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संवाद
 
^अवसाद को उत्साह में बदला^

मुख्यमंत्री हरीश रावत का साल भर का शासनकाल काफी उतार&चढ़ाव वाला रहा। इस दौरान उन्हें कई मोर्चों पर विपक्ष के साथ&साथ अपनी ही पार्टी के अंदरूनी असंतोष से भी जूझना पड़ा। सरकार के साल भर के सफर पर हरीश रावत से ^दि संडे पोस्ट^ के संपादक अपूर्व जोशी की विशेष बातचीत

 

बिना चुगान के] बिना खनन के] बिना नदी की सफाई किए] आप न तो नदी की भलाई कर रहे हैं और न ही प्रदेश की। आप देखिए जमीनें कट रही हैं। नदियां उथली हो गई हैं। x/ksjs तक उथले हो गए हैं। गांव में जनजीवन खतरे में है। इसलिए हम हिम्मत करके कह रहे हैं कि हम चुगान करेंगे। लेकिन तरीका वैज्ञानिक होगा


हम राज्य को बहुत अच्छा लोकायुक्त देंगे। हम किसी की कॉपी नहीं करेंगे। किसी राजनीति से प्रेरित होकर इसे नहीं बनाएंगे] बल्कि राज्य की जनता के Øks/k को शांत करने के लिए उसके अनुकूल एक अच्छा कानून देंगे। उसका नाम आप लोकपाल] लोकायुक्त कुछ भी रख दीजिए


मैं यह बता दूं कि आपने जिनका नाम ¼प्रीतम सिंह] सुरेंद्र सिंह नेगी] किशोर उपाध्याय½ लिया उनमें किसी के साथ मेरी दूरी नहीं है। जिस कार्यक्रम के मेरे बयान को यदि किसी ने गलत तरीके से लिया तो वह सही नहीं है। जब पार्टी एक बड़े फलक का कार्यक्रम कर रही थी] तो उस कार्यक्रम को पीडीएफ की चर्चा बनाकर छोटा कर दिया गया। उस पर यदि मैंने कुछ बोला तो उसे गलत संदेश के रूप में नहीं लेना चाहिए



 इस समय मेरी प्राथमिकता यह है कि पर्यटन का जो ढांचा आपदा के बाद पूरी तरह चरमरा गया है] उसे फिर से कैसे मजबूत किया जाए। मैं उसे रीस्टोर करने में लगा हूं। मेरे लिए दूसरी सबसे बड़ी चुनौती पहाड़ी क्षेत्रों में खेती को बढ़ावा देना है ताकि वहां से पलायन रुक सके। खेती के बिना पलायन नहीं रोका जा सकता। उत्तराखण्ड की शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाना चाहता हूं] जिससे पहाड़ के बच्चों को रोजगार या नौकरी की तलाश में न भटकना पड़े। वे इतने सक्षम बनें कि संस्थान उन्हें खुद रोजगार के लिए बुलाएं


 

 

आपने एक साल का कार्यकाल पूरा कर लिया। इसे कैसे परिभाषित करेंगे

इस कार्यकाल में मेरे सामने कई चुनौतियां थीं। पहली चुनौती यह कि मैं राजनीति में स्थिरता लाऊं। दूसरी चुनौती आपदा के बाद यहां के लोगों का जो मनोबल टूटा या कहूं लोग जिस तरह मनोवैज्ञानिक अवसाद में थे उससे उबरने के लिए उनमें उत्साह जगाने की प्राथमिकता थी। राजनीति में पूरी स्थिरता ला पाया हूं या नहीं यह तो नहीं कह सकता लेकिन थोड़ा सा परिवर्तन जरूर हुआ है। इसमें जनता ने मेरा सहयोग दिया है। मुझे खुशी है और मैं इसे अपनी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि भी मानता हूं कि हम आपदा से दुखी प्रदेश की जनता के अवसाद को उत्साह में बदलने में कामयाब हुए हैं। अभी अपना प्रदेश फ्रंट फुट पर खेल रहा है। 

 

