्तराखण्ड ने शिकायत को सही पाया है। मदन कौशिक की विधायक निधि में किए भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रखी जाएगी।

दिनेश जोशी पूर्व सभासद नगर पालिका हरिद्वार

 

मदन कौशिक ने विधायक निधि में धांधली के साथ-साथ सरकारी भूमि पर मंदिरों के निर्माण तक करा डाले हैं। जब मैंने सूचना मांगी तो मुझे जान से मारने की धमकी दी गई। इसकी शिकायत मैं सूचना आयोग में कर चुका हूं। 

अनिल वर्मा आरटीआई कार्यकर्ता

 

 

 
         
 
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