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आवरण कथा
 
धार्मिक संपत्तियों पर कब्जा

गुंजन कुमार@अजय शर्मा

 gunjan@thesundaypost.in

धर्मनगरी हरिद्वार में धार्मिक संपत्तियों को कब्जा कर बेचने के लिए भू&माफिया खूनी खेल खेलता रहा है। पिछले वर्ष हाईकोर्ट ने इन संपत्तियों की खरीद&फरोख्त को लेकर सीबीआई जांच कराने के आदेश दिए। इसके बावजूद यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। पुलिस प्रशासन का रवैया भू&माफिया को संरक्षण देने जैसा नजर आता रहा है। यहां तक कि उन्हें अदालती आदेशों की अवमानना होने का भी डर नहीं रहता

 

पूजा] उपासना] अधिनियम&१९९९ के तहत किसी भी धार्मिक संपत्ति की रजिस्ट्री या बिक्री नहीं हो सकती। इस अधिनियम में कहा गया है कि किसी उपासना स्थल चाहे वह मंदिर] मस्जिद] fxjtk?kj या मठ हो] उसको और उसके नाम पर बने धार्मिक स्थान को बेचा नहीं जा सकता और न ही लीज आदि पर दिया जा सकता है। अगर लोकहित में भूमि देनी जरूरी है तो पहले जिला न्यायालय तथा संबंधित जिलाधिकारी और चैरिटी कमिश्नर से एनओसी लेना अनिवार्य होगा। 

 

नैनीताल हाईकोर्ट ने पिछले साल एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए धर्मनगरी हरिद्वार में धर्मशालाओं] आश्रमों और मंदिर&मठों की संपत्तियों की खरीद&फरोख्त पर सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इससे प्रदेशवासियों और श्रद्धालुओं में उम्मीद जगी थी कि धार्मिक संपत्तियों को खुर्द&बुर्द करने वाले भू&माफिया पर नकेल कस पाएगी। मगर ऐसा हो न सका। भू&माफिया यहां अभी भी अपने नापाक इरादे को अंजाम देने में लगे हैं। माफिया के बुलंद हौसलों से साफ है कि इन्हें पुलिस और राजनेताओं का संरक्षण मिल रहा है। भूपतवाला में तो माफिया ने एक आश्रम में अधिकार प्राप्त पुजारी और उसके परिवार को बेदखल कर उस पर कब्जा कर लिया है। पुजारी और उनका परिवार सड़कों पर आ गया है। वह अपने गुरु के आश्रम को भू&माफिया से बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। 

 

दुनिया भर में कुंभ नगरी हरिद्वार की पहचान धर्म के नाम से है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं या तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए सैकड़ों धर्मशालाओं और आश्रमों का निर्माण किया गया। इसके लिए देश भर के कई सेठों ने बड़ी उदारता से करोड़ों&अरबों की रुपए संपत्तियां दान दे दीं। इन संपत्तियों का इस्तेमाल धर्म एवं सेवा के लिए होता रहा] लेकिन पिछले कई वर्षों से इनको खुर्द&बुर्द कर व्यावसायिक इस्तेमाल में लाया जा रहा है। इससे धर्मनगरी का स्वरूप बिगड़ चुका है। भू&माफिया को इस काम में पुलिस प्रशासन के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों का संरक्षण मिलता रहा। यही वजह है कि जिस किसी भी संत ने धार्मिक संपत्तियों को खुर्द&बुर्द होने से बचाने के लिए आवाज बुलंद की तो उसकी आवाज हमेशा के लिए बंद कर दी गई।

 

भूपतवाला स्थित शिव शक्ति हरिहर दास आश्रम पर भी माफिया की नजर काफी पहले से टिकी रही। यह आश्रम दस हजार वर्ग फीट से भी अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इस संपत्ति को १९७४ से पूर्व कुंभ मेले के अवसर पर गुरु महंत सुरजन दास ने खरीदा था। तब यहां झाड़ जंगल हुआ करता था। कहा जाता है कि गुरु महंत सुरजन दास ने स्वयं इसकी सफाई कर यहां पर कुटिया बनाई। इसी कुटिया में सुरजन दास आजीवन तपस्या करते रहे। महंत सुरजन दास का निधन १९८० में हो गया। इसके बाद उनके शिष्य स्वामी हरिहर दास ने इस जमीन पर  मंदिर] आश्रम] सत्संग हॉल आदि का निर्माण करवाया। यहां वर्षों तक साधु&संन्यासी निवास करते रहे। हरिहर दास फिरोजपुर के पंजाब से थे। पिछले कुछ वर्षों से इस आश्रम की जमीन को कब्जा करने के लिए हरिहर दास को धमकी मिलने लगी। इस पर वह आश्रम को बचाने के लिए अदालत की शरण में गए। सिविल अदालत हरिद्वार के निर्देश पर एक आयोग ने वर्ष २००१ में आश्रम की स्थलीय एवं कागजी जांच कर अदालत को रिपोर्ट सौंपी थी। जिसमें आश्रम को काफी पुराना बताया गया था। जांच में हरिहर दास ने गृह कर और जल कर के पेपर भी दिखाए। हरिहर दास के बड़े भाई सोहन लाल भी आश्रम में ही रह रहे थे। 