आपने राजनीतिक स्थिरता की बात कही। मोदी फैक्टर को सबसे पहले देश में रोकने का श्रेय आपको जाता है] इस पर आप कुछ कहेंगे

मोदी जी से हमारी कोई तुलना नहीं है। वह एक विशाल तंत्र के साथ काम कर रहे हैं। मैं एक छोटे स्तर पर एक कोने में काम कर रहा हूं। हां] यह जरूर है कि लोगों ने मुझे अवसर देना चाहा इसलिए उपचुनाव में तीनों सीटों पर हमारी जीत हुई। उत्तराखण्ड की जनता अभी राजनीतिक स्थिरता चाहती है] जो उसे मिल गई है। वह चाहती थी कि सत्ता की बागडोर उसके हाथ में रहे। पंचायत चुनाव में भी हमें सफलता मिली। कैंट चुनाव में जनता हमारे साथ थी। इससे साबित होता है कि जनता हमारे साथ जुड़ी रह सकती है] बशर्ते हम आगे बढ़ते रहें। हम काम करते जाएं।

 

लोगों की अपेक्षाएं आपसे बहुत ज्यादा हैं। आपने बहुत ?kks"k.kkएं कर दी हैं] क्या उन्हें अमलीजामा पहना पाएंगे

बिल्कुल पहना पाएंगे। मैंने कोई ?kks"k.kk बिना तैयारी या आकलन के नहीं की है। मुझे यह कहते हुए खुशी है कि मैंने अपनी कई ?kks"k.kkएं ¼सड़क जैसे छोटे&मोटे काम की बात नहीं कर रहा हूं। बड़ी] बहुआयामी] भविष्य में आमूलचूल परिवर्तन वाली ?kks"k.kkएं½ किसी न किसी रूप में जमीन पर उतार दी हैं। कोई आंशिक रूप से] कोई एक चौथाई] कोई आधी या कोई पूरी हो गई हैं। कुछ लोग कहते हैं मैंने चार हजार ?kks"k.kkएं की हैं] उसमें चालीस फीसदी का ही काम पूरा हुआ है। मैं कहूंगा मेरा यही चालीस फीसदी कार्य अन्य सरकारों के पांच साल के कार्यकाल पर भारी है। यह अपना&अपना देखने का नजरिया है। मैं आगे छह हजार तक भी ?kks"k.kkएं कर सकता हूं। कुछ ?kks"k.kkएं करते समय मुझे पता होता है कि उन्हें पूरा होने में बहुत समय लगेगा क्योंकि उनमें कई नीतिगत पेंच होते हैं। काम बहुत बड़े हैं। प्रक्रिया जटिल है। लेकिन उक्त ?kks"k.kkओं के बारे में लोगों को समझना होगा कि काम के लिए मैंने बटन दबा दिया है। कम से कम उन इलाकों में जहां के लोगों ने विकास देखा ही नहीं है। उन्हें भी तो इसे देखने का अधिकार है। डोडी&पाला का इलाका उत्तरकाशी में है। मैंने वहां के लिए ५&७ ?kks"k.kkएं कीं। मुझे पता है उन्हें पूरा होने में दो साल का वक्त लगेगा। उसमें समय की आवश्यकता है। उत्तरकाशी में ही एक गांव है] इसके ऊपर एक कूत्रिम झील बनने का डर है। उसे डैमेज करने में समय लगेगा। अब लोग बोलें कि मुख्यमंत्री ने उसकी ?kks"k.kk की है] वह छह माह में पूरा क्यों नहीं हुआ। अरे] ?kks"k.kk करते समय मुझे मालूम है कि उसमें कितना समय लगेगा। 

 

पृथक राज्य बनते समय गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग थी। आपने वहां शहर बनाने की शुरुआत कर दी है

