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खास खबर 
 
तैयारी में देरी

 

गुंजन कुमार@अजय शर्मा

 gunjan@thesundaypost.in

 

सदियों से श्रद्धालुओं और संन्यासियों की आस्था का प्रतीक कुंभ मेला कई बार अव्यवस्थाओं के चलते हादसों के दुखद जख्म भी छोड़ता रहा है। इसके बावजूद अतीत की गलतियों से सबक लेने में लापरवाही की जा रही है। हरिद्वार में इसी वर्ष के अंत से अर्द्धकुंभ शुरू हो जाएगा। लेकिन जिले में इसकी तैयारियां करने वाले आला अधिकारियों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं

 

हरिद्वार को धर्म नगरी] तीर्थ नगरी] देव नगरी] कुंभ नगरी जैसे न जाने कितने और विशेषणों से जाना जाता है। प्रदेश का यह इकलौता ऐसा जनपद है जहां सबसे ज्यादा पर्यटक या श्रद्धालु आते हैं। वह भी साल भर। प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी हजारों में है। सनातन संस्कृति के पर्वों] मसलन स्नान पर्वों] कांवर मेले] कुंभ और अर्द्ध कुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच जाती है। अगले साल यहां ^अर्द्ध कुंभ मेला २०१६^ आयोजित होगा। कुंभ मेले में श्रद्धालुओं की उमड़ने वाली भीड़ को ध्यान में रखते हुए इसकी तैयारियां साल भर पहले से ही शुरू की जाती हैं। मगर इस बार जिले में कई आला अधिकारियों के पद लंबे समय से खाली हैं। इनकी गैर मौजूदगी के कारण अर्द्ध कुंभ का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। जाहिर है कि काम विलंब से शुरू होने पर अंत में जल्दबाजी होगी। ऐसे में ज्यादा पैसा खर्च किया जाएगा और गुणवत्तापूर्ण काम भी नहीं होगा। जैसा कि कुंभा मेला&२०१० में हुआ था। इसलिए कुंभ मेले के लिए केंद्र और प्रदेश से मिलने वाले सैकड़ों करोड़ रुपए में भ्रष्टाचार की आशंकाएं अभी से जताईं जाने लगीं हैं।

 

वर्ष २०१० में हरिद्वार में पूर्ण कुंभ लगा था। २०१६ में यहां अर्द्ध कुंभ लगना है। वैसे यह अर्द्ध कुंभ मेला २०१६ है] लेकिन दिसंबर २०१५ के अंत में ही यह शुरू हो जाएगा। इस मेले में देश&विदेश के करोड़ों श्रद्धालु पहुंचेंगे। पूरी दुनिया का मीडिया इसे कवर करने पहुंचेगा। देश भर के अखाड़े और उनके संन्यासी भी कुंभ में पहुंचते हैं। उस दौरान पूरा हरिद्वार गंगा में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं से अटा पड़ा रहता है। इसके लिए साल भर पहले से ही तैयारी शुरू हो जाती है। ताकि देश&विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। कई स्थायी और अस्थायी निर्माण किए जाते हैं। कायदे से इसका काम पिछले साल से शुरू हो जाना चाहिए था। लेकिन अधिकारियों की कमी के कारण यह शुरू नहीं हुआ है।

 

कुंभ मेले के लिए हरिद्वार में एक मेला अधिकारी होते हैं। आईएएस रैंक के अनुभवी अधिकारी को ही इसकी जिम्मेदारी दी जाती है। वर्तमान समय में यहां मेला अधिकारी का पद खाली है। इस पद पर लंबे समय से किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। जबकि पूरे कुंभ एवं अर्द्ध कुंभ मेले की तैयारी का जिम्मा इसी अधिकारी पर होता है। मेले में प्रशासन व्यवस्था से लेकर सुविधाओं और भीड़ के प्रबंधन की रणनीति मेला अधिकारी ही बनाते हैं। इसके अलावा मेले से संबंधित होने वाले सभी विकास कार्य भी इन्हीें की देख&रेख में किया जाता है। जब मेला अधिकारी ही नहीं हैं तो किसी प्रकार का काम हो रहा होगा] इसे सहज समझा जा सकता है। गंगा स्नान के लिए नए kkVksa के निर्माण से लेकर kkVksa पर रोशनी एवं साफ&सफाई के साथ&साथ अखाड़ों के संन्यासियों के ठहरने के लिए जमीन उपलब्ध कराने का जिम्मा भी मेला अधिकारी के पास होता है। इसके अलावा पुलिस प्रशासन और उसकी तैनाती से लेकर उनके रहने आदि की व्यवस्था भी इन्हें ही करनी होती है। मेला अधिकारी के न होने के कारण इनमें से कोई भी काम शुरू नहीं हुआ है।