 

हरिहर दास ने अपने निधन से पूर्व पिछले साल ६ फरवरी को एक अधिकार&पत्र लिखा। इस अधिकार&पत्र में उन्होंने लिखा है] ^पिछले पांच वर्षों से मेरा एक गृहस्थ शिष्य शिव कुमार मेरी सेवा और शिव शक्ति मंदिर में रोजाना पूजा करता आ रहा है। एक माह पूर्व से वह] उसकी पत्नी और बच्चे आश्रम में रहने लगे हैं। मैं अपनी मिल्कियत वाले इस आश्रम में शिव कुमार को निवास करने] जीवन भर यहां रहकर शिव शक्ति मंदिर में बतौर पुजारी पूजा करने का अधिकार देता हूं। किसी व्यक्ति एवं मेरे किसी संबंधी को मेरे इस अधिकार पत्र को चुनौती देने का अधिकार नहीं होगा।^ इस अधिकार&पत्र के कुछ महीने बाद हरिहर दास का निधन हो गया। उनके निधन के बाद आश्रम पर पहले से नजर गड़ाए बैठा भू&माफिया फिर सक्रिय हो गया। 

 

हरिहर दास के भाई सोहन लाल और पुजारी शिव कुमार को शक है कि हरिहर दास को कई बार पंजाब ले जाकर वहां स्लो प्वाइजन दिया जाता रहा। यही उनकी मौत का कारण बना दोनों ने कई बार पुलिस से उनकी मौत की जांच का लिखित आग्रह भी किया] लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। यहां तक कि इन दोनों ने हरिद्वार जिलाधिकारी] डीजीपी उत्तराखण्ड को लिखित रूप से निवेदन किया है कि कुछ लोग भू&माफिया के साथ मिलकर आश्रम पर कब्जा करने के लिए सक्रिय हैं। इसे रोका जाए। सोहन लाल ने इसमें कुछ लोगों के नामों का जिक्र भी किया है। उनके पत्र के मुताबिक फतेहाबाद निवासी उमा देवी] कृष्ण द्घुडिया] ¼मां&बेटे½ के अलावा करतार सिंह उर्फ ज्ञानानंद] जग्गू] अशोक सैनी आदि मिलकर आश्रम को कब्जाने में लगे हुए हैं।

 

बताया जाता है कि इन लोगों ने पुजारी शिव कुमार को आश्रम छोड़ने के लिए साम&दाम&दंड&भेद सभी प्रकार के हथकंडे आजमाए। शिव कुमार इनके मंसूबे को नाकाम करने के लिए अदालत गए। सिविल न्यायाधीश रविशंकर मिश्रा ने अगस्त २०१४ को इनके मुकदमे में आदेश दिया की सुनवाई पूरी होने तक आश्रम में यथास्थिति बहाल की जाए। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन अदालत के आदेश का पालन करने में नाकाम रहा। हरिद्वार पुलिस और प्रशासन अदालत की अवमानना करने से भी नहीं हिचके। अदालत के इस आदेश के कुछ दिनों बाद ही आश्रम के पुजारी शिव कुमार की अनुपस्थिति में इन लोगों ने पुजारी की पत्नी और उनके छोटे&छोटे बच्चों को आश्रम से बाहर फेंकवा दिया। यही नहीं उनके सामान को भी बाहर फेंकवा दिया गया। इस ?kVuk क्रम पर पुजारी शिवकुमार का कहना है कि जिस दिन की यह ?kVuk है उस दिन मैं उन लोगों की शिकायत लेकर एसएसपी के पास गया था। एसएसपी ऑफिस से बाहर निकलते ही मेरी पत्नी का फोन आया और उन्होंने कहा कि उसे बच्चों सहित आश्रम से बाहर कर दिया गया है।

 

मैंने उसे वहीं रुकने को कहा और आश्रम की ओर जाने लगा। रास्ते में मेरे पास खड़खड़ी चौकी प्रभारी विजेन्द्र कुमार कुमाई का फोन आया। उन्होंने मुझे आश्रम जाने से रोक दिया और चौकी बुला लिया। मेरे वहां पहुंचने पर आश्रम पर कब्जा करने वाले लोग भी चौकी पहुंच गए। उनके सामने चौकी प्रभारी ने मुझसे उनसे समझौता करने को कहा। जब मैं नहीं माना तो चौकी प्रभारी ने हम लोगों को स्वामी चैतन्य ज्योति आश्रम के स्वामी संजय महंत के पास जाने को कहा। हम लोग वहां गए। वहां संजय महंत ने भी वही कहा कि तुम आश्रम छोड़ दो। जब मैंने उनकी बात नहीं मानी तो फिर उन्होंने मुझे वहां से जाने को कह दिया। तब से अब तक मैं अपने पूरे परिवार के साथ हरिद्वार से बाहर रहकर आश्रम को बचाने का प्रयास कर रहा हूं। हरिद्वार की पुलिस भी इन लोगों से मिली हुई है। खासकर नगर कोतवाली के कोतवाल पीसी मठवाल। इन्हीं के संरक्षण में भू&माफिया आश्रम पर कब्जा कर रहे हैं और उल्टा मेरे खिलाफ शांति भंग करने का मुकदमा दर्ज करवा दिया गया। हरिद्वार के कुछ लोगों के दबाव और उनकी शिकायत पर बाद में एसएसपी ने कोतवाल को अपने ऑफिस से अटैच कर दिया। इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ।