हां] मैंने वहां शुरुआत कर दी है। देश भर में सक्षम लोगों को तलाश कर रहे हैं कि वे यहां आऐं। संभावनाओं को देखें और काम करें। मैं कोई स्मार्ट सिटी बसाने की बात नहीं कर रहा। एक कस्बा बसाना चाहते हैं जो जिला मुख्यालय के करीब हो। वहां शिक्षा] स्वास्थ्य की अच्छी व्यवस्था हो। जो पलायन देहरादून] हल्द्वानी की ओर हो रहा है] वह वहीं रुक जाए। इसके लिए मैंने नीति में परिवर्तन और उसे आकर्षक बनाने का काम किया है। जल विद्युत की अपनी नीति बनाई है। हमने अपनी फिल्म नीति भी बनाई है। पर्यटन को बढ़ावा देने का काम कर रहा हूं। वन विभाग को कहा है] आप ७० फीसदी पर बैठे हो। हमें कमा कर दो। हिमालय दर्शन योजना शुरू की है। काठमांडू आदि की बनिस्पत हमारे यहां से हिमालय दूर है। इसलिए हम पिथौरागढ़ और चिन्यालीसौड की हवाई पट्टी ठीक कर रहे हैं। यदि यह आंशिक रूप से भी शुरू हो जाती है तो भविष्य में कभी तो यह बड़ा आकार लेगी।

 

आप गैरसैंण में इतना कुछ कर रहे हैं] लेकिन उसे स्थाई राजधानी बनाने या कहने से बच रहे हैं। क्यों

हम बच नहीं रहे हैं। यह ट्रायल है। हमें एक पर्वतीय क्षेत्र] अंचल में टाउनशिप भी बनानी है] विकास भी करना है] सड़कें भी बनानी हैं। दुर्गम से दुर्गम क्षेत्र को चौड़ी सड़कों से जोड़ना चाह रहा हूं। लोग राजनीतिक दृिष्ट से देखते हैं। मैं उसे विकास की दृष्टि से देखता हूं। देहरादून से अच्छी सरकार चल रही है। जो सुविधाएं हम गैरसैंण में तैयार कर रहे हैं] उसका भी उपयोग करेंगे। हमें ग्रीष्मकाल में वहां बैठने दीजिए। समय को आगे किसने देखा है। कुछ भविष्य के ऊपर भी तो छोड़ना चाहिए ना।

 

लोकायुक्त पर भी आपने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। जबकि खण्डूड़ी ने एक सशक्त लोकायुक्त बिल पारित किया था

यह सब फुलझड़ियां हैं। आप व्यवस्था में सुधार तो ला नहीं पाए और बातें बड़ी कर देंगे। पहले व्यवस्था मजबूत तो कीजिए। जिस व्यवस्था पर पहले से ही लापरवाहियां हावी हों] उस पर आप और ज्यादा भार थोप देंगे तो क्या होगा? वह और चरमरा जाएगी। धीरे&धीरे हम उस लाइन पर चल रहे हैं। हम राज्य को बहुत अच्छा लोकायुक्त देंगे। हम किसी की कॉपी नहीं करेंगे। किसी राजनीति से प्रेरित होकर इसे नहीं बनाएंगे] बल्कि राज्य की जनता के क्रोध को शांत करने के लिए उसके अनुकूल एक अच्छा कानून देंगे। उसका नाम आप लोकपाल] लोकायुक्त कुछ भी रख दीजिए।

 

खनन नीति को लेकर प्रदेश में बवाल मचता रहा है। आपकी सरकार पर भी आरोप लग रहे हैं

मैंने आज ही दो अधिकारियों से बात की है। मैंने अधिकारियों को बोला है कि खनन कारोबारियों में जो गलत कर रहा है] उसमें डर तो पैदा करो। हमारे यहां स्थितियां अलग हैं। यहां नदियां फैली हुई हैं। उत्तर प्रदेश बगल से लगा हुआ है। निकासी हमारी कमजोर है। हम कोई नीति अभी तक नहीं बना पाए हैं। हम अभी तक यही नहीं तय कर पाए हैं कि खनन करना है या नहीं।

 