 

खास बात यह है कि मेला अधिकारी ही हरिद्वार&रुड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष होते हैं। प्राधिकरण के जिम्मे हरिद्वार और रुड़की को सुंदर बनाने का काम है। इसमें उपाध्यक्ष का पद बहुत ही महत्वपूर्ण होता हैं। लेकिन प्राधिकरण की कई जिम्मेदारियां उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति के कारण रुकी पड़ीं हैं। इसके अलावा हरिद्वार और रुड़की में किसी प्रकार के विकास कार्य के लिए प्राधिकरण से मंजूरी लेनी जरूरी होती है। हालांकि अभी प्राधिकरण सचिव निधि यादव को उपाध्यक्ष का प्रभार दिया गया है। लेकिन सचिव और उपाध्यक्ष दोनों का जिम्मा संभाल रही निधि यादव पर काम का बोझ बहुत ज्यादा है। जिससे काम की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ना लाजिमी है।

 

हालांकि मेला अधिकारी के कंधे पर कुंभ मेले की पूरी जिम्मेदारी होती है। लेकिन जिलाधिकारी के बिना कोई जिला कैसे विकास की गति पा सकता है हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण जिले में जिलाधिकारी का न होना आश्चर्यचकित करता है। पूर्व जिलाधिकारी डी सेथिंल पांडियन को हरिद्वार जिले में खनन माफिया पर कार्रवाई करने के फलस्वरूप यहां से हटा दिया गया था। प्रदेश सरकार हरिद्वार में किसी जिलाधिकारी की तैनाती नहीं कर पाई है। डी संथिल पांडियन को जिले में खनन के खिलाफ आंदोलन कर रहे आंदोलनकारियों का समर्थन प्राप्त है। यही कारण है कि खनन के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे लोगों ने उन्हें हटाने का विरोध भी किया था। जिसमें मातृ सदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद महाराज भी हैं। बताया जाता है कि हरिद्वार में खनन के काले कारोबार में बड़े&बड़े कारोबारियों के अलावा कई सफेदपोश नेता भी शामिल हैं। वर्तमान कांग्रेस सरकार में इनकी सीधी पैठ है। इसीलिए खनन के खिलाफ कार्रवाई करने पर जिलाधिकारी को यहां से जाना पड़ा। जिलाधिकारी का कार्यभार मुख्य विकास अधिकारी ¼सीडीओ½ रंजना सिंह देख रही हैं।

 

जिलाधिकारी का पद खाली होने के कारण न सिर्फ खनन माफिया पर नकेल कसने में लापरवाही हो रही है बल्कि जिले में विकास का पहिया भी पूरी तरह थम सा गया है। शहर में लगने वाले अर्द्ध कुंभ मेले की तैयारी कराने में भी जिलाधिकारी की अहम भूमिका होती है। इनके और मेला अधिकारी के न होने से यह तैयारी पूर्णतः रुकी पड़ी है। यही नहीं पिछले दिनों ही मुस्लिमों के पवित्र स्थल पिरान कलियर में उर्स मेला संपन्न हुआ। यहां भी देश&विदेश से लाखों जाहरीन आए थे। अधिकारियों के न होने से करीब महीने भर चलने वाले इस उर्स मेले में अव्यवस्था साफ दिखी। जिलाधिकारी न होने के कारण एसडीएम रुड़की की देख&रेख में उर्स मेला संपन्न हुआ।

 