 

कोर्ट के आदेश की अवमानना स्थानीय प्रशासन और पुलिस धड़ल्ले से कर रहे हैं। पुजारी और उनका पूरा परिवार आश्रम को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। उनके साथ हरिद्वार के कुछ समाजिक कार्यकर्ता खड़े हैं। ऐसे ही एक सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी हैं। वह भी कई बार एसएसपी और डीजीपी तक को भू&माफिया की इस करतूत की जानकारी देकर उन पर कार्रवाई करने का आग्रह कर चुके हैं। जेपी बडोनी कहते हैं] ^अधिकारी निरंकुश और बेलगाम होते जा रहे हैं। हालात इस कदर बदतर हैं कि अधिकारियों के लिए न्यायालय के आदेश भी मायने नहीं रखते। मैंने इस संबंध में एसएसपी को ई&मेल भेजकर प्रकरण की गंभीरता से अवगत कराया है। उनके कार्यालय में भी पत्र दिया था। मगर कुछ नहीं हुआ। डीजीपी को पत्र भेज कर इसकी सीबीसीआईडी जांच की मांग की है।^ आश्रम से पुजारी को बाहर निकालने के बाद उसके तीन हिस्से कर दिए गए हैं। आश्रम को तीन हिस्सों में बांट कर वहां निर्माण भी कराए जाने लगे हैं। इसमें अदालत से लेकर नगर मजिस्ट्रेट के आदेश की खुलेआम अवहेलना हो रही है। २७ जनवरी को जिलाधिकारी हरीश चन्द्र सेमवाल ने पुजारी शिव कुमार की शिकायत सुनने के बाद एसडीएम हरिद्वार और कोतवाली को अदालत के आदेश का पालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद आश्रम में निर्माण कार्य होना प्रशासन की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है।

 

 

बात अपनी&अपनी

मैेंने एसडीएम को न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया है। यहां ऐसा कोई कृत्य नहीं होने दिया जाएगा।

हरीश चन्द्र सेमवाल] जिलाधिकारी हरिद्वार

हां] १४ अगस्त २०१४ को मैंने पुजारी शिव कुमार को आश्रम नहीं जाने दिया था] मैंने उसे इसलिए चौकी पर बुलाया था] क्योंकि आश्रम में उसकी जान को खतरा हो सकता था। मैंने उसे समझाया था कि आश्रम की जमीन ज्ञानानंद शास्त्री आदि ने खरीद ली है। यह संतों का मामला है। फिर दाेनों पक्षों को चेतन ज्योति आश्रम के संजय महंत जीे के पास जाने को कहा था। मैंने यह भी कहा था कि यदि ज्यादा करोगे तो दोनों पक्षों को शांति भंग करने के मामले में जेल भेज देंगे।

विजेन्द्र सिंह कुमाई] खड़खड़ी चौकी प्रभारी  

चौकी इंचार्ज ने पुजारी शिव कुमार और ज्ञानानंद को हमारे पास भेजा था] लेकिन दोनों पक्षों में बात न बनने पर मैंने उन्हें वापस चौकी भेज दिया था। यह सही है कि हरिद्वार में हजारों करोड़ की संपत्ति खुर्द&बुर्द हो रही है।

संजय महंत] स्वामी चैतन्य ज्योति आश्रम भूपतवाला

आज हरिद्वार धर्मनगरी] तीर्थनगरी नहीं बल्कि भू&माफिया नगरी] भ्रष्टाचार नगरी बन गई है। जिस वक्त हाईकोर्ट ने धार्मिक संपत्तियों के खुर्द&बुर्द होने की जांच सीबीआई को सौंपी थी] मैंने उस वक्त मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा था कि एक भ्रष्ट अधिकारी से इसकी जांच कराने से कोई हल नहीं निकलेगा। मेरा अंदेशा आज सही निकल रहा है। जब धार्मिक संपत्ति की बिक्री नहीं हो सकती तो फिर ऐसा कैसे हो रहा है। सीबीआई की जांच का क्या हुआ? सरकार हमें बताए।

शिवानंद महाराज] संस्थापक मातृ सदन

मेरा उस आश्रम या उसकी संपत्ति से कोई लेना&देना नहीं है। जो बंदा वहां है] उसको महाराज जी ने चादर चढ़ाई है। इसलिए वह अपना अधिकार जमा रहा है।

ज्ञानानंद शास्त्री

 

 
         
 
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