इस पर आपकी नीति क्या होगी

देखिए] बिना चुगान के] बिना खनन के] बिना नदी की सफाई किए] आप न तो नदी की भलाई कर रहे हैं और न ही प्रदेश की। आप देखिए जमीनें कट रही हैं। नदियां उथली हो गई हैं। गधेरे तक उथले हो गए हैं।  गांव में जनजीवन खतरे में हैं। इसलिए हम हिम्मत करके कह रहे हैं कि हम चुगान करेंगे। लेकिन तरीका वैज्ञानिक होगा। अभी यह हो रहा है कि नदियों के किनारे खोदकर लोग भाग जा रहे हैं। जबकि नदी को बीच में खोदने की जरूरत है। मैंने बोला है] इस पर स्पष्ट तरीके से आगे बढ़ो। टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी बनाएं ताकि हम पर कोई उंगली नहीं उठा सके। मगर मेरी विडंबना यह है कि जो चार&छह सौ पट्टे पहले से आवंटित हैं] मैं उनके बोझ से दबा हूं। पट्टाधारी इसकी आड़ में कहीं भी गड़बड़ कर दे रहा है तो मीडिया हल्ला मचा देता है। मैं धीरे&धीरे इस पर भी काम कर रहा हूं।

 

आपकी कार्यशैली पर उंगली उठने लगी है कि आप कठोर निर्णय लेने से कतरा रहे हैं

जहां कठोर कदम उठाना आवश्यक है] वहां उठाया जा रहा है। जहां आपको सुधार लाना है वहां आपको बहुत सारे तरीके अपनाने पड़ेंगे। हम इस समय एसआईटी को मजबूत कर रहे हैं। मैंने जिलाधिकारियों को जिम्मेदारी दे दी है कि जिसके क्षेत्र में अवैध रूप से खनन होगा] आप जिम्मेवार होंगे। आप उसे रोकिए। धीरे&धीरे हम पुलिस को भी कस रहे हैं। मगर इसके लिए यह आवश्यक नहीं है कि आप ढोल पीटें।

 

लेकिन राजनीति में परसेप्शन जरूरी होता है। और परसेप्शन यह है कि राज्य में नौकरशाही बहुत बेलगाम हो गई है

यह गलत परसेप्शन है। नौकरशाह से जितना काम मैं ले रहा हूं उतना काम किसी ने नहीं लिया है। मैं जिले&जिले में अधिकारियों को दौड़ा रहा हूं। 

 

मगर यह संदेश क्यों जा रहा है कि अधिकारी मंत्री तक की नहीं सुनते

मंत्री के अपने कारण हो सकते हैं। किसी को किसी से अरुचि हो गई है और उसे कहां और कैसे उठाना है] इसे बिना यह समझे कि इससे किसे नुकसान होगा] इन बातों को हवा दी गई है। जो काम मुख्यमंत्री से बात कर हो सकता है] उस पर मुख्यमंत्री से बात करें। जो काम मुख्य सचिव से होगा] वह उनसे कराया जा सकता है। इसे हवा देने की जरूरत नहीं थी। यह उनकी अपनी राजनीतिक समझ है। इस पर मैं क्या कहूं। लेकिन यह जरूर है कि हमारे जो अधिकारी हैं] वे अपनी क्षमता के मुताबिक काम कर रहे हैं। हां] हम और थोड़ा बेहतर काम लेना चाहते हैं। मैंने उनसे क्षमता और बढ़ाने एवं रिस्क लेने को कहा हैं। कुछ अधिकारी ऐसा कर रहे हैं और रिजल्ट भी दे रहे हैं। आप दंड के रूप में व्यक्ति को एक जगह से दूसरे जगह भेज सकते हैं] लेकिन यदि उनसे काम लेने हैं तो आपको उनकी क्षमता को जागृत करना होगा। एक टीम लीडर के रूप में मैं यही कर रहा हूं। यदि मैं चाबुक चलाने लगूं तो कुछ समय के लिए हरीश रावत को लाभ तो हो सकता है लेकिन राज्य को लाभ नहीं होगा। मैं जो कर रहा हूं] उससे अगले पांच&दस सालों में प्रदेश एक बड़े मुकाम पर पहुंचेगा।

 

प्रदेश की पलायन और स्वास्थ्य समस्या पर न तो पिछली सरकार कुछ खास कर पाई और न आप की सरकार में हो पा रहा है। आप कहां तक सफल रहे हैं

