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आवरण कथा
 
नामधारी के नाम अपराधिक मुकदमों का पहाड़

 

शराब कारोबारी पॉन्टी चड्ढा और उनके भाई हरदीप की आपसी संद्घर्ष में हुई मौत के समय उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सुखदेव सिंह नामधारी की मौजूदगी ने राज्य की राजनीति में बवाल मचा दिया है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष पद से उनकी विदाई कर इस मुद्दे पर भाजपा को द्घेरने लगी है। इसके साथ ही राज्य पुलिस के तेज तर्रार डीजीपी सत्यव्रत बंसल स्पष्ट कह चुके हैं कि नामधारी के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों की समीक्षा होगी।

               गौरतलब है कि राज्य में पारदर्शी और भयमुक्त शासन देने का दावा करने वाली भाजपा सरकार के दौरान नामधारी की उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पर ताजपोशी की गई थी। जबकि नामधारी के विरुद्ध एक दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। यह बताना होगा कि नामधारी का अपराध और अपराधियों के साथ चोली-दामन का साथ रहा है। इसके अलावा भूमि संबंधी विवादों में भी नामधारी का नाम उछलता रहा है। ऊधमसिंहनगर में नामधारी के विरुद्ध १९९५ में थाना बाजपुर में पहला मुकदमा अपराध संख्या ६३/९५ बलवा, तोड़फोड़ तथा हत्या का दर्ज किया गया। इसी वर्ष थाने में उनके खिलाफ अपराध संख्या ६१४/९५ के तहत डकैती की संगीन धाराओं में भी मुकदमा दर्ज किया गया। यही वह दौर था जब हरिद्वार में खनन कारोबार में नामधारी जबरदस्त रूप से सक्रिय हो रहे थे। हरिद्वार से विशेष लगाव रखने वाले नामधारी ने अपराध की दुनिया में कदम रखते ही पीछे मुड़कर नहीं देखा। चार वर्ष हरिद्वार के खनन कारोबार में बिताने के बाद थाना बाजपुर में ही वर्ष २००० में मु ़अ ़़सं ़४७३/२००० जान से मारने की धमकी देने तथा बलवे के आरोप में नामधारी का नाम सामने आया। इसके बाद वर्ष २००१ में मु ़अ ़सं ़ ६७७/०१ और बाजपुर में हत्या के प्रयास तथा बलवे की धाराओं में नामधारी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ। जब उन्होंने एक बार अपराध कीे दुनिया में कदम रखा तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। 'दि संडे पोस्ट' के पास उपलब्ध नामधारी के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मामलों को सूची के अनुसार थाना बाजपुर में ही वर्ष २००१ में पुनः नामधारी के विरुद्ध हत्या के प्रयास और बलवा करने व जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा अपराध संख्या ७८८/९१ दर्ज किया गया। 

              वर्ष २००२ में थाना बाजपुर में ही नामधारी के विरुद्ध एस-सी/एसटी एक्ट तथा बलवे की धाराओं में मु ़अ ़सं ़ ३९१/०२ दर्ज किया गया, तो वर्ष २००३ में हत्या का प्रयास करने तथा बलवे को धाराओं में मु ़अ ़सं ़ ४८/०३ थाना बाजपुर में दर्ज किया गया। वर्ष २००३ में मु ़अ ़ सं ़ ४९/०३ में थाना बाजपुर में ही नामधारी को विरुद्ध एस-सी/एसटी एक्ट और जान से मारने को धमकी देने का मामला दर्ज किया गया। वर्ष २००३ में ही उनके विरुद्ध थाना बाजपुर में मु ़अ ़सं ़ ३१२७/०३ बलवा करने, जान से मारने की  धमकी देने तथा एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया। वर्ष २००६ में थाना बाजपुर में एक बार फिर नामधारी के विरुद्ध मु ़अ ़सं १३/२/०६ गुण्डा एक्ट के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया। वर्ष २००८ मु ़अ ़सं ़ ४५५/०८ थाना बाजपुर में नामधारी के विरुद्ध हत्या का प्रयास करने तथा जान से मारने को धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया।

               बाजपुर में दो दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमों में फंसे नामधारी ने २००९ में हरिद्वार का रुख किया। उन्होंने अपने पुराने संपर्को को तलाश कर हरिद्वार में अपना सिक्का जमाना शुरू किया। नामधारी की दृष्टि हरिद्वार की तमाम विवादित सपंत्तियों पर पड़ी। उनके विरुद्ध गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की भूमि को खुर्द-बुर्द करने, धोखाधड़ी, जालसाजी, साजिश रचने, जान से मारने की धमकी देने के आरोप में हरिद्वार के थाना कनखल में मु ़अ ़सं ़-धारा ४२०१, ४६७, ४६८, ४७१, ५०६ के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले की जांच के बाद नामधारी के अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष पद पर रहते ही पुलिस आरोप पत्र संख्या २६/११ दिनांक १९/४/११ में न्यायालय में पेश कर चुकी है। विवाद व साजिश का पर्याय बन चुके नामधारी ने अल्पसंख्यक आयोग जैसे संवैधानिक पद पर बैठकर हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में मुख्य राजमार्ग पर स्थित निर्मल-विरल कुटिया पर गिद्ध दृष्टि डाली। कुटिया की बेशकीमती भूमि को कब्जाने की मंशा से नामधारी ने अपनी पार्टी भाजपा के सिद्धांतों को बलि चढ़ाते हुए हरिद्वार में लेडी डॉन के नाम से प्रसिद्ध एक पूर्व माफिया डॉन की पत्नी, माफिया सरगना बबलू श्रीवास्तव की वर्तमान प्रेमिका तथा कांग्रेस पार्टी से संबंध रखने वाली जरायम पेशे में मशहूर एक ऐसी महिला को साथ मिलाया जो कि हरिद्वार की कई विवादित संपत्तियों पर अवैध कब्जा कर चुकी थी। वह हरिद्वार में बबलू श्रीवास्तव गैंग का संचालन करने के साथ-साथ यहां स्थित उसकी संपत्तियों की भी देखभाल कर रही थी। एक-दूसरे की धुर-विरोधी पार्टियों में शामिल नामधारी और लेडी डॉन निर्मल कुटिया की बेशकीमती भूमि को कब्जाने के लिए आपस में हाथ मिलाकर एक साथ हो लिए।

                  'दि संडे पोस्ट' के पास उपलब्ध प्रमाणों से यह साफ जाहिर होता है कि किस प्रकार भाजपा नेता बने नामधारी और कांग्रेस में सक्रिय लेडी डॉन २००९ से लगातार संपर्क में बने हुए हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कनखल क्षेत्र में मुख्य राजमार्ग पर स्थित निर्मल विरल कुटिया पर कब्जे को लेकर नामधारी ने हरिद्वार की लेडी डॉन का भरपूर सहयोग लिया जिसके चलते कुटिया में रह रहे किरायेदारों को जबरन वहां से भगा दिया गया। हालत यह है कि  कभी गुलजार रहने वाली यह बेशकीमती कुटिया इन दोनों माफियाओं के कब्जे में है। वर्तमान में लेडी डॉन के हथियारबंद गुर्गे कुटिया की निगरानी में लगे हुए हैं।

 

 
         
 
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