बागेश्वर। जिले की प्रशासनिक कार्यवाही पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यही है कि क्या प्रशासनिक कार्यवाही ईमानदार लोगों को परेशान करने के लिए की जाती है या इसकी आड़ में कुछ और ही चलता है। जिले क गरूड़ तहसील की एक द्घटना से तो ऐसा ही प्रतीत होता है। गरूड़ के उपजिलाधिकारी सुंदर सिंह की हालिया कार्यशैली से ऐसे ही सवाल तहसील भर में खड़े हो रहे हैं। बताया जाता है कि खनन व्यवसायी जीवन सिंह खेतवाल लाइसेंस और अन्य नियमों का पालन कर भंडारण का कार्य करते हैं। उनके भंडारण क्षेत्र में एक दिन औचक निरीक्षण के लिए क्षेत्र के उपजिलाधिकारी आए। लाइसेंस होने के बावजूद उपजिलाधिकारी ने भंडारण को अवैध बता दिया। यहीं नहीं उन्होंने बिना कोई वैध कारण बताए जांच के नाम पर १५ दिन तक कार्य रोकने का मौखिक आदेश दे दिया। यहां सवाल उठता है कि यदि खनन का भंडारण अवैध था तो उपजिलाधिकारी ने कार्य बंद करने और कार्यवाही का लिखित आदेश क्यों नहीं दिया। मौखिक आदेश क्यों दिया गया। व्यवसायी के एक शिकायती पत्र पर १५ दिनों के बाद बिना किसी जांच और कार्यवाही के जेसीबी मशीन छोड़ दी जाती है। साथ ही भंडारण क्षेत्र में काम करने की अनुमति भी दे दी जाती है। खनन व्यवसायी जीवन सिंह खेतवाल बताते हैं कि १७ मई को गरूड़ उपजिलाधिकारी सुंदर सिंह दलबल के साथ मेरे खनन भंडारण क्षेत्र सीमा में आए थे। उन्होंने वहां वाहन चालकों को डरा धमकाकर भगा दिया। जेसीबी मशीन को सीज कर लिया। २९ मई को उपजिलाधिकारी बिना किसी कार्यवाही के जेसीबी मशीन को छोड़ने के आदेश जारी कर देते हैं। इस द्घटना से खनन व्यवसायी अपने को पीड़ित बता रहे हैं। वह इसे एक षड्यंत्र की तरह देखते हैं। उनका साफ तौर पर कहना है कि उपजिलधिकारी गरूड़ ने जानबूझकर दो सप्ताह तक हमारे काम को बाधित किया है। जिस कारण मुझे १ लाख रुपए प्रतिदिन के हिसाब से १५ लाख रुपए से अधिक का नुकसान हो गया है। खनन व्यवसायी खेतवाल बताते हैं कि मेरे पास भंडारण करने संबंधित सभी जरूरी पेपर पहले से ही हैं। मैंने ईमानदारी से उपजिलाधिकारी के मौखिक आदेश को कार्यवाही मानकर १५ दिन तक अपने काम को रोक दिया था। काम रोकने को लेकर एक शिकायती पत्र मैंने बागेश्वर के जिलाधिकारी को जरूर भेजा। इस पत्र के बाद जिस तरह उपजिलाधिकारी ने अचानक हमारे काम को रोक दिया था। ठीक उसी तरह बिना जांच किए काम चालू रखने का आदेश दे दिया है। इस मामले में उपजिलाधिकारी सुंदर सिंह से बात की तो पहले वे इन सवालों से बचते नजर आए। बाद में उन्होंने कहा कि कार्यवाही नियमों के तहत की गई है। मौके पर खनन भंडारण के कागज न दिखाये जाने पर कार्यवाही की गई थी। कागज दिखाने पर सीज की गयी जेसीबी मशीन को छोड़ दिया गया है। जबकि व्यवसायी खेतवाल का कहना है कि उपजिलाधिकारी ने किसी न किसी के इशारे पर ऐसा किया ताकि यह भंडारण कुछ दिनों तक बंद रहे।

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