मैं स्वास्थ्य मामले में स्लिप कर रहा हूं। मैं इसमें चार कदम आगे बढ़ता हूं तो सवा चार कदम पीछे हो जा रहा हूं। मेरी सरकार] खुद स्वास्थ्य मंत्री और अनुभवी सचिव गंभीरता से स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने में लगे हुए हैं। यह सच्चाई है कि अभी प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बहुत कुछ करना है। मैंने एक&दो फैसले लिए हैं। मुझे उम्मीद है कि एक साल में इसमें सुधार दिखने लगेंगे। शिक्षा में बहुत हद तक सुधार हो चुका है। प्राइमरी शिक्षा में मैं आज यह कह सकता हूं कि शत&प्रतिशत स्कूलों में शिक्षक हैं। ९० फीसदी में पूरे शिक्षक हम दे पाए हैं। अगले तीन महीने में हम माध्यमिक स्तर पर भी शिक्षक दे देंगे। पहाड़ों में शिक्षकों की कमी को हम दूर कर पाए हैं। पलायन पर मैं त्रिस्तरीय नीतियों पर काम कर रहा हूं। इस समय मैं धीरे&धीरे पलायन पर नियंत्रण की नीति पर काम कर रहा हूं। फिर इस पर फुल स्टॉप लगाएंगे। इसके बाद रिवर्स पर काम करेंगे। इन तीनों पर नीति मैंने बना ली है। जैसे] पलायन नियंत्रण के लिए पेंशन व्यवस्था को मजबूत कर रहा हूं। ताकि वह प्रदेश छोड़ने से पहले सोचें। युवाओं के लिए हम कुछ तरीके निकाल रहे हैं ताकि उन्हें अपनाकर युवाओं का पलायन रोक सकें। जैसे हमने अखरोट के पेड़ लगाने की नीति बनाई है। इसे सरकार ही खरीदेगी] इससे युवाओं की आय निश्चित हो जाएगी।

 

ऐसी योजनाओं में व्यापक भ्रष्टाचार की बातें सामने आती रही हैं। कैसे आप इस पर नियंत्रण रखेंगे

हम इसे सीधे व्यक्ति उन्मुख कर रहे हैं। आप पेड़ लगाओ। तीन साल का दिखाओ और चार सौ रुपए प्रत्येक पाओ। यदि कोई व्यक्ति अखरोट के १०० पेड़ लगाता है। तीन साल के बाद चालीस हजार रुपए सरकार से सीधे उस व्यक्ति को मिलेंगे। अखरोट] नींबू या फिर चारा प्रजाति की खेती के लिए प्रोत्साहन दे रहे हैं। चारा हमारे यहां कम है। इसलिए हम इसका प्रोत्साहन कर रहे हैं। ताकि इससे पशुधन और दुग्ध उद्योग और विकसित हो। चारे में हम आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। इसलिए हमने चार रुपए दुग्ध उत्पादक को बोनस देने की ?kks"k.kk की है।

 

ऊर्जा प्रदेश हम नहीं बन पाए। जब विद्युत समस्या भी प्रदेश में है। आने वाले समय में हम इससे कैसे उबर पाएंगे

हम इसमें बड़ी छलांग नहीं लगा रहे हैं। मैंने जो नीति बनाई है] उसमें गांव में एक मेगावाट से पांच मेगावाट तक परियोजना लगाने को प्रोत्साहन दे रहे हैं। हालांकि इसमें अभी सफलता नहीं मिली है। इसमें समय लगेगा। आने वाले समय में उद्योगपति विश्वास करेंगे तो जरूर आएंगे। विद्युत उत्पादन के लिए छोटे स्तर पर संकलित कर रहे हैं। मैंने एक योजना चलाई है ^मेरा गांव] मेरा धन।^ इसमें आप गांव में आंगनबाड़ी] स्कूल आदि बना दीजिए। सरकार रेंटल&एग्रीमेंट कर रही है। हम उसमें १२ से १२ .५ फीसदी दे रहे हैं। इस पर जल्द ही रिस्पॉन्स आने लगेगा। जब रिस्पॉन्स आने लगेगा तो हम संभाल नहीं पाएंगे। यह रिवर्स पलायन करने की नीति है। यह अंतिम चरण है। जिसकी ?kks"k.kk मैंने अभी ही कर दी है। मेरा मानना है कि कम से कम सात साल लगेंगे] तब रिवर्स पलायन होने लगेगा।