जिले में न सिर्फ जिलाधिकारी] मेला अधिकारी] हरिद्वार&रुड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष जैसे आलाधिकारियों के पद खाली हैं बल्कि हरिद्वार के नगर मजिस्टे्रट भी लंबे समय से नहीं हैं। उनका प्रभार एसडीएम हरिद्वार वीर सिंह बुद्धियाल के पास है। नगर मजिस्टे्रट के न होने के कारण जिले के कई काम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। जिले में डिप्टी कलेक्टर के चार पद हैं। जबकि यहां एक भी डिप्टी कलेक्टर तैनात नहीं हैं। सरकार की इस लापरवाही के पीछे का कारण किसी को समझ में नहीं आ रहा है।

 

साल भर पर्यटकों और श्रद्धालुओं से गुलजार रहने वाले इस जिले में सरकार एक अदद पर्यटन अधिकारी की तैनाती भी नहीं कर पाई है। २०१३ में आई भीषण आपदा के बाद चार धाम का तीर्थाटन लगभग खत्म सा हो गया है। चारधाम यात्रा पर जहां हरेक साल लाखों तीर्थयात्री आते थे] वहीं पिछले सीजन में कुछ हजार यात्री ही पहुंचे। जबकि उस आपदा का कोई भी प्रभाव हरिद्वार के पर्यटन पर नहीं पड़ा है। आज भी हरिद्वार में रोजना हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान करने और मंशा देवी के दर्शन करने आ रहे हैं। यही नहीं हरिद्वार में विदेशी पर्यटक भी बहुत अधिक संख्या में आते हैं। इसलिए एक स्थायी पर्यटन अधिकारी की यहां बहुत जरूरत है। इसके बावजूद जिले में पर्यटन अधिकारी नहीं हैं। जिले के पर्यटक अधिकारी का कार्यभार देहरादून के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी वाईएस गंगवार के पास है। गंगवार प्रत्येक शनिवार हरिद्वार आते हैं। लेकिन सप्ताह में एक दिन का कार्य हरिद्वार के लिए काफी नहीं है। इस एक दिन में वह अपने ऑफिस का काम भी शायद ही निपटा पाते होंगे। इनके पास देहरादून और हरिद्वार जिले की ही जिम्मेदारी नहीं है] बल्कि कुल पांच जिलों का प्रभार भी इनके पास ही है। देहरादून] हरिद्वार के अलावा टिहरी] उत्तरकाशी आदि का काम भी है। ऐसे में यह पर्यटन अधिकारी किसी भी जिले का काम सही से निपटा पाते होंगे] ऐसा दावा कोई शायद ही कर पाए।

 

हरिद्वार जनपद में खाली आलाधिकारियों की कुर्सी

पद समय प्रभारी अधिकारी

मेला आधिकारी छह माह सचिव प्राधिकरण

जिलाधिकारी एक माह सीडीओ

हरिद्वार&रुड़की विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष छह माह सचिव

नगर मजिस्ट्रेट तीन माह एसडीएम सदर

चार डिप्टी कलेक्टर

पर्यटन अधिकारी एक साल पर्यटन अधिकारी देहरादून

ज्वाइंट मजिस्टे्रट रुड़की

 

प्रदेश में अधिकारियों की कमी के कारण कुछ पद खाली हैं। हरिद्वार में डीएम और अन्य अधिकारियों की नियुक्ति जल्द की जाएगी।

अरविंद सिंह हयांकी] अपर सचिव कार्मिक

 

तीर्थाटन मेरे पास है लेकिन कुंभ मेला शहरी विकास मंत्रालय के अंदर आता है। फिर भी मैं मुख्यमंत्री से बात कर उनकी जल्द तैनाती कराने की कोशिश करूंगा।

दिनेश धनै] पर्यटन मंत्री

 
         
 
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पौड़ी के जिलाधिकारी सुशील कुमार ने राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक ली। इस दौरान श्रीनगर तहसील में आठ अमीन तैनात होने के बावजूद महज छह रुपए ही वसूली होने पर डीएम खासे नाराज दिखे। उन्होंने

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