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संघर्ष
 
सड़क के लिए संघर्ष

 

आकाश नागर

तराई में महज १५ किमी लंबी सड़क के पुनर्निर्माण को लेकर लोग तीन वर्षों से आंदोलनरत हैं। इस दौरान सड़क पर दुर्घटनाओं के चलते कई लोग जान भी गंवा चुके हैं। दूसरी तरफ क्षेत्रीय नेता सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने की होड़ में लगे रहे

 

 

ऊधमसिंहनगर जिले के अंतर्गत गदरपुर-दिनेशपुर मटकोटा-हल्द्वानी मोटर मार्ग क्षेत्रीय जनता के लिए खूनी सड़क बनकर रह गई है। बुरी तरह क्षतिग्रस्त इस सड़क पर अब तक कई लोग वाहन दुर्द्घटनाओं में अपनी जानें गंवा चुके हैं। जनता निरंतर सड़क को दुरुस्त और चौड़ा करने की मांग को लेकर आंदोलन करती आई है। आंदोलन में शरीक रहे ३७ लोगों के विरुद्ध मुकदमे तो दर्ज किए गए, लेकिन समस्या जस की तस है। दूसरी तरफ राजनेताओं में सड़क के पुनर्निर्माण को मंजूरी दिलाने का श्रेय लेने की होड़ मची रही। इसमें पहले नंबर पर गदरपुर के भाजपा विधायक अरविंद पांडेय हैं। दो साल पूर्व पांडेय ने बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगवाए कि उन्होंने सड़क को दुरुस्त और चौड़ा कराने के काम को मंजूर करवा दिया है। लोगों ने इसके लिए उनका जगह-जगह स्वागत भी किया। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने गदरपुर में २६ मार्च २०१३ को जैसे ही सड़क की मरम्मत और इसे चौड़ा करने के कार्य का उद्द्घाटन किया तो विधायक ने भरी सभा में उनका विरोध करते हुए कह दिया कि सड़क बनाने की द्घोषणा पूर्व में हो चुकी है। पांडेय ने शिलान्यास नहीं होने दिया। इससे खार खाए बहुगुणा ने सड़क के काम को ईपीसी (इंजीनियरिंग प्रोक्युरमेंट कन्सट्रक्शन) मोड पर डाल दिया। इसके तहत सड़क पर टोल टैक्स का प्रावधान है। महज १५ किलोमीटर की इस सड़क पर सिडकुल के कर्मचारियों का भारी आवागमन रहता है, को लेकर एक बार फिर से जंग लड़नी पड़ी। एक महीने तक धरना- प्रदर्शन करने के बाद १५ फरवरी २०१४ से काम शुरू करने का आश्वासन मिला। २६ अप्रैल २०१४ को भाजपा के दो विधायकों अरविंद पांडेय और राजकुमार ठकुराल ने लोक निर्माण विभाग के अतिथि गृह में रिबन काटकर सड़क के पुनर्निर्माण कार्य का शुभारंभ भी कर दिया। लेकिन इस दौरान पीडब्ल्यूडी का ठेकेदार काम को बीच में छोड़कर ही भाग खड़ा हुआ। १० जून को एक बार फिर सड़क निर्माण संद्घर्ष समिति धरने पर बैठी। तीन माह तक धरना-प्रदर्शन चला इसके बाद २७ अगस्त २०१४ को पूर्व कैबिनेट मंत्री तिलकराज बेहड़ के नेतृत्व में आंदोलनकारी देहरादून स्थित बीजापुर गेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिले। मुख्यमंत्री ने उसी दौरान राज्य सेक्टर को आदेश दिया कि मात्र आठ किलोमीटर का कार्य इस बजट से कर दिया जाए। इसका कारण यह था कि सड़क के लिए जो धनराशि ११ मार्च २०१३ में स्वीकूत हुई थी वह इन डेढ़ सालों में लेबर, डीजल, पेट्रोल और निर्माण सामग्री के रेट बढ़ जाने से बढ़ गई। मुख्यमंत्री हरीश रावत के आदेश के बाद पुनः टेंडर जारी किए गए। ठेकेदार ने बैंक गारंटी के रूप में ३ करोड़ २४ लाख रुपए जमा करा दिए। लेकिन इसके बावजूद कार्य शुरू नहीं हो सका। कारण यह बताया गया कि इसके लिए राज्य सेक्टर के पास आवश्यक धनराशि नहीं है। तीन माह बीतने के बाद भी जब निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो सड़क निर्माण संद्घर्ष समिति पुनः १ नवंबर २०१४ से अनशन पर बैठ गई है।

 