 

आपने केदारनाथ में बहुत अच्छा काम किया है। लेकिन आपने अर्द्धकुंभ को ढीला छोड़ दिया है। उसकी तैयारियों में गति नहीं आ पाई है

नहीं] यह गलत है। यह पहली बार हुआ है कि राज्य ने अपने मद से १५० करोड़ रुपए जारी भी कर दिए हैं। इसमें टेंडर भी हो गया है। मेला अधिकारी और पुलिस भी नियुक्त कर दिए गए हैं। उन्हें प्राथमिकता भी बता दी है। हम दो तरह से काम कर रहे हैं। एक २०० करोड़ का] दूसरा १००० करोड़ का। १००० करोड़ केंद्र से मिलना है। वह अभी मिला ही नहीं है।

 

आप नेशनल गेम्स को प्रदेश में लाने में सफल हुए। इसके लिए क्या तैयारियां चल रही हैं

दो स्टेडियम तैयार हो गए हैं। और स्टेडियम तैयार हो रहे हैं। खेलगांव को चिह्नित कर दिया गया है। केंद्र से भी इसमें मदद मिलनी है। लेकिन हम इस तरह से काम कर रहे हैं] यदि केंद्र से मदद नहीं भी मिलती है या विलंब होता है तो हम काम करते रहेंगे। गेम्स को छूटने नहीं देना है। हमने एक नीति यह बनाई है कि २०१५-१६ में ग्रामीण और स्कूली खेल कराएंगे। हम खेल के लिए प्रोत्साहन दे रहे हैं। इस ओर युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं ताकि राज्य को मेडल भी मिल सकें।

 

प्रदेश के जो लोग बाहर अच्छा काम कर रहे हैं] उन्हें राज्य सम्मान नहीं दे पा रहा है। उन्हें दूसरे राज्य सम्मान देते हैं। मैं पद्म सम्मान से संबंधित बात पूछना चाहता हूं। ऐसा क्यों हो रहा है

राज्य की इसमें उतनी गलती नहीं है। जो जहां काम करता है] वहां की सरकार को उसका नाम पद्म सम्मान के लिए देना होता है। खड़क सिंह वल्दिया जी और प्रसून जोशी जी ने अपने-अपने क्षेत्र में बहुत काम किए हैं। उनका सम्मान होना अच्छा है। हम लोगों ने भी जिनके नाम की संस्तुति की] वह भी अच्छे हैं। स्वामी राम ने प्रदेश में स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा काम किया। हेमवती नंदन बहुगुणा के काम को कौन नकार सकता है। आगे यदि एनडी तिवारी जी का होगा तो उनका नाम भी भेजेंगे। मिलना या न मिलना यह चयन करने वाले को अपनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है। पद्मश्री में भी हमने जिनके नाम भेजे] उन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में बहुत अच्छे काम किए हैं। 

 

क्या इसमें केंद्र ने कोई राजनीति की है। आपको ऐसा लगता है

इस बार जिन्हें मिले हैं] उनमें से कई निश्चित ही आइडियोलॉजी के तौर पर उनकी ओर ज्यादा झुके हुए लोग हैं। ऐसा होता भी है। मैं इस पर ज्यादा नहीं कहना चाहता।

 

आपका दो साल का कार्यकाल शेष है। इसमें दो या तीन सबसे बड़ी प्राथमिकताएं आपकी क्या रहेंगी