इस मामले में अब नया मोड़ यह आ गया है कि सड़क का मरम्मत कार्य १५ किलोमीटर का ही होगा। २० सितंबर २०१४ को लोक निर्माण विभाग से कार्य वापस लेकर सिडकुल को दे दिया गया है। लेकिन सिडकुल की ओर से इस दिशा में अभी तक कोई खास कदम नहीं उठाए गए हैं। ढाई माह बाद भी मरम्मत कार्य के लिए भेज गए प्रस्ताव को स्वीकूति नहीं मिल पाई है। गौरतलब है कि मार्ग की मरम्मत और चौड़ीकरण लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जाना था। इसके लिए ९० करोड़ का प्रस्ताव भी बनाया गया था। मगर इस बीच सितंबर में शासन ने निर्माण कार्य का जिम्मा सिडकुल को सौंप दिया। इसके बाद सिडकुल अधिकारियों ने मार्ग की मरम्मत के लिए सर्वे किया और एक पखवाड़ा पूर्व करीब २१ करोड़ रुपए का बजट संबंधी प्रस्ताव शासन को भेजा। फिलहाल इसे स्वीकूति नहीं मिल पाई है। बताया जाता है कि सिडकुल के प्रबंध निदेशक (एमडी) को २० करोड़ रुपए की लागत वाले ही प्रस्ताव पास कराने का अधिकार है। इससे ज्यादा का बजट पास कराने के लिए सिडकुल बोर्ड से अनुमति लेनी पड़ती है। इस बोर्ड के अध्यक्ष मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव, उपाध्यक्ष और एमडी होते हैं। ऐसे में सड़क निर्माण में और भी समय लगने की संभावना है। इसके अलावा यदि २१ करोड़ से कम लागत वाले बजट को स्वीकूति मिलती है तो इससे काम ठीक से नहीं हो सकेगा। जबकि चौड़ीकरण (टू लेन) के लिए फिर से सर्वे करना होगा और उसके लिए अधिक बजट की जरूरत होगी। इस सड़क के न बनने से करीब १०० टेम्पो और मैजिक चालक भूखमरी के कगार पर हैं। ऐसे ही एक भुक्तभोगी विकास स्वर्णकार हैं। जिनके दो मैजिक वाहन गड्ढों में खराब होकर खड़े हैं। विकास के अनुसार लोगों ने करीब साढ़े चार लाख रुपए के मैजिक वाहन खरीदकर रोड पर उतारे थे। लेकिन रोड की खस्ता हालत से उनकी गाड़ियां खराब हो चुकी हैं। इसके चलते वे इनकी १० से १५ हजार की मासिक किस्त भी जमा नहीं करवा पा रहे हैं। माह में तीन हजार रुपए का टैक्स अलग से देना पड़ता है। 

 

गदरपुर के भाजपा विधायक अरविंद पांडेय भी १७ दिसंबर से विधानसभा में धरने पर बैठेंगे। उनका कहना है कि कांग्रेस के एक मंत्री के दबाव में मार्ग का निर्माण कार्य नहीं हो रहा है।

 

बात अपनी-अपनी

बोर्ड में प्रस्ताव पास होने के बाद ही कुछ कहा जाएगा। हम 20 करोड़ रुपए तक के ही निर्माण कार्य प्रस्तावित कर सकते हैं। लेकिन यह सड़क करीब 40 करोड़ रुपए के आस-पास बनेगी। इसके लिए बोर्ड में प्रस्ताव पास कराया जाए।

जीपी दुर्गापाल] एमडी सिडकुल

लोग सड़क के लिए धरने पर बैठे, लेकिन बदले में उन्हें मिले मुकदमे। उनमें से मैं भी एक हूं। इस मामले में राजनीति हावी है।

रविंद्र बजाज] भाजपा नेता

दिनेशपुर-मरकोटा मार्ग का सामरिक दृष्टि से महत्व है। दो साल से आंदोलन चल रहा है, लेकिन प्रदेश सरकार और राजनीतिक दलों की उदासीनता के चलते निर्माण नहीं हो पा रहा है। हरीश रावत सरकार पूरे प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का अभियान चलाए हुए है। लेकिन यहां कोई सुनवाई नहीं है। 

मास्टर प्रताप सिंह] वरिष्ठ पत्रकार

घड़ी-घड़ी बयान बदलने में माहिर हैं स्थानीय विधायक अरविंद पाण्डे।

जरनैल सिंह काली] बसपा नेता

 

 

 
         
 
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  • आकाश नागर

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को भेजा पत्र यूं ही सुर्खियों में नहीं रहा। इसका यह भी संदेश गया है कि मुख्यमंत्री बेहद

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