इस समय मेरी प्राथमिकता यह है कि पर्यटन का जो ढांचा आपदा के बाद पूरी तरह चरमरा गया है] उसे कैसे फिर से मजबूत किया जाए। मैं उसे रीस्टोर करने में लगा हूं। मेरे लिए दूसरी सबसे बड़ी चुनौती पहाड़ी क्षेत्रों में खेती को बढ़ावा देना है] ताकि वहां से पलायन रुक सके। क्योंकि खेती के बिना पलायन नहीं रोका जा सकता। उत्तराखण्ड की शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाना चाहता हूं] जिससे पहाड़ के बच्चों को रोजगार या नौकरी की तलाश में भटकना न पड़े। वे इतने सक्षम बनें कि संस्थान उन्हें खुद रोजगार के लिए बुलाएं।

 

जब से आप मुख्यमंत्री बने हैं] आपसे अपने दूरी बनाने लगे हैं। ऐसा क्यों? किशोर] प्रीतम सिंह] सुरेंद्र नेगी कई नाम हैं

ये सब राजनीतिक व्यक्तित्व हैं। समय चुनना और उस पर कैसे कदम बढ़ाना है] यह उन्हें तय करना है। और हमारी उनके साथ शुभकामनाएं हमेशा बनी रहेंगी। लेकिन मैं यह बता दूं कि आपने जिनका नाम ¼प्रीतम सिंह] सुरेंद्र सिंह नेगी] किशोर उपाध्याय½ लिया उनमें किसी के साथ मेरी दूरी नहीं है। जिस कार्यक्रम के मेरे बयान को यदि किसी ने गलत तरीके से लिया तो वह सही नहीं है। जब पार्टी एक बड़े फलक का कार्यक्रम कर रही थी] तो उस कार्यक्रम को पीडीएफ की चर्चा बनाकर छोटा कर दिया गया। उस पर यदि मैंने कुछ बोला तो उसे गलत संदेश के रूप में नहीं लेना चाहिए।

 

किशोर पीडीएफ का जो मुद्दा बार-बार उठा रहे हैं] क्या वह गलत है

मैं गलत तो नहीं कहूंगा। इसमें दो बातें हैं। हमारे कार्यकर्ताओं को यह समझना होगा कि यह उनकी सरकार है। आखिर यह है तो कांग्रेस की ही सरकार न। हमें पीडीएफ वालों को आदर देना होगा। आखिर वह हमारे साथ आए तभी तो हमारी सरकार बनी। किशोर उपाध्याय जी के सामने दो मुसीबतें हैं। एक] पार्टी अध्यक्ष होने के कारण उन्हें कार्यकर्ताओं को सुनना भी पड़ेगा और उसे व्यक्त भी करना पड़ेगा। दूसरी] वह पार्टी के नेता हैं तो उन्हें पार्टी की जरूरतों को भी समझना पड़ेगा। यह उनकी बुद्धिमत्ता पर है कि वह इससे कैसे निपटते हैं

 

आप पर दायित्व बांटने का भी दबाव है। आप टालते जा रहे हैं

मैं टाल नहीं रहा हूं। मेरा काम करने का अपना स्टाइल है। मैं व्यक्ति का चयन बाद में करता हूं] पहले काम का चयन करता हूं। यदि हम किसी पर एक लाख खर्च करते है ¼जो जनता का पैसा है½ तो वह हमें दो लाख कमाकर दे भी तो।

 

एनडी तिवारी ने अपने समय में दायित्व बांटे थे तो उस समय आप सबसे बड़े कटु आलोचक थे। आज क्या यह आपकी राजनीतिक मजबूरी है

नहीं] राजनीतिक मजबूरी और राज्य की आवश्यकता के बीच सामंजस्य बनाना चाहता हूं। केवल राजनीतिक मजबूरी नहीं है। मेरे सामने उतनी स्थिरता नहीं है जितनी एनडी तिवारी के सामने थी।

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उत्तराखण्ड की अंतरिम fo/kkulHkk के अध्यक्ष रहे प्रकाश पंत की पहचान भाजपा की खण्डूड़ी और निशंक सरकार में कद्दावर मंत्री के तौर पर बनी। वर्तमान प्रदेश सरकार में भी वे संसदीय कार्य] विधायी] भाषा]

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